ईरान संकट के बीच क्या खरीफ सीजन के लिए देश में पर्याप्त यूरिया है? स्टॉक पर आया बड़ा अपडेट

अधिकारी ने कहा कि बशर्ते आपूर्ति श्रृंखला में कोई और व्यवधान न हो, एफएसीटी खरीफ सीजन 2026-27 की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए अप्रैल 2026 के बाद भी निरंतर उर्वरक आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि एफएसीटी ने खरीफ सीजन के लिए सितंबर 2026 तक लगभग 5.5 लाख मीट्रिक टन उर्वरक और आयात के रूप में एक लाख मीट्रिक टन उर्वरक के उत्पादन का लक्ष्य रखा है।

दक्षिण भारतीय राज्यों में उर्वरकों की सबसे बड़ी आपूर्तिकर्ता सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी उर्वरक और रसायन त्रावणकोर (एफएसीटी) के एक शीर्ष अधिकारी ने ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद पैदा हुई वैश्विक परिस्थितियों के बीच कहा है कि देश में खरीफ के मौसम के लिए पर्याप्त मात्रा में यूरिया उपलब्ध है और फिलहाल इसकी कोई कमी नहीं है। बंदरगाह नगरी कोच्चि स्थित इस कंपनी के प्रबंध निदेशक एस शक्तिमणि ने यह भी कहा कि यदि परिस्थितियों में अगले छह महीने तक सुधार नहीं होता है तो दिक्कतें आ सकती हैं और इससे निपटने के लिए उपयुक्त कदम उठाए जा रहे हैं। मध्यप्रदेश से केरल के दौरे पर आए पत्रकारों के एक समूह से बातचीत के दौरान शक्तिमणि ने यह बात कही। खामेनेई की मौत के बाद आक्रामक रुख अपनाते हुए ईरान, इजराइल के साथ ही पश्चिम एशिया में अमेरिका के विभिन्न ठिकानों पर भी ड्रोन और मिसाइल दाग रहा है जबकि इजराइल और अमेरिका की ओर से भी ईरान पर बम और मिसाइलों की बरसात की जा रहा है।

Urea Stock

यूरिया भंडार

वैश्विक अर्थव्यवस्था को पहुंचेगा भारी नुकसान

ईरान द्वारा लगातार ड्रोन और मिसाइल हमले किए जाने से अमेरिका और उसके सहयोगियों-खासकर इजराइल और खाड़ी देशों-के सामने गंभीर चुनौती खड़ी हो गई है। विश्लेषकों का कहना है कि यदि हमले लंबे समय तक जारी रहे तो इससे वैश्विक अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान पहुंच सकता है। शक्तिमणि ने इन वैश्विक परिस्थितियों के भारत में उर्वरक उत्पादन पर पड़ने वाले संभावित असर के बारे में ’पीटीआई-भाषा’ की ओर से पूछे गए सवाल के जवाब में कहा, ’’अभी जो लड़ाई हो रही है, इस दौरान अपने यहां फसल का कोई सीजन (मौसम) नहीं है। सीजन जुलाई बाद से शुरू होगा। हमारा खरीफ का जो सीजन होता है, उसके लिए अपने पास पर्याप्त यूरिया उपलब्ध है।" उन्होंने कहा कि एफएसीटी जैसी कंपनियां पश्चिम एशिया से ही गैस नहीं लेती हैं, आस्ट्रेलिया से भी लेती हैं।

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