Snapdragon Auto Day Event: केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने बुधवार को नई दिल्ली में टाइम्स नेटवर्क द्वारा आयोजित स्नैपड्रैगन ऑटो डे कार्यक्रम को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि भारत अपनी सड़कों को सुरक्षित बनाने के लिए जरूरी कदम उठा रहा है। सरकार ने देशभर में एक्सीडेंट प्रोन एरिया की पहचान कर ली है जिसे ब्लैक स्पॉट्स भी कहा जाता है और उनके समाधान के लिए 40,000 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी
मंत्री ने कहा कि आईआईटी (IIT) के छात्रों को भी हाईवे का ऑडिट करने के लिए शामिल किया जा रहा है, जबकि 15 राज्यों के 77 घातक हिस्सों को जीरो फेटैलिटी कॉरिडोर योजना (Zero Fatality Corridor Scheme) के तहत चिह्नित किया गया है और इन क्षेत्रों में जानलेवा दुर्घटनाओं को कम करने के लिए काम शुरू हो चुका है। उन्होंने कहा कि तकनीक, इंजीनियरिंग और जागरूकता मिलकर सड़क सुरक्षा मिशन के तीन आधारभूत स्तंभ होंगे। उन्होंने कहा कि अब हमारे पास डेटा, जवाबदेही और एक ठोस योजना है।
बकौल नितिन गडकरी, सरकार ने देश में 100 से ज्यादा ऐसे जिलों की पहचान की है, जहां पर रोड एक्सीडेंट सबसे ज्यादा होते हैं। इनमें से ज़्यादातर घातक क्षेत्र राष्ट्रीय राजमार्गों, राज्य राजमार्गों और नगरपालिका सड़कों पर स्थित हैं, जिनमें से कई मूल डिजाइन के हिसाब से मौजूदा ट्रैफिक लोड के लिए नहीं बने थे।
ब्लैक स्पॉट्स से मिलेगा छुटकारा
नितिन गडकरी ने कहा, ''हम अनुमान नहीं लगा रहे हैं। अब हमारे पास प्रामाणिक रिकॉर्ड और डेटा हैं, जिससे यह पता चलता है कि दुर्घटनाएं कहां हुईं, कौन जिम्मेदार है और क्या किया जाना चाहिए? और अब हम कार्रवाई कर रहे हैं। ऐसे में सरकार ने बेहतरीन इंजीनियरिंग के जरिए ब्लैक स्पॉट्स से निजात पाने के लिए 40,000 करोड़ रुपये स्वीकृत किए हैं।
उन्होंने कहा कि मंत्रालय अब महज अनुमान या नौकरशाही रिपोर्ट्स पर निर्भर नहीं है। अब हमें पता है कि समस्याएं कहां हैं? हम निगरानी, सुधार और दुर्घटनाओं को रोकने के लिए सिस्टम स्थापित कर रहे हैं। इस दौरान उन्होंने केंद्र, राज्यों और स्थानीय निकायों के बीच बेहतर तालमेल की जरूरत पर ध्यान केंद्रित किया। उन्होंने कहा, ''हम अलग-अलग प्रयासों से इसका समाधान नहीं कर सकते। इसके लिए विभागों और हितधारकों के बीच पूर्ण समन्वय की जरूरत है।
नितिन गडकरी ने माना कि दुर्घटनाओं को पूरी तरह से समाप्त नहीं किया जा सकता है, लेकिन उन्हें कम किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि बचाई गई हर एक जिंदगी जीत है। सड़क हादसे नियति नहीं हैं। वह अक्सर डिजाइन या नीति में खामियों की वजह से होते हैं। हमारा लक्ष्य महज दुर्घटनाओं को कम करना नहीं है, बल्कि देश को सड़क सुरक्षा और ऑटो इनोवेशन में वैश्विक मानक बनाना है।
