ईरान ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य बंद करने के बाद अब 'बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य' बंद करने की धमकी दी है। तेहरान ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका उसपर जमीनी हमले करता है तो वह 'बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य' को बंद कर देगा। ईरान की ओर से जारी बयान के अनुसार, यमन का एक सशस्त्र समूह, बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य पर कब्जा करने के लिए तैयार है। आपको बता दें कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य की तरह ही यह महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है, जिससे कच्चे तेल से लेकर गैस का आयात बड़े पैमाने पर किया जाता है।
बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य
बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य एक संकरा जलमार्ग है जो स्वेज नहर की ओर जाने वाले समुद्री यातायात को नियंत्रित करता है। तेहरान ने पहले से ही होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर रखा है कि जिससे आम तौर पर दुनिया का पांचवां हिस्सा तेल जहाजों से भेजा जाता है। बाब अल-मंडेब में किसी भी तरह की रुकावट मध्य पूर्व में चल रहे संघर्ष के आर्थिक असर को और बढ़ा सकती है।
व्हाइट हाउस की धमकी के बाद आई चेतावनी
ईरान की यह चेतावनी व्हाइट हाउस की उस धमकी के बाद आई है, जिसमें कहा गया था कि अगर तेहरान संघर्ष-विराम की शर्तों को मानने से इनकार करता है, तो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई तेज करने के लिए तैयार हैं। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशन गार्ड्स कॉर्प्स (IRGC) ने अमेरिकी-इजरायली सेनाओं को ईरानी क्षेत्र के भीतर किसी भी संभावित जमीनी कार्रवाई के खिलाफ चेतावनी दी है।
बाब अल-मंडेब क्यों इतना महत्वपूर्ण?
'बाब अल-मंडेब' (Bab al-Mandab) दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण और रणनीतिक समुद्री रास्तों में से एक है। इसे "आंसुओं का द्वार" भी कहा जाता है क्योंकि इसका रास्ता बहुत संकरा और खतरनाक माना जाता है। यह जलडमरूमध्य लाल सागर (Red Sea) को अदन की खाड़ी (Gulf of Aden) और हिंद महासागर (Indian Ocean) से जोड़ता है। इसके एक तरफ अफ्रीका (जिबूती और इरिट्रिया) है। वहीं, दूसरी तरफ एशिया (यमन) है। यह स्वेज नहर के दक्षिणी छोर पर स्थित है। यूरोप और एशिया के बीच होने वाला लगभग 90% समुद्री व्यापार इसी रास्ते से गुजरता है।खाड़ी देशों (सऊदी अरब, इराक, कुवैत) से यूरोप और अमेरिका जाने वाला कच्चा तेल इसी रास्ते से होकर निकलता है। रोजाना यहां से लगभग 40 से 50 लाख बैरल तेल गुजरता है। अगर यह रास्ता बंद होता है, तो जहाजों को पूरा अफ्रीका महाद्वीप घूमकर (Cape of Good Hope) जाना होगा। इससे यात्रा में 15-20 दिन ज्यादा लगेंगे और माल ढुलाई की लागत 30-40% तक बढ़ जाएगी।
भारत के लिए इसका महत्व
भारत का यूरोप, अफ्रीका और अमेरिका के साथ होने वाला व्यापार इसी रास्ते पर निर्भर है। इसके साथ भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए इस समुद्री मार्ग से भी कच्चे तेल का आयात करता है। अगर यह जलडमरूमध्य बंद होात है तो भारत समेत पूरी दुनिया में कच्चे तेल (Crude Oil) की भारी किल्लत हो जाएगी और वैश्विक महंगाई रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच सकती है।
