बैंक कर्मचारी यूनियनों ने PLI पेमेंटे फॉर्मूले पर जताई तीखी आपत्ति, बैंकिंग सेक्टर में अशांति की दी चेतावनी

Bank News: बैंक कर्मचारियों के संयुक्त मंच यूएफबीयू ने वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग (DFS) द्वारा जारी पीएलआई निर्देश पर गंभीर चिंता और आपत्ति जताई। इस निर्देश के तहत सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को स्केल चार और उससे ऊपर के अधिकारियों को प्रदर्शन-आधारित प्रोत्साहन (PLI) देने का आदेश दिया गया है, जिसे यूएफबीयू अनुचित मानता है।

Bank News: बैंक कर्मचारियों के संगठनों के संयुक्त मंच यूएफबीयू ने 18 मार्च, 2026 को वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग (DFS) द्वारा जारी किए गए प्रदर्शन-आधारित प्रोत्साहन (PLI) निर्देश पर गंभीर चिंता और आपत्ति जताई है। यह निर्देश सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को स्केल चार और उससे ऊपर के अधिकारियों को पीएलआई देने का आदेश देता है। UFBU ने इसे अनुचित और एकतरफा बताया है। यूएफबीयू ने कहा कि पीएलआई का मामला वर्तमान में मुख्य श्रम आयुक्त (केंद्रीय) कार्यालय में सुलह कार्यवाही के तहत विचाराधीन है। हाल ही में, 9 मार्च, 2026 को हुई सुलह बैठक में यूनियन और बैंक प्रबंधन ने इस मुद्दे पर चर्चा की थी। उस बैठक के दस्तावेज में साफ लिखा गया था कि वित्त वर्ष 2024-25 के लिए पीएलआई का मामला अभी लंबित है और इसे सुलह और द्विपक्षीय प्रक्रिया के जरिए हल किया जाएगा। यूएफबीयू ने आरोप लगाया कि विभाग द्वारा नौ दिन बाद ही कार्यान्वयन निर्देश जारी करना सुलह प्रक्रिया को निरर्थक बना देता है। इससे पहले हुई कई बैठकों और उनके ब्योरे की भी अनदेखी की गई है, जिनमें डीएफएस, भारतीय बैंक संघ (आईबीए), बैंक प्रबंधन और सभी यूनियनों के प्रतिनिधि शामिल थे।

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यूएफबीयू ने वित्त मंत्रालय के पीएलआई निर्देश पर जताई आपत्ति (तस्वीर-istock)

औद्योगिक शांति को खतरा

न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक संगठन ने चेतावनी दी कि सुलह प्रक्रिया पूरी होने से पहले किसी विवादित योजना को एकतरफा लागू करना औद्योगिक शांति के लिए हानिकारक है। यूएफबीयू ने कहा कि इस तरह का कदम बैंकिंग क्षेत्र में अशांति पैदा कर सकता है और कर्मचारियों को अपने अधिकारों और हितों की रक्षा के लिए लोकतांत्रिक और विधि सम्मत आंदोलन करने के लिए मजबूर कर सकता है। यूएफबीयू ने वित्तीय सेवा विभाग, आईबीए और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के प्रबंधन से अपील की है कि वे 18 मार्च के निर्देश को तुरंत लागू न करें। इसके बजाय, इसे स्थापित परामर्श और सुलह प्रक्रिया के माध्यम से हल किया जाना चाहिए, ताकि मौजूदा समझौतों की गरिमा बनी रहे।

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