Mojtaba Khamenei: ईरान के इतिहास में 9 मार्च 2026 की सुबह एक ऐसी तारीख के रूप में दर्ज हो गई है, जिसने न केवल मिडल ईस्ट बल्कि पूरी दुनिया की भू-राजनीति को हिलाकर रख दिया है। अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद, उनके 56 वर्षीय बेटे मोजतबा खामेनेई को ईरान का नया 'सुप्रीम लीडर' घोषित किया गया है। यह घोषणा उस समय हुई जब ईरान अपने सबसे कठिन दौर से गुजर रहा है। मोजतबा का नाम पहले भी चर्चा में था, लेकिन वे हमेशा पर्दे के पीछे रहे, जिन्होंने कभी किसी सरकारी पद को औपचारिक रूप से नहीं संभाला। अब, वे ईरान के उस 'सिंहासन' पर बैठे हैं जहां से निकलने वाला एक आदेश युद्ध और शांति की दिशा तय करता है।
पर्दे के पीछे रहने वाले मोजतबा खामनेई कौन हैं (चित्र साभार: AP)
कौन हैं मोजतबा खामनेई
मोजतबा खामेनेई का जन्म 1969 में मशहद शहर में हुआ था। यह वह समय था जब उनके पिता अली खामेनेई ईरान के शाह मोहम्मद रजा पहलवी के खिलाफ विद्रोह की मशाल जला रहे थे। मोजतबा का बचपन किसी सामान्य बच्चे जैसा नहीं था। एक बार शाह की गुप्त पुलिस 'सावाक' ने उनके घर पर छापा मारा और उनके पिता की बुरी तरह पिटाई की। उस खौफनाक मंजर के बाद बच्चों को बताया गया कि उनके पिता छुट्टियों पर जा रहे हैं, लेकिन अली खामेनेई ने अपने बच्चों से सच बोलना बेहतर समझा। मोजतबा ने छोटी उम्र से ही संघर्ष और कट्टरता को बहुत करीब से देखा, जिसने उनके व्यक्तित्व को एक सख्त सांचे में ढाल दिया।
1979 की इस्लामी क्रांति के बाद जब उनका परिवार तेहरान आया, तो मोजतबा ने अपनी पढ़ाई के साथ-साथ सैन्य प्रशिक्षण भी लिया। उन्होंने ईरान-इराक युद्ध में रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) की 'हबीब इब्न मजाहिर' बटालियन में एक सैनिक के रूप में भाग लिया। युद्ध के इसी मैदान ने उन्हें उन कमांडरों और खुफिया अधिकारियों के करीब लाया, जो आज ईरान की सत्ता के असली स्तंभ हैं। 1989 में उनके पिता सुप्रीम लीडर बने और यहीं से मोजतबा की 'परछाईं वाली शक्ति' का उदय शुरू हुआ। उन्होंने आधिकारिक तौर पर कोई पद नहीं लिया, लेकिन वे अपने पिता के सबसे भरोसेमंद सलाहकार और पावर ब्रोकर बनकर उभरे।
पर्दे के पीछे का 'खिलाड़ी'
मोजतबा खामेनेई को लेकर दुनिया भर की खुफिया एजेंसियों में हमेशा से उत्सुकता रही है। विकिलीक्स के जारी किए गए अमेरिकी कूटनीतिक दस्तावेजों में उन्हें 'पर्दे के पीछे की असली ताकत' कहा गया था। ऐसी खबरें भी थीं कि मोजतबा अपने पिता के फोन तक टैप करते थे ताकि वे यह सुनिश्चित कर सकें कि उनके पिता के पास जाने वाली हर सूचना उनके जरिए ही गुजरे। उन्होंने दशकों तक ईरान के अरबों डॉलर के व्यापारिक साम्राज्यों और धार्मिक फाउंडेशनों (बोनीयाड्स) पर अपनी पकड़ मजबूत की। ये वही फाउंडेशन हैं जो ईरान की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाते हैं। उनकी ताकत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि ईरान के शक्तिशाली अर्धसैनिक बल 'रिवोल्यूशनरी गार्ड्स' के शीर्ष कमांडर सीधे उन्हें रिपोर्ट करते थे। 2005 और 2009 के विवादित चुनावों में भी उनकी भूमिका संदिग्ध रही थी। उन पर आरोप लगे थे कि उन्होंने पर्दे के पीछे से कट्टरपंथी महमूद अहमदीनेजाद की जीत तय की। उस समय के विपक्षी नेताओं ने उन्हें 'मास्टर का बेटा' कहकर पुकारा था, जिस पर उनके पिता ने जवाब दिया था कि मोजतबा खुद में एक 'मास्टर' है। यह उनके पिता का अपने बेटे की क्षमताओं पर अटूट विश्वास ही था, जिसने आज उन्हें इस पद तक पहुंचाया है।
'शहीद का वारिस' और युद्ध की चुनौतियां
मोजतबा की नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब उन्होंने अपनी पत्नी ज़हरा हदाद अदेल और अपने पिता को एक इजरायली हवाई हमले में खो दिया है। एक सप्ताह पहले शुरू हुए इस युद्ध ने मोजतबा को व्यक्तिगत और राष्ट्रीय, दोनों स्तरों पर गहरा घाव दिया है। ईरान समर्थकों की नजर में वे अब सिर्फ एक नेता नहीं, बल्कि एक 'शहीद के वारिस' हैं। यही कारण है कि 'असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स' ने मतभेदों के बावजूद उनके नाम पर मुहर लगा दी। उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती ईरान की युद्ध रणनीति को दिशा देना और परमाणु कार्यक्रम पर फैसला लेना है। उनके पास अब ईरान के हाइली एनरिच्ड यूरेनियम के भंडार का नियंत्रण है। वे चाहें तो एक धार्मिक फतवा जारी कर परमाणु हथियार बनाने का आदेश दे सकते हैं। वे अब सेना और रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के कमांडर-इन-चीफ हैं। इजरायल और अमेरिका के साथ जारी 12 दिनों के युद्ध ने ईरान को उस मोड़ पर खड़ा कर दिया है जहां से वापसी का रास्ता कठिन है। मोजतबा को अब न केवल बाहरी दुश्मनों से निपटना है, बल्कि देश के भीतर भी उन आवाजों को शांत करना है जो इस धर्मतंत्र के खिलाफ सिर उठा रही हैं।
वंशवाद बनाम धर्मतंत्र पर वैश्विक प्रतिक्रिया
मोजतबा खामेनेई की ताजपोशी को ईरान के भीतर और बाहर 'राजशाही के धर्मतांत्रिक संस्करण' के रूप में देखा जा रहा है। 1979 की क्रांति राजशाही को खत्म करने के लिए हुई थी, लेकिन अब उसी क्रांति के वारिस एक ही परिवार के भीतर सत्ता का हस्तांतरण कर रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उनकी नियुक्ति की कड़ी आलोचना की है और उन्हें 'हल्का' करार दिया है। ट्रंप ने यहां तक कह दिया कि खामेनेई का बेटा उन्हें स्वीकार्य नहीं है और वे ईरान में ऐसा नेतृत्व चाहते हैं जो सद्भाव और शांति लाए।
वैश्विक शक्तियों के लिए मोजतबा एक अनसुलझी पहेली की तरह हैं। वे अपने पिता की क्षेत्रीय महत्वाकांक्षाओं को किस हद तक आगे बढ़ाएंगे, यह अभी साफ नहीं है। 2019 में उन पर अमेरिकी प्रतिबंध लगाए गए थे क्योंकि उन पर अपने पिता के दमनकारी घरेलू उद्देश्यों को आगे बढ़ाने का आरोप था। अब जब वे खुद शीर्ष पर हैं, तो दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या वे अपने पिता की तरह कट्टर रहेंगे या बदलती वैश्विक परिस्थितियों के साथ ईरान के लिए कोई नया रास्ता खोजेंगे। तेहरान की सड़कों पर जश्न के दृश्य भले ही दिखाए जा रहे हों, लेकिन इस 56 वर्षीय नेता के कंधों पर ईरानी इतिहास का सबसे भारी बोझ है।
