Minimum Balance Penalty : ग्राहकों की गरीबी से अमीर हो रहे बैंक, 4 साल में कमाए ₹26,170 करोड़, सरकार ने संसद में खोला राज

बैंकों के लिए ग्राहकों की गरीबी भी कमाई का जरियो हो सकती है। यह हम नहीं, आंकड़े बता रहे हैं। क्योंकि, पिछले 4 साल में बैंकों ने मिनिमम बैलेंस नहीं रखने पर पेनाल्टी लगाकर ₹26,170 करोड़ कमाए हैं।

Minimum Balance Penalty : बैंक खाते में मिनिमम बैलेंस नहीं होने पर लगने वाला छोटा-सा जुर्माना बैंकों के लिए अरबों रुपये का खजाना साबित हो रहा है। यह जानकारी खुद केंद्र सरकार ने संसद में दी है। राज्यसभा में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने एक सवाल के लिखित जवाब में यह बताया कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) से जुटाए गए आंकड़ों के मुताबिक, सिर्फ वित्त वर्ष 2026 में ही बैंकों ने मिनिमम बैलेंस पेनाल्टी के तौर पर ₹7,086.63 करोड़ वसूले हैं। इसमें निजी बैंकों का हिस्सा ₹4,948.71 करोड़ रहा, जबकि सरकारी बैंकों ने ₹2,137.92 करोड़ जुटाए। यानी कुल वसूली का करीब 70 फीसदी हिस्सा निजी बैंकों के खाते में गया। इसके साथ ही चौधरी ने बताया कि वित्त वर्ष 2023 से वित्त वर्ष 2026 के बीच बैंकों ने ग्राहकों से Minimum Average Balance (MAB) नहीं रखने पर ₹26,170 करोड़ से ज्यादा की पेनाल्टी वसूल की गई है।

Minimum Balance Penalty

ग्राहकों के मिनिमम बैलेंस नहीं रखने से हो रही कमाई

HDFC Bank ने सबसे ज्यादा कमाए

निजी बैंकों में MBP से सबसे ज्यादा कमाई HDFC Bank ने की। बैंक ने वित्त वर्ष 2026 में अकेले ₹1,798.14 करोड़ वसूले। इसके बाद Axis Bank ने ₹1,081.33 करोड़, ICICI Bank ने ₹353.50 करोड़, Kotak Mahindra Bank ने ₹290.65 करोड़, Yes Bank ने ₹195.05 करोड़ और IDBI Bank ने ₹175.15 करोड़ की वसूली की। दिलचस्प बात यह है कि सिर्फ HDFC Bank और Axis Bank ने मिलकर निजी बैंकों की कुल Penalty Collection का लगभग 58 फीसदी हिस्सा जुटाया।

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