पश्चिम एशिया में ईरान-अमेरिका और इजरायल के बीच जारी जंग हर बीतते दिन के साथ बढ़ती ही जा रही है। जिससे पूरी दुनिया में तनाव है। वहीं, इसके लंबे खिंचने का डर यूक्रेन के राष्ट्रपति को कुछ ज्यादा ही सता रहा है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने चिंता जतायी कि अगर अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच युद्ध लंबा खिंचता है, तो इससे यूक्रेन के प्रति अमेरिका का समर्थन और कम हो सकता है। उनकी चिंता है कि इस जंग के कारण वाशिंगटन की वैश्विक प्राथमिकताएं बदल रही हैं। अमेरिका यूक्रेन की उतनी मदद नहीं कर पा रहा है, जितने की उनको जरूरत है।
वोलोदिमीर जेलेंस्की
जेलेंस्की ने शनिवार देर रात इस्तांबुल में एक विशेष साक्षात्कार में अपनी चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा कि यूक्रेन को रूस के रोजाना हमलों का मुकाबला करने के लिए अमेरिका में बनी हुई पैट्रियट वायु रक्षा प्रणाली की सख्त जरूरत है, लेकिन ईरान से जंग के कारण अमेरिका यूक्रेन और रूस की जंग पर ध्यान नहीं दे पा रहा है।जेलेंस्की ने कहा कि हमें यह स्वीकार करना होगा कि इस समय हम प्राथमिकता नहीं हैं। इसी वजह से मुझे डर है कि यदि (ईरान) युद्ध लंबा चला, तो हमें और कम समर्थन मिलेगा।
पैट्रियट मिसाइल नहीं मिली तो क्या होगा?
दरअसल, जैसे-जैसे रूस पीछे के इलाकों पर बैलिस्टिक मिसाइलों से हमले बढ़ा रहा है, यूक्रेन को अमेरिकी Patriot Air Defence System की पहले से ज्यादा जरूरत है। लेकिन जेलेन्स्की का कहना है कि उनके पास इन मिसाइल सिस्टम की उपलब्धता बेहद सीमित है और अमेरिका अब अपनी प्राथमिकताएं मध्य पूर्व की ओर मोड़ रहा है। उन्होंने कहा, 'हमें शुरू से ही पर्याप्त पैट्रियट सिस्टम नहीं मिले। और अगर ईरान युद्ध खत्म नहीं हुआ, तो हमें मिलने वाले पैकेज, जो पहले ही छोटा है,दिन-ब-दिन और छोटा होता जाएगा। हमारा डर यही है।रूस की है ये रणनीति
रूस की रणनीति अब ऊर्जा ढांचे, ड्रोन-निर्माण सुविधाओं और शहरी आबादी को ठंड के महीनों में निशाना बनाते हुए अधिकतम दबाव बनाने की है। चार साल से अधिक समय पहले शुरू हुए रूस के आक्रमण के बाद से शहरी इलाकों पर लगातार हमलों में हजारों नागरिक मारे गए हैं। रूस ने यूक्रेन की ऊर्जा आपूर्ति को भी निशाना बनाया है, ताकि वहां ड्रोन और मिसाइलों के उत्पादन को बाधित किया जा सके और सर्दियों में लोगों को बिजली व पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं से वंचित किया जा सके।
फेल हो चुकी है मॉस्को और कीव की वार्ता
वहीं, मॉस्को और कीव के अमेरिका की मध्यस्थता से हुई वार्ता का भी कोई नतीजा नहीं निकला और फरवरी के बाद इसमें कोई प्रगति नहीं हुई है। जेलेंस्की का कहना है कि पुतिन जंग को जारी रखते हुए बातचीत के जरिए कोई साझा हल निकालना ही नहीं चाहते हैं, और इसी लिए वे बातचीत को लंबा खींच रहे हैं। हालांकि उन्होंने दावा किया कि यूक्रेन युद्ध समाप्त करने के लिए संभावित समझौते को लेकर अमेरिकी वार्ताकारों के संपर्क में है और उसने सुरक्षा की और मजबूत गारंटी के लिए दबाव बनाना जारी रखा है। लेकिन उन्होंने कहा कि ये चर्चाएं भी यूक्रेन से ध्यान हटने की व्यापक स्थिति को दर्शाती हैं।
