Kashmir Almond Crop : कश्मीर घाटी में इस साल अनुकूल मौसम की वजह से बादाम की भारी पैदावार हुई है। पिछले कुछ वर्षों में खराब मौसम और अनिश्चितता के कारण बादाम की फसल काफी प्रभावित हुई थी, लेकिन इस साल बेहतर मौसमी परिस्थितियों ने किसानों को बड़ी राहत दी है। घाटी के बादाम उत्पादक इस साल हुई बंपर पैदावार से काफी संतुष्ट नजर आ रहे हैं।
कश्मीर में बादाम की जबरदस्त उत्पादन
पिछले वर्षों की तुलना में पैदावार में भारी बढ़ोतरी
न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक पुलवामा के मुख्य बागवानी अधिकारी (CHO) रियाज अहमद शाह ने बताया कि इस साल बादाम की खेती के लिए मौसम बहुत ही अनुकूल रहा। पिछले दो-तीन सालों के दौरान मौसम की मार के कारण बादाम का उत्पादन काफी गिर गया था, लेकिन इस बार पैदावार में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है। उन्होंने कहा कि बागवानी विभाग द्वारा किसानों और बाग मालिकों को समय-समय पर दी गई वैज्ञानिक सलाह और दिशानिर्देशों ने भी इस साल बेहतर फसल हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
बागवानी विभाग से अधिक ध्यान देने की मांग
हालांकि इस साल की पैदावार से किसान खुश हैं, लेकिन इसके साथ ही उन्होंने कृषि और बागवानी विभाग से बादाम की खेती पर अधिक ध्यान देने की मांग की है। अधिकारियों का कहना है कि अगर सरकार और संबंधित विभाग इस पारंपरिक फसल को बढ़ावा देने के लिए और अधिक संसाधन तथा आधुनिक तकनीक उपलब्ध कराएं, तो कश्मीर में बादाम उत्पादन को एक नए स्तर पर पहुंचाया जा सकता है।
जलवायु परिवर्तन और अनिश्चित मौसम की मार
दूसरी ओर, स्थानीय बादाम उत्पादक गुलाम मोहम्मद भट ने इस साल बेहतर पैदावार की बात स्वीकार करते हुए एक गंभीर चिंता भी जताई। उन्होंने कहा कि भले ही यह साल अच्छा रहा हो, लेकिन अगर पिछले तीन दशकों के आंकड़ों को देखें तो बादाम की पैदावार में धीरे-धीरे गिरावट आई है। भट के अनुसार, जलवायु परिवर्तन ने पिछले कुछ सालों में बादाम की खेती पर बहुत बुरा असर डाला है। मौसम का प्राकृतिक संतुलन बिगड़ने के कारण कभी लंबा सूखा पड़ता है तो कभी असमय भारी बारिश होती है। भीषण सूखे और 36 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने वाले अत्यधिक तापमान के कारण कई जगहों पर बादाम के पेड़ सूखने लगे हैं।
सेब की ओर रुझान और घटती जमीन
मौसम की अनिश्चितता और पैदावार में उतार-चढ़ाव के कारण कई किसानों ने बादाम के बजाय सेब जैसी अन्य फसलों की ओर रुख करना शुरू कर दिया है, क्योंकि सेब की फसल से उन्हें बेहतर और स्थिर मुनाफा मिल रहा है। किसानों का आरोप है कि सरकारी अधिकारियों की अनदेखी और उचित प्रोत्साहन न मिलने के कारण घाटी में बादाम की खेती वाली जमीन का दायरा धीरे-धीरे घटता जा रहा है। किसानों का मानना है कि अगर बादाम की पारंपरिक खेती को बचाना है, तो सरकार को इसके लिए विशेष नीति और योजनाएं बनानी होंगी।
