Pharma Stocks Down: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सभी ब्रांडेड और पेटेंटेड दवाइयों पर 100% का टैरिफ लगाने का ऐलान किया है। आने वाले 1 अक्टूबर से दवाइयों पर 100 फीसदी टैरिफ लग जाएगा। इस खबर के आने के बाद से ही भारत की फार्मा कंपनियों में हड़कंप मच गया है और शेयरों को तगड़ा झटका लगा है जिसके बाद से 26 सितंबर को सबसे ज्यादा फार्मा स्टॉक्स में बिकवाली देखने को मिल रही है। सबसे ज्यादा बिकवाली Sun Pharmaceutical, Laurus Labs, Natco Pharma और Biocon के शेयरों में दिख रही है और ये सभी स्टॉक्स 3 फीसदी से ज्यादा टूट चुके हैं। इसके चलते आज शुरुआती कारोबार में निफ्टी फार्मा इंडेक्स में करीब 2.25 फीसदी से ज्यादा की गिरावट देखने को मिल रही है।
इन स्टॉक्स में सबसे ज्यादा गिरावट
शुक्रवार के कारोबार में निफ्टी फार्मा इंडेक्स के सभी शेयर लाल निशान पर रहे। IPCA Laboratories, Ajanta Pharma, Gland Pharma और Divi's Laboratories के शेयर करीब 3% गिरे। वहीं Granules India, Zydus Lifesciences, Mankind Pharma और Alkem Laboratories में 2% से ज्यादा की कमजोरी आई। इसके अलावा Cipla, Glenmark Pharmaceuticals, Lupin, Aurobindo Pharma और Dr. Reddy's Laboratories में भी 1% से अधिक की गिरावट दर्ज हुई।
ट्रंप के नए टैरिफ ऐलान का असर
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की है कि 1 अक्टूबर 2025 से अमेरिका में बिकने वाली सभी ब्रांडेड और पेटेंटेड दवाओं पर 100% टैरिफ लगाया जाएगा। हालांकि, जिन कंपनियों ने अमेरिका में अपनी दवा फैक्ट्री शुरू कर दी है या निवेश किया है, उन्हें इस टैक्स से छूट मिलेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय दवा कंपनियों पर इसका बड़ा असर नहीं होगा क्योंकि भारत से अमेरिका में ज्यादातर जेनेरिक दवाएं जाती हैं। जेनेरिक वे दवाएं होती हैं जिनका पेटेंट खत्म हो चुका होता है और जो कम दाम में उपलब्ध होती हैं। इसके बावजूद Sun Pharma जैसी कंपनियों को नुकसान हो सकता है, क्योंकि उनकी आमदनी का बड़ा हिस्सा महंगी स्पेशलिटी मेडिसिन्स से आता है। असली असर भले ही सीमित रहे, लेकिन ऐसे ऐलान से मार्केट सेंटीमेंट पर नकारात्मक दबाव बनता है।
कितना बड़ा है अमेरिका-भारत दवा कारोबार
ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका दुनिया का सबसे बड़ा दवा बाजार है। 2024 में अमेरिका ने करीब 212.67 अरब डॉलर की दवाएं आयात कीं। वहाँ लगभग 90% प्रिस्क्रिप्शन जेनेरिक दवाओं के लिए होते हैं, लेकिन दवाओं पर होने वाला खर्च मुख्य रूप से महंगी ब्रांडेड और पेटेंटेड दवाओं पर जाता है।
भारत अमेरिका के लिए बेहद अहम सप्लायर है। रिपोर्ट बताती है कि अमेरिका में इस्तेमाल होने वाली 47% जेनेरिक दवाएं भारत से आती हैं। उदाहरण के तौर पर, भारत से निर्यात हुई Rosuvastatin (कोलेस्ट्रॉल की दवा) ने अमेरिका में 2016 से 2022 के बीच अपनी खपत लगभग दोगुनी कर दी क्योंकि यह सस्ती थी।
रिपोर्ट चेतावनी देती है कि अगर जेनेरिक दवाओं पर टैरिफ 10–15% से ज्यादा लगाया गया, तो भारतीय कंपनियां अमेरिकी बाजार से पीछे हट सकती हैं। इसका सीधा असर अमेरिका की पब्लिक हेल्थ सिक्योरिटी पर पड़ेगा—दवाओं की कमी होगी और मरीजों को महंगी दवाएं खरीदनी पड़ेंगी।
अभी कितना लगता है टैरिफ?
अभी भारत, अमेरिका से आयात होने वाली दवाओं पर 10% टैक्स लगाता है, लेकिन अमेरिका भारत से निर्यात की जाने वाली दवाओं पर कोई टैक्स नहीं लगाता। ट्रंप का यह नया फैसला इस समीकरण को पूरी तरह बदल सकता है।
(Disclaimer: यह लेख केवल सूचना देने के उद्देश्य से प्रस्तुत किया गया है और इसे किसी प्रकार की निवेश सलाह के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल अपने पाठकों/दर्शकों को सलाह देता है कि किसी भी वित्तीय निर्णय से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श जरूर करें।)
