MSME Jobs : देश के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम सेक्टर (MSME Sector) को लेकर सरकार ने संसद में कई अहम जानकारियां दी हैं। केंद्रीय मंत्री ने बताया कि जून 2026 तक देश में कुल 18,154 MSME इकाइयां बंद हो चुकी हैं, जिससे करीब 1.25 लाख लोगों के रोजगार पर असर पड़ा है। हालांकि, दूसरी ओर MSME सेक्टर में रोजगार के अवसर भी तेजी से बढ़े हैं और वित्त वर्ष 2025-26 में इस क्षेत्र में रोजगार में 16.5 प्रतिशत की सालाना वृद्धि दर्ज की गई है।
सरकार ने संसद में MSME सेक्टर के बारे में कही बड़ी बातें (तस्वीर-PTI)
FY26 में MSME बंद होने की संख्या बढ़ी
लोकसभा में जानकारी देते हुए केंद्रीय सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे ने बताया कि MSME इकाइयों के बंद होने की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। वित्त वर्ष 2025-26 में 62,747 MSME बंद हुए, जबकि वित्त वर्ष 2024-25 में यह संख्या 39,446 थी। इसी अवधि में बंद होने वाली इकाइयों के कारण प्रभावित रोजगार की संख्या भी बढ़ी है। FY26 में करीब 3.70 लाख नौकरियों पर असर पड़ा, जबकि FY25 में यह आंकड़ा 2.60 लाख था। सरकार के अनुसार, MSME सेक्टर में कई छोटी और मध्यम कंपनियां बाजार की चुनौतियों, लागत बढ़ने और कारोबार से जुड़ी परेशानियों के कारण बंद हुई हैं।
MSME सेक्टर में रोजगार बढ़कर 8 करोड़ के पार
हालांकि, MSME क्षेत्र में बंद होने वाली इकाइयों के बीच रोजगार के आंकड़े सकारात्मक संकेत भी दे रहे हैं। सरकार के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में MSME सेक्टर में कुल रोजगार 8.05 करोड़ तक पहुंच गया, जो वित्त वर्ष 2024-25 के 6.91 करोड़ रोजगार से 16.5 प्रतिशत ज्यादा है। इससे पता चलता है कि MSME सेक्टर अभी भी देश में रोजगार देने वाले सबसे बड़े क्षेत्रों में शामिल है। छोटे और मध्यम उद्योगों की भूमिका आर्थिक विकास और रोजगार सृजन में लगातार बनी हुई है।
ट्रेडिंग सेक्टर ने दिए सबसे ज्यादा रोजगार
सरकार के आंकड़ों के अनुसार, MSME क्षेत्र में सबसे ज्यादा रोजगार ट्रेडिंग सेक्टर ने दिया है। इस क्षेत्र में करीब 2.98 करोड़ लोगों को रोजगार मिला। इसके बाद सर्विस सेक्टर में करीब 2.57 करोड़ लोग और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में करीब 2.50 करोड़ लोग काम कर रहे हैं। राज्यों की बात करें तो उत्तर प्रदेश MSME रोजगार देने में सबसे आगे रहा, जहां करीब 1.19 करोड़ लोगों को रोजगार मिला है।
ई-श्रम पोर्टल पर 10.83 लाख प्लेटफॉर्म वर्कर्स का पंजीकरण
उधर राज्यसभा में श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने बताया कि ई-श्रम पोर्टल पर अब तक 10.83 लाख प्लेटफॉर्म वर्कर्स का पंजीकरण हो चुका है। आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2023 में 23,746 श्रमिक, वर्ष 2024 में 25,255 श्रमिक और वर्ष 2025 में 4.58 लाख से ज्यादा श्रमिकों ने पंजीकरण कराया। सरकार का उद्देश्य असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जोड़ना और उन्हें बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना है।
MSME और डिजिटल सुरक्षा पर सरकार की नजर
सरकार के ताजा आंकड़े बताते हैं कि MSME सेक्टर में जहां कुछ चुनौतियां बनी हुई हैं, वहीं रोजगार और नए कारोबार के अवसर भी बढ़ रहे हैं। सरकार छोटे उद्योगों को मजबूत बनाने, रोजगार बढ़ाने और डिजिटल सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कई कदम उठा रही है। आने वाले समय में MSME क्षेत्र को अर्थव्यवस्था की रीढ़ के रूप में और मजबूत करने पर जोर दिया जाएगा।
हाईवे प्रोजेक्ट में देरी पर 2,732 करोड़ रुपये का जुर्माना
सड़क और परिवहन क्षेत्र से जुड़ी जानकारी देते हुए केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने बताया कि पिछले तीन वित्तीय वर्षों में हाईवे परियोजनाओं में देरी करने वाले ठेकेदारों और कंपनियों पर करीब 2,732 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया है। इनमें से सरकार अब तक करीब 780 करोड़ रुपये की वसूली कर चुकी है। मंत्री ने कहा कि परियोजनाओं को समय पर पूरा करने के लिए सरकार लगातार निगरानी कर रही है और देरी करने वालों पर कार्रवाई की जा रही है।
सुरक्षा खतरे वाले ई-रिक्शा ऐप पर कार्रवाई
सरकार ने ई-रिक्शा सुरक्षा को लेकर भी जानकारी दी। नितिन गडकरी ने लोकसभा में बताया कि भारतीय कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पांस टीम (CERT-In) को इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर यानी ई-रिक्शा से जुड़ी सुरक्षा चिंताओं की जानकारी मिली है। जांच में कुछ ऐसे मोबाइल ऐप की पहचान की गई है, जिनकी मदद से ई-रिक्शा की बैटरी को अचानक बंद किया जा सकता है। इन ऐप की जानकारी इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) को दी गई है ताकि इन्हें ऐप स्टोर से हटाने की प्रक्रिया शुरू की जा सके।
