त्योहारों पर खरीद रहे हैं नई कार? जानिए इंश्योरेंस कोटेशन में क्या-क्या चेक करना जरूरी

Car Insurance: नई कार खरीदते समय कम प्रीमियम के चक्कर में पड़े बिना IDV, जरूरी ऐड-ऑन्स और पॉलिसी की शर्तें जांचें, ताकि हादसे या चोरी के समय पूरा वित्तीय सुरक्षा कवर मिल सके।

Car Insurance : त्योहारों के इस सीजन में अगर आप भी अपनी मनपसंद कार घर लाने की तैयारी कर रहे हैं, तो सिर्फ फाइनेंस और डिस्काउंट देखना ही काफी नहीं है। गाड़ी की डिलीवरी लेने और फाइनल पेपर साइन करने से पहले उसके इंश्योरेंस से जुड़े खर्चों को समझना बेहद जरूरी है। भारत में नई कार का इंश्योरेंस केवल एक कानूनी औपचारिकता नहीं है, बल्कि यह किसी भी हादसे या नुकसान के समय आपको बड़े वित्तीय झटके से बचाता है। कार का इंश्योरेंस प्रीमियम गाड़ी के मॉडल, उसके ईंधन (पेट्रोल/डीजल) और वेरिएंट पर निर्भर करता है। मिसाल के तौर पर, अगर आप कोई डीजल एसयूवी (SUV) खरीद रहे हैं, तो एक साल के ओन-डैमेज (स्वयं के नुकसान), तीन साल के थर्ड-पार्टी कवर और जरूरी ऐड-ऑन्स के साथ इसका प्रीमियम आसानी से 40,000 रुपये के पार जा सकता है। ऐसे में यह जानना बहुत जरूरी है कि आपके इंश्योरेंस कोटेशन में क्या-क्या शामिल है।

car insurance, new car buyers, insurance cost, Insured Declared Value, IDV, add on cover

नई गाड़ी लेने से पहले इंश्योरेंस में जरूर देखें ये चीजें

नई कार के इंश्योरेंस पर असल में कितना खर्च आता है?

कार खरीदते समय केवल उसकी शोरूम कीमत ही नहीं, बल्कि उसे चलाने और बनाए रखने में होने वाले बाकी खर्चों का हिसाब लगाना भी जरूरी है। इंश्योरेंस भी इन्हीं जरूरी खर्चों में से एक है। एक्सपर्ट्स की सलाह है कि इंश्योरेंस कोटेशन लेते समय ओन-डैमेज कवर, थर्ड-पार्टी कवर और ऐड-ऑन्स की लागत को अलग-अलग देखें। एक सामान्य नई कार के इंश्योरेंस इनवॉइस का उदाहरण लें, तो जीएसटी मिलाकर कुल प्रीमियम करीब 44,261 रुपये तक बैठ सकता है। इसमें कार की 'इन्श्योर्ड डिक्लेयर्ड वैल्यू' (IDV) तय की जाती है, जो गाड़ी की एक्स-शोरूम कीमत का 95 प्रतिशत तक होती है। कार चोरी होने या पूरी तरह से नष्ट होने पर इंश्योरेंस कंपनी इसी IDV के आधार पर अधिकतम क्लेम का भुगतान करती है।

End of Feed