ITR फॉर्म-1 में हुए ये 3 बड़े बदलाव, एक छोटी सी गलती और सीधे आ जाएगा इनकम टैक्स का नोटिस

टैक्सपेयर्स के लिए ये खबर काम की साबित हो सकती है। सेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए आईटीआर फाइलिंग की डेडलाइन 31 जुलाई 2026 है। इसलिए जरूरी है कि आप अपने दस्तावेज़ों को अभी से व्यवस्थित करना शुरू कर दें।

अगर आप एक वेतनभोगी (Salaried) टैक्सपेयर हैं, तो यह खबर आपके लिए बहुत महत्वपूर्ण है। आयकर विभाग ने असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए नए इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फॉर्म्स अधिसूचित कर दिए हैं। भारत में ज्यादातर मध्यम वर्ग के करदाता अपनी रिटर्न दाखिल करने के लिए ITR-1 (सहज) फॉर्म का ही चुनाव करते हैं। लेकिन इस बार सरकार ने इस फॉर्म के नियमों में कुछ क्रांतिकारी बदलाव किए हैं। अगर आपने पुराने ढर्रे पर या बिना जानकारी के रिटर्न फाइल की, तो आपका फॉर्म 'डिफेक्टिव' (अमान्य) घोषित हो सकता है और आपको विभाग से सीधा नोटिस मिल सकता है। आइए जानते हैं वे तीन बड़े बदलाव क्या हैं।

ITR 1

म्यूचुअल फंड और शेयर बाजार के मुनाफे की एंट्री

अब तक का नियम यह था कि अगर आपकी कमाई सैलरी के अलावा शेयर बाजार या म्यूचुअल फंड के मुनाफे (Capital Gain) से होती थी, तो आपको अनिवार्य रूप से भारी-भरकम ITR-2 फॉर्म भरना पड़ता था। लेकिन इस साल से मध्यम वर्ग को बड़ी राहत दी गई है। अब आप लिस्टेड इक्विटी और म्यूचुअल फंड से होने वाले लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन (LTCG) को भी ITR-1 में दिखा सकते हैं। हालांकि, इसमें एक बड़ी शर्त है यह मुनाफा ₹1.25 लाख तक ही होना चाहिए। यदि आपका मुनाफा इस सीमा से एक रुपया भी ज्यादा हुआ और आपने ITR-1 भर दिया, तो आपकी रिटर्न अमान्य हो जाएगी। ऐसे में करदाताओं को अपने पोर्टफोलियो का सटीक हिसाब रखना होगा।

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