कार बनाने वाली देश की सबसे बड़ी कंपनी मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड (एमएसआई) वित्त वर्ष 2030-31 तक हरित ऊर्जा से जुड़ी पहल में 925 करोड़ रुपये का निवेश करने की योजना बना रही है, जिसमें दो बायोगैस परियोजनाएं भी शामिल हैं। कंपनी ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।
Maruti Suzuki (Photo: iStock)
खरखौदा यूनिट में लगेगा 10 टीपीडी क्षमता वाला बायोगैस प्लांट
न्यूज एजेंसी भाषा (पीटीआई) की एक लेटेस्ट रिपोर्ट के अनुसार, मारुति सुज़ुकी इंडिया ने बयान में कहा कि कंपनी अपनी खरखौदा यूनिट में 10 टन प्रति दिन (टीपीडी) क्षमता वाला बायोगैस प्लांट लगाएगी, जिसे वित्त वर्ष 2026-27 में चालू किया जाएगा। बयान के अनुसार, दूसरी पहल के तौर पर कंपनी ने मानेसर स्थित अपनी यूनिट में बायोगैस प्लांट की क्षमता को 0.2 टीपीडी से बढ़ाकर 0.7 टीपीडी कर दिया है।
दो परियोजनाओं के लिए 150 करोड़ रुपये का निवेश होगा
बयान में कहा गया, "मारुति सुजुकी इन दोनों परियोजनाओं के लिए 150 करोड़ रुपये का निवेश करेगी, जो अपने परिचालन में नवीकरणीय ऊर्जा समाधानों को शामिल करने के उसके लंबे समय की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।’’ बयान में कहा गया कि कंपनी की बायोगैस पहल सरकार के ’वेस्ट-टू-वेल्थ’ मिशन के अनुरूप हैं। मारुति सुज़ुकी के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) हिसाशी ताकेउची ने कहा कि कंपनी लगातार ऐसे प्रयासों पर काम कर रही है, जिनका मकसद ईंधन की खपत और तेल आयात पर निर्भरता को कम करना है।
भारत की पहली फ्लेक्स फ्यूल कार हुई लॉन्च
इससे पहले कंपनी ने विश्व पर्यावरण दिवस से एक दिन पहले भारत की पहली फ्लेक्स-फ्यूल कार लॉन्च की । इस मौके पर केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी और पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी भी मौजूद रहे। कंपनी ने अपनी पॉपुलर WagonR में फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक पेश की है। यह कार E20 से लेकर E100 तक किसी भी इथेनॉल-पेट्रोल मिश्रण पर चल सकती है, जिससे ग्राहकों को ईंधन के मामले में अधिक फ्लेक्सिबिलटी मिलेगाी।
भारत की कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता होगी कम
मारुति सुजुकी का कहना है कि फ्लेक्स-फ्यूल वाहन देश की ऊर्जा सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण के लक्ष्यों को हासिल करने में मदद कर सकते हैं। कंपनी के अनुसार, इस तकनीक से कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम होगी और किसानों की आय बढ़ाने में भी सहायता मिलेगी। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि भारत हर साल बड़ी मात्रा में कच्चे तेल का आयात करता है और इथेनॉल जैसे जैव ईंधन इस निर्भरता को कम करने का महत्वपूर्ण माध्यम बन सकते हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि अन्य वाहन निर्माता भी भविष्य में फ्लेक्स-फ्यूल मॉडल लॉन्च करेंगे।
वहीं, पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि फ्लेक्स-फ्यूल वाहन देश के लिए फायदेमंद साबित हो सकते हैं, क्योंकि इससे तेल आयात कम होगा, विदेशी मुद्रा की बचत होगी और प्रदूषण में कमी आएगी।
