हर नौकरीपेशा व्यक्ति को हर महीने की पहली तारीख को सैलरी (Salary) आने का बेसब्री से इंतजार रहता है। महीने की आखिरी तारीख या नए महीने की पहली तारीख को सैलरी क्रेडिट होते ही कई लोग शॉपिंग, बाहर खाने या दूसरे खर्चों की प्लानिंग शुरू कर देते हैं। लेकिन अगर सैलरी आते ही पैसों को सही जगह बांट दिया जाए, तो पूरे महीने बजट संभालना आसान हो सकता है और आखिरी दिनों में पैसों की कमी से बचा जा सकता है। महीने के आखिर में पैसों की तंगी न हो, इसके लिए सैलरी क्रेडिट होते ही फटाफट पांच काम कर लें-
Salary क्रेडिट होते ही फटाफट कर लें 5 जरूरी काम (Photo: iStock)
जरूरी बिल और EMI के पैसे अलग करें
सैलरी आते ही सबसे पहले उन खर्चों की रकम अलग कर दें, जो हर महीने तय होते हैं। इसमें होम लोन (Home Loan) या पर्सनल लोन (Personal Loan) की EMI, किराया, बिजली-पानी का बिल, मोबाइल रिचार्ज, इंटरनेट और बीमा प्रीमियम जैसे खर्च शामिल हो सकते हैं। इन पैसों को अलग खाते में रखने या शुरुआती दिनों में भुगतान करने से बाद में इन पैसों के खर्च हो जाने का जोखिम कम होता है।
सेविंग और निवेश पहले करें
बचत के लिए महीने के अंत का इंतजार करने के बजाय सैलरी आते ही एक तय रकम अलग कर दें। अगर आप SIP, PPF या किसी अन्य निवेश में पैसा लगाते हैं तो उसे सैलरी क्रेडिट होने के तुरंत बाद अलग करना बेहतर बजट आदत हो सकती है। इसी तरह इमरजेंसी फंड (Emergency Fund) के लिए भी हर महीने कुछ रकम बचाई जा सकती है। इससे बचत आपकी प्राथमिकता बनी रहती है।
महीने के जरूरी खर्च की रकम तय करें
अब बची हुई रकम में से महीने भर के जरूरी खर्चों का बजट बनाएं। ग्रॉसरी, ट्रैवल, ऑफिस आने-जाने, दवाइयों और घर से जुड़े दूसरे खर्चों के लिए अलग-अलग अनुमान तय करें। अगर संभव हो तो हफ्ते भर की एक लिमिट भी तय करें। इससे महीने के शुरुआती दिनों में जरूरत से ज्यादा खर्च करने से बचने में मदद मिल सकती है।
शॉपिंग और मनोरंजन का बजट तय करें
सैलरी आने के बाद गैर-जरूरी खर्चों के लिए भी एक निश्चित सीमा रखना जरूरी है। ऑनलाइन शॉपिंग, बाहर खाना, मूवी, घूमना या दूसरे मनोरंजन के खर्चों के लिए पहले से रकम तय कर लें। बजट खत्म होने के बाद ऐसे खर्चों को रोकने की कोशिश करें।
थोड़ी रकम बफर के तौर पर रखें
हर महीने कुछ ऐसे खर्च सामने आ सकते हैं, जिनकी पहले से कोई तैयारी या प्लानिंग नहीं होती। इसलिए सैलरी का एक हिस्सा बफर के तौर पर अलग रख सकते हैं। अचानक ट्रैवल, घर की मरम्मत या किसी जरूरी सामान पर खर्च होने की स्थिति में यह रकम काम आ सकती है। इससे महीने के अंत में क्रेडिट कार्ड (Credit Card) या उधार पर निर्भर रहने की जरूरत कम हो सकती है।
