CAFE-III Draft Rules Fuel Efficiency Standards : केंद्रीय विद्युत मंत्रालय के ऊर्जा दक्षता ब्यूरो (BEE) ने पैसेंजर व्हीकल के लिए कॉरपोरेट एवरेज फ्यूल एफिशिएंसी (CAFE)-III नियमों का नया ड्राफ्ट जारी किया है। ड्राफ्ट में पहली बार सरकार ने इथेनॉल, कंप्रेस्ड बायोगैस और दूसरे बायोफ्यूल से चलने वाली कारों को विशेष मान्यता देने का प्रस्ताव रखा है। सरकार ने इस ड्राफ्ट पर ऑटो उद्योग और अन्य संबंधित पक्षों से 6 अगस्त तक सुझाव मांगे हैं।
नए नियमों के तहत कारों की माइलेज को सुधारना होगा
क्या है CAFE-III?
CAFE III यानी कॉरपोरेट एवरेज फ्यूल एफिशिएंसी ऐसे नियम हैं, जिनके तहत हर वाहन निर्माता को अपने पूरे वाहन बेड़े की औसत ईंधन खपत और कार्बन उत्सर्जन तय सीमा के भीतर रखना होता है। अगर किसी कंपनी की गाड़ियों की औसत ईंधन दक्षता बेहतर होती है, तो उसे नियमों का पालन करने वाला माना जाता है। सरकार का मकसद पेट्रोल और डीजल की खपत कम करना, कार्बन उत्सर्जन घटाना और साफ ईंधन को बढ़ावा देना है।
2027 से और सख्त होंगे मानक
ड्राफ्ट के मुताबिक कंपनियों को हर साल अपनी गाड़ियों की ईंधन दक्षता बेहतर करनी होगी। प्रस्ताव के हिसाब से 2027-28 तक कंपनियों को ऊर्जा दक्षता 3.996 लीटर प्रति 100 किमी तक बढ़ानी होगी और कार्बन उत्सर्जन 94.76 ग्राम तक घटाना होगा। वहीं, 2031-32 तक इसे बढ़ाकर 3.327 लीटर प्रति 100 किमी और 78.90 ग्राम प्रति किमी तक करना होगा। यानी यानी अगले पांच वर्षों में ईंधन खपत और कार्बन उत्सर्जन दोनों में बड़ी कमी लाने का लक्ष्य रखा गया है।
| पैरामीटर | 2027-28 | 2031-32 | बदलाव | सुधार (%) |
|---|---|---|---|---|
| ईंधन खपत | 3.996 लीटर/100 किमी | 3.327 लीटर/100 किमी | 0.669 लीटर कम | 16.74% |
| कार्बन उत्सर्जन | 94.76 ग्राम CO₂/किमी | 78.90 ग्राम CO₂/किमी | 15.86 ग्राम कम | 16.74% |
इथेनॉल को कैसे मिलेगा फायदा?
इस ड्राफ्ट की सबसे बड़ी खासियत कार्बन न्यूट्रैलिटी फैक्टर है। अब तक किसी वाहन के एग्जॉस्ट से निकलने वाले कार्बन उत्सर्जन के आधार पर ही उसका मूल्यांकन होता था। लेकिन नए प्रस्ताव के तहत अगर कोई वाहन इथेनॉल, कंप्रेस्ड बायोगैस या दूसरे बायोफ्यूल का इस्तेमाल करता है, तो उसके वास्तविक उत्सर्जन से कम उत्सर्जन माना जाएगा। मौजूदा इथेनॉल मिश्रण स्तर को देखते हुए सरकार ने 8 प्रतिशत तक कार्बन उत्सर्जन की छूट देने का प्रस्ताव रखा है। वहीं, कंप्रेस्ड बायोगैस और दूसरे बायोफ्यूल के लिए यह लाभ उस समय लागू मिश्रण स्तर के आधार पर तय होगा।
नई तकनीक अपनाने पर भी मिलेगा फायदा
सरकार ने ईंधन बचाने वाली तकनीक अपनाने वाली कंपनियों के लिए भी अतिरिक्त प्रोत्साहन का प्रस्ताव रखा है। यदि कोई कंपनी ऐसी तकनीक का इस्तेमाल करती है जिससे ईंधन की बचत होती है, तो उसे नियमों के पालन में अतिरिक्त लाभ मिलेगा। कुल मिलाकर 9 ग्राम कार्बन डाइऑक्साइड प्रति किमी तक का लाभ मिल सकता है, हालांकि किसी एक तकनीक के लिए अधिकतम 1 ग्राम प्रति किमी की छूट ही मिलेगी।
इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड गाड़ियों को भी बढ़ावा
ड्राफ्ट में साफ ईंधन वाली गाड़ियों को बढ़ावा देने के लिए सुपर क्रेडिट देने का भी प्रस्ताव है। इसका लाभ बैटरी इलेक्ट्रिक वाहन, रेंज एक्सटेंडेड इलेक्ट्रिक वाहन, प्लग-इन हाइब्रिड वाहन, स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड वाहन और फ्लेक्स फ्यूल वाहन को मिलेगा। इन वाहनों को विशेष वेटेज मिलने से कंपनियों के लिए पूरे वाहन बेड़े की औसत ईंधन दक्षता बेहतर दिखाना आसान होगा।
नियमों में एक और बड़ा बदलाव
अब तक कंपनियों का मूल्यांकन हर साल होता था। नए ड्राफ्ट में इसे बदलकर दो चरणों में करने का प्रस्ताव है। पहला अनुपालन चरण 3 साल का रखा गया है और
दूसरा अनुपालन चरण 2 साल का तय किया गया है। यदि कोई कंपनी तय लक्ष्य से बेहतर प्रदर्शन करती है, तो उसे कंप्लायंस क्रेडिट मिलेगा। इन क्रेडिट का इस्तेमाल वह उसी अनुपालन अवधि के भीतर आगे भी कर सकेगी।
क्यों अहम है यह ड्राफ्ट?
भारत ने तेल आयात पर निर्भरता कम करने और 2070 तक नेट-जीरो लक्ष्य हासिल करने का संकल्प लिया है। ऐसे में CAFE-III नियम सिर्फ वाहन कंपनियों के लिए नया उत्सर्जन मानक नहीं हैं, बल्कि इथेनॉल, बायोगैस, इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड तकनीक को बढ़ावा देने की सरकार की व्यापक रणनीति का भी हिस्सा हैं। हालांकि अंतिम नियम उद्योग से मिलने वाले सुझावों के बाद ही तय होंगे।
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