Ganesh Chaturthi 2022 Puja Vidhi, Muhurat: गणेश चतुर्थी शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, आरती, कथा व उपाय
Ganesh Chaturthi 2022 Puja Vidhi, Shubh Muhurat, Vrat Katha, Samagri, Mantra, Aarti in Hindi: भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि पर हर वर्ष गणेश जन्मोत्सव मनाया जाता है। इस दिन को गणेश चतुर्थी के नाम से भी जाना जाता है। 31 सितंबर को गणेश चतुर्थी की धूम रही।

हिंदू पंचांग के अनुसार, भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि पर गणेश चतुर्थी का पर्व मनाया जाता है। भारत में इस दिन हर जगह हर्षोल्लास और रौनक देखने को मिलता है। भगवान गणेश के भक्त गणेश चतुर्थी के पर्व को बेहद धूमधाम से मनाते हैं। इस दिन गणेश मंदिरों में भक्तों का भारी जमावड़ा लगता है। मान्यताओं के अनुसार, गणेश चतुर्थी पर भगवान गणेश की विधि अनुसार पूजा करने से सुख, समृद्धि और सौभाग्य की प्राप्ति होती है।
Ganesh Chaturthi 2022 Date, Puja Vidhi, Mantra
विघ्नहर्ता गणेश की विधि अनुसार पूजा करने से भक्तों के सभी दुख दूर हो जाते हैं। जिन भक्तों पर भगवान गणेश की कृपा बनी रहती है उन्हें जीवन में हमेशा सफलता हाथ लगती है। यहां जानें इस वर्ष गणेश चतुर्थी किस दिन पड़ रही है। इसके साथ इस लाइव ब्लॉग के माध्यम से देखें गणेश चतुर्थी पर शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, पूजा मुहूर्त, व्रत कथा, आरती व उपाय।
क्या होता है पारण
पौराणिक मान्यता और कथाओं के अनुसार, किसी भी व्रत को धारण करने के बाद विधि-विधान से व्रत खोलना ही पारण है। पारण के बिना हर व्रत अधूरा रहता है। इसलिए लोग गणेश चतुर्थी पर भी 10 दिनों का व्रत रख ग्यारहवें दिन इसे खोलते हैं। इसे विधिवत रूप से खोलने के लिए नियम को जानना बेहद जरूरी है।
गणपति की अलग-अलग मूर्तियों की महिमा
ऐसा कहते हैं कि भगवान गणेश की पीली और रक्त वर्ण की मूर्ति की उपासना सबसे ज्यादा फलदायी होती है। नीले रंग के गणेशजी को 'उच्छिष्ट गणपति' कहते हैं। वहीं, हल्दी से बनी हुई या हल्दी का लेपन की हुई मूर्ति 'हरिद्रा गणपति' कहलाती है। गणपति की ये मूर्ति कुछ विशेष मनोकामनाओं के लिए शुभ मानी जाती है।
कब और किस विधि से खोलें अपना व्रत
गणेश चतुर्थी व्रत पारण विधि:
-गणेश चतुर्थी के दिन सबसे पहले प्रातः उठकर स्नान आदि नित्य कार्यों के बाद साफ वस्त्र धारण करें।
-फिर घर के ईशान कोण यानी उत्तर-पूर्व दिशा में एक चौकी स्थापित करें।
-चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर बप्पा की प्रतिमा रखें। साथ ही यहां कलश भी रखें।
-अब उस कलश पर रोली से टीका लगाएं और स्वास्तिक बनाएं।
-इसके बाद भगवान को सफेद गुड़ का तिलकुट और तिल चढ़ाएं।
-फिर भगवान गणेश के मंत्रो का जाप करके धूप दीप करें।
-इसके बाद भगवान गणपति की आरती कर उन्हें मोदक और लड्डू का भोग लगाएं।
-इस तरह पूरे दिन व्रत रखकर शाम के समय व्रत का पारण करें।
-व्रत को सार्थक बनाने के लिए कलश पर चढ़े तिलकुट का सेवन कर पारण करें।
-ध्यान रहे! पारण के दौरान किसी पंडित को प्रसाद के साथ कुछ दक्षिणा दान करना ना भूलें। ऐसा करने से धारक को शुभ फल की प्राप्ति होती है और इनका व्रत सफल हो जाता है।
ऐसे कर सकते हैं विसर्जन
10 दिवसीय महोत्सव के बाद अनंत चतुर्दशी के दिन गणपति का विसर्जन किया जाता है। लोग नदी, तालाब, समुद्र में गणपति की प्रतिमा विसर्जित करते हैं। अगर आप इको फ्रेंडली गणपति की स्थापना करते हैं तो किसी गमले या पानी के टब में भी इसका विसर्जन आसानी से कर सकते हैं।
कैसे करें गणपति विसर्जन
विसर्जन बप्पा की विदाई दिन होता है। इसलिए इस दौरान भक्त भावुक भी हो जाते हैं। गणपति विसर्जन के लिए नाचते हैं, गाते हैं, रंग गुलाल उड़ाते हैं और धूमधाम से बप्पा के गीत गाते हुए विदाई देते हैं। गणपति विसर्जन हमेशा जल कुंड में करना चाहिए। सबसे पहले एक लकड़ी के पाट में पीला या लाल रंग का कपड़ा बिछा लें फिर इसमे स्वास्तिक बनाएं। पाट में अक्षत फूल रखकर गणपति की मूर्ति रखें। बप्पा की मूर्ति की विधिवत पूजा करें फल-फूल अर्पित करें और मोदक का भोग लगाएं। सभी लोग मिलकर बप्पा की आरती करें। गणपति की प्रतिमा और पूजा से जुड़ी चीजों का सम्मान पूर्वक विसर्जन करें। इसके बाद क्षमा प्रार्थना करते हुए बप्पा से अगले बरस आने की कामना करें।
बप्पा का 'सिंघम' अवतार
गणपति विसर्जन तिथि
अनंत चतुर्दशी के दिन गणपति विसर्जन किया जाता है। पंचांग के अनुसार शुभ मुहूर्त और विधिपूर्वक किए गए विसर्जन से ही बप्पा का आशीर्वाद का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इस साल शुक्रवार 9 सितंबर 2022 को अनंत चतुर्दशी का पर्व है। विसर्जन के लिए सबसे शुभ मुहूर्त प्रात: और अपराह्न के रहेंगे। लेकिन राहुकाल में भूलकर भी गणपति विसर्जन न करें।
इस दिन होगा गणपति विसर्जन
गणपति विसर्जन के लिए मुहूर्त
प्रातः काल मुहूर्त-6:05 से 10:45 तक इसमें चर, लाभ और अमृत के चौघड़िया होंगे
अपराह्न मुहूर्त- 12:18 से 1:52 तक चौघड़िए में विसर्जन
शाम में मुहूर्त- 5:00 से 6:31 तक चर का चौघड़िया रहेग
रात्रि मुहूर्त - 9:26 से 10:52 तक लाभ के चौघड़िए में विसर्जन
रात्रि काल में शुभ अमृत और चर के चौघड़िया में विसर्जन 10 सितंबर 12:19 से 4:36 तक को विसर्जन कर सकते हैं
Ganesh Chaturthi 2022: किस दिन करें व्रत का पारण?
गणेश चतुर्थी व्रत का पारण चतुर्थी तिथि के 10 दिन बाद किया जाता है। भक्त 10 दिनों तक व्रत रखकर 11वें दिन अपना व्रत खोलते हैं। इस दिन किसी पंडित को दक्षिणा देकर व्रत खोला जाता है।
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Ganesh Ji Ki Aarti: जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा।।
एकदंत, दयावन्त, चार भुजाधारी,
माथे सिन्दूर सोहे, मूस की सवारी।
पान चढ़े,फूल चढ़े और चढ़े मेवा,
लड्डुअन का भोग लगे,सन्त करें सेवा,
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश, देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा।।
अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया,
बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया,
'सूर' श्याम शरण आए, सफल कीजे सेवा,
जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा,
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा।।
दीनन की लाज रखो, शंभु सुतकारी।
कामना को पूर्ण करो जय बलिहारी।
जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा,
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा।।
Ganesha Chaturthi 2022: ना करें ये गलती
आज से गणेशोत्सव प्रारंभ हो गया है। कहा जाता है कि गणेश जी की पूजा में कुछ बातों पर ध्यान जरूर देना चाहिए। गणपति की पूजा करत समय भक्तों को कभी भी तुलसी दल भगवान को अर्पित नहीं करना चाहिए।
ग्रह दोष निवारण के लिए मंत्र
गणपूज्यो वक्रतुण्ड एकदंष्ट्री त्रियम्बक:। नीलग्रीवो लम्बोदरो विकटो विघ्रराजक:।।
धूम्रवर्णों भालचन्द्रो दशमस्तु विनायक:। गणपर्तिहस्तिमुखो द्वादशारे यजेद्गणम।।
Ganesh Chaturthi 2022: आज कब निकलेगा चांद?
31 अगस्त 2022 पर चांद नहीं देखने का समय: 09:26:59 से 21:10:00 तक
गणेश जी को कैसे चढ़ाएं दूर्वा?
गणपति बप्पा को दूर्वा चढ़ाने से पहले कुछ नियमों को जरूर जान लें। हमेशा गणपति जी को साफ दूर्वा अर्पित करें। इन्हें 11 या 21 के जोड़े में ही चढ़ाएं।
Ganesh Chaturthi 2022 Mantra: आज करें इस मंत्र का जाप
अस्य प्राण प्रतिषठन्तु अस्य प्राणा: क्षरंतु च। श्री गणपते त्वम सुप्रतिष्ठ वरदे भवेताम।।
किस मुहूर्त में करना चाहिए गणेश जी का विसर्जन?
मान्यताओं के अनुसार, गणेश जी का विसर्जन हमेशा चौघड़िया मुहूर्त में करना अच्छा रहता है। इस वर्ष 09 सितंबर को गणेश विसर्जन किया जाएगा।
Ganesh Chaturthi 2022: तीसरे दिन भी कर सकते हैं विसर्जन
तीसरे दिन भी गणेश जी का विसर्जन किया जाता है। ऐसे में 2 सितंबर 2022 को सुहब 5:59 से 10:43 तक और शाम को 5:07 से 6:42 तक विसर्जन के लिए शुभ मुहूर्त रहने वाला है।
आद कब है गणशे विसर्जन का शुभ मुहूर्त?
अगर आप आज ही गणेश विसर्जन करना चाहते हैं तो इसके लिए शुभ मुहूर्त दोपहर 3:34 से शान 6:44 तक है। इसके साथ रात में विसर्जन के लिए शुभ मुहूर्त 8:10 से 12:23 तक रहेगा।
Ganesh Chaturthi 2022: कब खत्म हो रही है चतुर्थी तिथि?
भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि कल यानी 30 अगस्त को दोपहर 03:33 से शुरू हुई थी। आज, 31 अगस्त पर चतुर्थी तिथि 03:22 पर समाप्त हो रही है।
चूहे का बाहर जाना शुभ संकेत
यदि गणेश चतुर्थी के दिन घर से चूहा बाहर जाता हुआ नजर आ रहा है, तो यह शुभ संकेत देता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार ऐसा माना जाता है कि चूहा घर से दरिद्रता अपने साथ लेकर जा रहा है और सुख समृद्धि छोड़कर जाता है।
खरीदें ऐसी गणेश मूर्ति
यदि आप गणेश चतुर्थी के मौके पर घर में ही भगवान श्री गणेश की मूर्ति स्थापित करके उनकी पूजा करना चाहते हैं, तो आप मूर्ति खरीदते समय ध्यान रखें कि मूर्ति खंडित नहीं होनी चाहिए। भगवान के हाथों में अंकुश, पास, लड्डू, सूंड, धुमावदार और हाथ वरदान देने की मुद्रा में होनी चाहिए। भगवान श्री गणेश के शरीर पर जनेऊ और उनका वाहन चूहा जरूर होना चाहिए। ऐसी प्रतिमा की पूजा करना बहुत ही शुभ माना जाता है।
भगवान गणेश के एकदंत से जुड़ी पौराणिक कथा
पौराणिक कथा के अनुसार एक बार शिवजी के परम भक्त भगवान परशुराम उनसे मिलने के लिए कैलाश आए हुए थे। उस समय भगवान शिव ध्यानमग्न थे। ऐसे में गणेश जी ने परशुराम को शिवजी से मिलने से रोक दिया। लेकिन परशुराम ने कहा वे बिना मिले वापस नहीं लौटेंगे। गणेश जी उन्हें कई बार विनम्रता से टालते रहें। लेकिन जब भगवान परशुराम का धैर्य टूटा तो उन्होंने गणेश जी को युद्ध के लिए चुनौती दे दी। ऐसे में गणेश जी को परशुराम जी संग युद्ध लड़ना पड़ा। गणेश और परशुराम के बीच युद्ध हुआ। भगवान गणेश अपनी शक्ति से परशुराम के हर प्रहार निष्फल करते रहें। अंत में क्रोध में आकर परशुराम ने गणेश ज पर शिवजी से ही प्राप्त परशु से वार कर दिया। तब गणेश जी ने पिता शिव के परशु का आदर रखा। लेकिन परशु के प्रहार से गणपति का एक दांत टूट गया और वह अत्यंत पीड़ा से कहार उठे। जब पुत्र की पीड़ा सुन माता पार्वती आई और गणेश जी की अवस्था देख वह परशुराम पर क्रोधित हो गईं। यह देखकर परशुराम को उनके भूल का एहसास हुआ तब परशुराम ने माता पार्वती से क्षमा मांगी और उन्होंने भगवान गणेश को अपना समस्त तेज, बल, कौशल और ज्ञान आशीर्वाद के रूप में दे दिया।
गणेश चतुर्थी: बिगड़े कार्यों को सफल बनाने का मंत्र
यदि कोई काम बिगड़ गया हो या फिर काफी दिनों से रुका पड़ा हो तो आज गणेश चतुर्थी के दिन इन मंत्रों का जाप करें. लाभ होगा.
मंत्र: त्रयीमयायाखिलबुद्धिदात्रे बुद्धिप्रदीपाय सुराधिपाय।
नित्याय सत्याय च नित्यबुद्धि नित्यं निरीहाय नमोस्तु नित्यम्।
गणपति स्थापित में दिशा का रखें ध्यान
गणपति की मूर्ति को कभी भी दक्षिण दिशा की ओर मुख करके नहीं रखना चाहिए और ना ही दक्षिण कोने में मूर्ति की स्थापना करनी चाहिए। गणपति की मूर्ति स्थापित करने के लिए उत्तर पूर्व यानी ईशाण कोण को सबसे उत्तम माना गया है। साथ ही मूर्ति को घर की पश्चिम या उत्तर दिशा में भी रख सकते हैं।
गणेश जी को क्यों भाता है लाल सिंदूर?
प्रचलित पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान गणेश ने अपने बाल्यावस्था में कई असुरों और राक्षसों का वध किया था। बाल्यावस्था में असुरों के संहार करने के क्रम में भगवान गणेश का सामना सिंदूर नाम के असुर के साथ हुआ था। गणेश पुराण के अनुसार भगवान गणेश ने सिंदूर नाम के असुर का वध कर उसकी खून से अपने शरीर को रंग लिया था। तब से ही भगवान गणेश को लाल रंग का सिंदूर बहुत भाता है।
लाल सिंदूर से निर्विघ्न पूरे होते हैं कार्य
यदि आप किसी खास काम, इंटरव्यू, कोर्ट-कचहरी, परीक्षा आदि के लिए घर से बाहर जा रहे हैं तो गणेश जी को लाल रंग का सिंदूर अवश्य चढ़ाएं। ऐसा करना शुभ माना जाता है और महत्वपूर्ण कार्य सफलतापूर्वक पूरे होते हैं।
इस मंत्र के साथ गणपति को करें तिलक
कहा जाता है कि भगवान गणेश को लाल सिंदूर अर्पित करने से घर में खुशहाली और समृद्धि आती है। भगवान गणेश को लाल सिंदूर का तिलक लगाते समय "सिन्दूरं शोभनं रक्तं सौभाग्यं सुखवर्धनम् , शुभदं कामदं चैव सिन्दूरं प्रतिगृह्यताम् , ॐ गं गणपतये नमः" इस मंत्र का जाप करना शुभ और विशेष फलदायी बताया गया है।
गणेश चतुर्थी में बन रहे हैं ये शुभ योग
इस साल गणपति बप्पा का उत्सव बुधवार के दिन यानी बप्पा के प्रिय वार के दिन मनाया जा रहा है इस दिन तीन बेहद शुभ योग बन रहे हैं रवि ब्रह्म और शुक्ल युग का संयोग बन रहा है। ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक यह योग बेहद शुभ माना जा रहा है इस दिन कोई भी किया गया कार्य सफल साबित होगा ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक ऐसा योग 20 साल पहले बना था। हिंदू पंचांग के अनुसार रवि योग 31 अगस्त 2022, 06.06 सुबह, 1 सितंबर 2022, 12.12 सुबह। शुक्ल योग 31 अगस्त 2022, 12.05 एएम से 10:48 पीएम। ब्रह्म योग 31 अगस्त 2022, 10.48 पीएम 1 सितंबर 2022, 09.12 पीएम।
गणेश चतुर्थी पर करें ये आरती
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा।।
एकदंत, दयावन्त, चार भुजाधारी,
माथे सिन्दूर सोहे, मूस की सवारी।
पान चढ़े,फूल चढ़े और चढ़े मेवा,
लड्डुअन का भोग लगे,सन्त करें सेवा,
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश, देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा।।
अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया,
बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया,
'सूर' श्याम शरण आए, सफल कीजे सेवा,
जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा,
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा।।
दीनन की लाज रखो, शंभु सुतकारी।
कामना को पूर्ण करो जय बलिहारी।
जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा,
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा।।
Ganesh Chaturthi 2022: कैसी होनी चाहिए गणेश जी की मूर्ति?
गणेश चतुर्थी पर लोग अपने घरों में गणेश जी की मूर्ति की स्थापना करते हैं। कहा जाता है कि गणेश जी की मूर्ति की खरीदारी बहुत ध्यान से करना चाहिए। माना जाता है कि घर में गणेश जी की ऐसी मूर्ति लानी चाहिए जिसमें गणपति की मूर्ति बाईं ओर हो।
गणेश चतुर्थी मूर्ति स्थापना विधि
गणेश चतुर्थी के दिन सबसे पहले आप सूर्य उदय होने से पहले नित्यक्रिया से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण कर लें। अब पूजा का संकल्प लेते हुए भगवान श्री गणेश का स्मरण करते हुए अपने कुलदेवता का मनन करें। अब पूजा स्थल के स्थान पर पूर्व की दिशा में मुंह करके आसन पर बैठ जाए। अब एक चौकी पर लाल या सफेद कपड़ा बिछाकर उसके ऊपर एक थाली में चंदन, कुमकुम से स्वास्तिक का चिन्ह बनाएं। थाली पर बने स्वास्तिक के निशान के ऊपर भगवान श्री गणेश की मूर्ति स्थापित करते हुए पूजा शुरू करें। पूजा करने के बाद इस मंत्र का जाप करें। गजाननं भूतगणादिसेवितं कपित्थजम्बूफलचारु भक्षणम्ं। उमासुतं शोकविनाशकारकं नमामि विघ्नेश्वरपादपङ्कजम्॥
बिगड़े कार्यों को सफल बनाने का मंत्र
त्रयीमयायाखिलबुद्धिदात्रे बुद्धिप्रदीपाय सुराधिपाय।
नित्याय सत्याय च नित्यबुद्धि नित्यं निरीहाय नमोस्तु नित्यम्।
ग्रह दोष निवारण गणेश मंत्र
गणपूज्यो वक्रतुण्ड एकदंष्ट्री त्रियम्बक:।
नीलग्रीवो लम्बोदरो विकटो विघ्रराजक:।।
धूम्रवर्णों भालचन्द्रो दशमस्तु विनायक:।
गणपर्तिहस्तिमुखो द्वादशारे यजेद्गणम।।
ऐसे करें गणेश पूजा
गणपति बप्पा की पूजा करने से पहले स्नान आदि करके पवित्र हो जाए। फिर भगवान गणेश की मूर्ति स्थापित करने से पहले उस जगह पर गंगाजल छिड़ककर साफ व पवित्र करें। ध्यान रखें कि बप्पा की मूर्ति उत्तर पूर्व दिशा में ही रखें। और मूर्ति के नीचे से लाल या सफेद कपड़ा बिछाएं। फिर चौकी लगाकर उसमें अक्षत डालें। उसके बाद उसमें बप्पा की मूर्ति स्थापित करें। इस दौरान गणपति बप्पा के मंत्रों का जाप करते रहें। बप्पा की मूर्ति में गंगाजल व पंचामृत छिड़के फिर धूप व दीपक जलाएं। बप्पा को जनेऊ पहनाएं और 11 व 21 दूर्वा चढ़ाएं। फिर उनके प्रिय चीजों का बप्पा को भोग लगाएं।
अगर हो जाए चंद्र दर्शन तो करें यह उपाय
अगर भूलवश आज चंद्र दर्शन हो जाते हैं तो लोगों को कलंक दोष या मिथ्या दोष से मुक्ति पाने के लिए कुछ विशेष उपाय करने चाहिए। यहां जानें मिथ्या दोष से बचने के लिए विशेष उपाय।
1. अगर चंद्र दर्शन हो जाए तो कृष्ण-स्यमंतक कथा का पाठ या श्रवण करना चाहिए। ऐसा करने से श्री गणेश क्षमा करते हैं और इस दोष से मुक्ति प्रदान करते हैं।
2. अगर आपने गलती से गणेश चतुर्थी पर चंद्र दर्शन कर लिया है तो हर दूज को चांद देखें।
3. कलंक दोष से बचने के लिए मंत्र का जाप करें।
सिंहः प्रसेन मण्वधीत्सिंहो जाम्बवता हतः।
सुकुमार मा रोदीस्तव ह्मेषः स्यमन्तकः।।
4. भूलवश चंद्र दर्शन करने पर तुरंत किसी दूसरे के छत पर पांच पत्थर फेंक दें। इस उपाय से मिथ्या दोष से मुक्ति मिलती है।
पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान श्री कृष्ण ने भी कलंक चतुर्थी पर चंद्र दर्शन कर लिया था जिसके बाद उन पर स्यमन्तक मणि चोरी करने का झूठा आरोप लगा था।
गणेश चतुर्थी का महत्व
हिंदू शास्त्र के अनुसार इसी दिन भगवान शिव और माता पार्वती के छोटे पुत्र भगवान श्री गणेश का जन्म हुआ था। गणेश चतुर्थी का महोत्सव भारत में हर साल भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है। ऐसी मान्यता है कि गणेश चतुर्थी की पूजा करने से जीवन की सभी विघ्न-बाधाएं खत्म हो जाती हैं।
गणेश चतुर्थी पर ना करें चंद्र दर्शन
गणेश चतुर्थी के दिन चांद को देखना अशुभ माना गया है। मान्यताओं के अनुसार, ऐसा करना से अशुभ प्रभाव पड़ते हैं। कहा जाता है कि चंद्र दर्शन करने से लोगों को मिथ्या दोष लगता है।
गणेश जी को प्रसन्न करने का मंत्र
वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ।
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥
Ganesh Chaturthi 2022 Puja Samagri: गणेश पूजन के लिए सामग्री
पूजा के लिए चौकी, नारियल, गणेश प्रतिमा, पंचमेवा, दूर्वा, लाल कपड़ा, इलाइची, गंगाजल, लौंग, सुपारी, कलश, रोली, अक्षत, पंचामृत, सिंदूर, मौली, जनेऊ, लाल फूल, चांदी का वर्क, घी-कपूर, चंदन, बेसन के लड्डू, मोदक आदि चीजें अपने पास रख लें।
Ganesh Chaturthi 2022 Shubh Muhurat: कब रहेगा शुभ मुहूर्त?
रवि योग - 31 अगस्त 2022, सुबह 06.06 से 1 सितंबर अर्धरात्रि 12.12 तक
शुक्ल योग - 31 अगस्त 2022 सुबह 12.05 से रात 10:48
ब्रह्म योग - 31 अगस्त 2022, रात 10.48 से 1 सितंबर 2022 रात 09.12
Ganesh Chaturthi 2022 Shubh Muhurat: गणेश चतुर्थी पर कब बन रहा है शुभ मुहूर्त?
विजय मुहूर्त- रात 02:44 मिनट से रात 03:34 मिनट तक
निशिता मुहूर्त- सितंबर 01 को सुबह 12:16 मिनट से सितंबर 01 को सुबह 01:02 मिनट तक
रवि योग- सुबह 06:23 मिनट से 01 सितंबर को सुबह 12:12 मिनट तक
Ganesh Chaturthi 2022: जय गणेश जय गणेश आरती लिरिक्स हिंदी में
जय गणेश जय गणेश,
जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती
पिता महादेवा ॥
एक दंत दयावंत,
चार भुजा धारी ।
माथे सिंदूर सोहे
मूसे की सवारी ॥
जय गणेश जय गणेश,
जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती
पिता महादेवा ॥
पान चढ़े फल चढ़े,
और चढ़े मेवा ।
लड्डुअन का भोग लगे
संत करें सेवा ॥
जय गणेश जय गणेश,
जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती
पिता महादेवा ॥
अंधन को आंख देत,
कोढ़िन को काया ।
बांझन को पुत्र देत
निर्धन को माया ॥
जय गणेश जय गणेश,
जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती
पिता महादेवा ॥
'सूर' श्याम शरण आए,
सफल कीजे सेवा ।
माता जाकी पार्वती
पिता महादेवा ॥
जय गणेश जय गणेश,
जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती
पिता महादेवा ॥
दीनन की लाज रखो,
शंभु सुतकारी ।
कामना को पूर्ण करो
जाऊं बलिहारी ॥
जय गणेश जय गणेश,
जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती
पिता महादेवा ॥
Ganesh Chaturthi 2022: गणेश स्त्रोत पाठ
प्रणम्य शिरसा देवं गौरी विनायकम् ।
भक्तावासं स्मेर नित्यमाय्ः कामार्थसिद्धये ॥1॥
प्रथमं वक्रतुडं च एकदंत द्वितीयकम् ।
तृतियं कृष्णपिंगात्क्षं गजववत्रं चतुर्थकम् ॥2॥
लंबोदरं पंचम च पष्ठं विकटमेव च ।
सप्तमं विघ्नराजेंद्रं धूम्रवर्ण तथाष्टमम् ॥3॥
नवमं भाल चंद्रं च दशमं तु विनायकम् ।
एकादशं गणपतिं द्वादशं तु गजानन् ॥4॥
द्वादशैतानि नामानि त्रिसंघ्यंयः पठेन्नरः ।
न च विघ्नभयं तस्य सर्वसिद्धिकरं प्रभो ॥5॥
विद्यार्थी लभते विद्यां धनार्थी लभते धनम् ।
पुत्रार्थी लभते पुत्रान्मो क्षार्थी लभते गतिम् ॥6॥
जपेद्णपतिस्तोत्रं षडिभर्मासैः फलं लभते ।
संवत्सरेण सिद्धिंच लभते नात्र संशयः ॥7॥
अष्टभ्यो ब्राह्मणे भ्यश्र्च लिखित्वा फलं लभते ।
तस्य विद्या भवेत्सर्वा गणेशस्य प्रसादतः ॥8॥
॥ इति श्री नारद पुराणे संकष्टनाशनं नाम श्री गणपति स्तोत्रं संपूर्णम् ॥
Ganesh Chaturthi 2022: इन मंत्रों का करें जाप
ऊँ गं गणपतेय नम:
ऊँ गणाधिपाय नमः
ऊँ उमापुत्राय नमः
ऊँ विघ्ननाशनाय नमः
Ganesh Chaturthi 2022: गणेश जी को लगाएं इस चीज का भोग
गणेश चतुर्थी पर भगवान गणेश को तरह-तरह के भोग लगाए जाते हैं। लकिन इस दिन लोगों को उन्हें मोदक का भोग जरूर लगाना चाहिए। माना जाता है कि जो भक्त गणेश चतुर्थी पर मोदक का भोग लगाता है उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं।
Ganesh Chaturthi 2022 Puja Muhurat: पूजा का मुहूर्त कब से है?
गणेश चतुर्थी हर वर्ष भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि के दिन मनाई जाती है। 31 अगस्त यानी गणेश चतुर्थी पर पूजा के लिए शुभ मुहूर्त सुबह 11:24 से दोपहर 1:54 तक है।
Ganesh Chaturthi 2022 Significance: गणेश चतुर्थी का महत्व?
मान्यताओं के अनुसार, गणेश चतुर्थी पर विधि अनुसार भगवान गणेश की पूजा करने से सुख समृद्धि की प्राप्ति होती है। जिस भक्त पर भगवान गणेश की कृपा दृष्टि होती है उसे जीवन में हमेशा सफलता हाथ लगती है। इसके साथ भगवान गणेश अपने भक्तों के सभी दुख-दर्द दूर कर देते हैं।
Ganesh Chaturthi 2022 Time: गणेश चतुर्थी का समय?
गणेश चतुर्थी इस वर्ष 31 अगस्त को मनाई जा रही है। 30 अगस्त यानी आज दोपहर 3:33 बजे से चतुर्थी तिथि प्रारंभ हो गई है जो कल यानी 31 अगस्त को दोपहर 3:22 बजे समाप्त हो जाएगी।
Ganesh Chaturthi 2022 Date: वर्ष 2022 में कब है गणेश चतुर्थी?
गणेश चतुर्थी हर वर्ष भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि के दिन मनाई जाती है। वर्ष 2022 में गणेश चतुर्थी कल यानी 31 अगस्त के दिन पड़ रही है।
