White House Press Pool: संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति की हर गतिविधि, विदेश दौरों और प्रमुख सम्मेलनों को कवर करने वाली पत्रकार प्रणाली यानी 'व्हाइट हाउस प्रेस पूल' (White House Press Pool) इस समय जबरदस्त चर्चा और विवाद के केंद्र में है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा देश के तीन प्रमुख मीडिया संस्थानों CNN, MS NOW और Politico पर बैन लगाने के बाद, अमेरिका के प्रमुख टेलीविजन नेटवर्क्स (जिनमें ट्रंप समर्थक माने जाने वाला Fox News भी शामिल है) ने भी राष्ट्रपति का 'पूल कवरेज' करने से इनकार करते हुए बॉयकॉट कर दिया है।
क्या है 'व्हाइट हाउस प्रेस पूल'? ट्रंप के मीडिया बैन के खिलाफ अमेरिकी टीवी नेटवर्क्स ने क्यों खोला मोर्चा, जानें पूरा विवाद
विवाद की शुरुआत: 3 बड़े मीडिया आउटलेट्स पर बैन
विवाद की शुरुआत तब हुई जब राष्ट्रपति ट्रंप ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए आरोप लगाया कि कुछ मीडिया संस्थान उनके खिलाफ 'झूठी और पक्षपाती खबरें' (Fake News) चला रहे हैं। इसके बाद प्रशासन ने CNN, MS NOW और Politico के पत्रकारों के व्हाइट हाउस पास (Press Badges) रद्द कर दिए और उन्हें परिसर में प्रवेश करने से रोक दिया।
इस कार्रवाई के खिलाफ तीनों मीडिया आउटलेट्स ने वाशिंगटन डीसी की अदालत में ट्रंप प्रशासन के खिलाफ अमरीकी संविधान के प्रथम संशोधन (First Amendment - प्रेस की स्वतंत्रता) और पांचवें संशोधन (Fifth Amendment - ड्यू प्रोसेस) के उल्लंघन का हवाला देते हुए याचिका दायर की है।
क्या होता है 'व्हाइट हाउस प्रेस पूल' और यह कैसे काम करता है?
प्रेस पूल की व्यवस्था 1950 के दशक में राष्ट्रपति ड्वाइट आइजनहावर के कार्यकाल के दौरान शुरू की गई थी। इसके पीछे मुख्य कारण व्यावहारिक और सुरक्षा संबंधी थे:
1. सीमित जगह और लॉजिस्टिक्स: अमेरिकी राष्ट्रपति जहां भी जाते हैं (जैसे एयर फोर्स वन, ओवल ऑफिस या अंतरराष्ट्रीय शिखर सम्मेलन), वहां दुनिया भर के सैकड़ों पत्रकारों का एक साथ पहुंचना संभव नहीं होता।
2. रोटेशन व्यवस्था: इसलिए पत्रकारों और प्रमुख नेटवर्क्स का एक छोटा प्रतिनिधि समूह ('पूल') राष्ट्रपति के साथ यात्रा करता है और हर पल का ऑडियो, वीडियो व रिपोर्ट तैयार करता है।
3. सामूहिक फुटेज शेयरिंग: इस पूल द्वारा तैयार की गई सामग्री (वीडियो/ऑडियो) को दुनिया भर के अन्य सभी समाचार पत्रों, टीवी चैनलों और डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के साथ साझा किया जाता है।
4. मुख्य नेटवर्क्स: टीवी पूल में मुख्य रूप से 5 बड़े अमेरिकी नेटवर्क्स शामिल हैं- ABC News, CBS News, CNN, Fox News और NBC News। ये नेटवर्क्स बारी-बारी से (Rotation) कवरेज की जिम्मेदारी संभालते हैं।
नेटवर्क्स ने ट्रंप का बॉयकॉट क्यों किया?
जिस समय ट्रंप प्रशासन ने बैन लगाया, उस समय राष्ट्रपति के दौरों को कवर करने की बारी CNN की थी। जब प्रशासन ने CNN को परिसर में आने से रोका, तो अन्य चारों नेटवर्क्स (Fox News, ABC, CBS, NBC) ने एकजुटता दिखाते हुए अपनी सेवाएं देने या CNN की जगह लेने से इनकार कर दिया।
नेटवर्क्स ने संयुक्त बयान में कहा कि, 'जनता को सरकार के बारे में सटीक और स्वतंत्र जानकारी पाने का मौलिक अधिकार है। कोई भी प्रशासन किसी मीडिया संस्थान को केवल इसलिए प्रतिबंधित नहीं कर सकता क्योंकि वह उसकी रिपोर्टिंग से असहमत है।'
दूसरे पत्रकारों को क्यों नहीं रखा जा सकता?
बॉयकॉट का तात्कालिक प्रभाव
इन-ऑडिबल भाषण: व्हाइट हाउस के एक हालिया कार्यक्रम (हेलीपैड उद्घाटन) के दौरान जब ट्रंप ने मीडिया को संबोधित किया, तो वहां पेशेवर पूल कैमरों व माइक की अनुपस्थिति के कारण उनका भाषण ठीक से सुनाई ही नहीं दिया।
'ट्रंप टीवी' की शुरुआत: मुख्यधारा के टीवी चैनलों द्वारा कवरेज रोकने के बाद ट्रंप प्रशासन ने ऑनलाइन 'Trump TV' नाम से अपना आधिकारिक फीड प्रसारित करना शुरू कर दिया है।
संयुक्त राष्ट्र (UN) सम्मेलन पर असर: संयुक्त राष्ट्र महासभा के सत्र के दौरान भी स्वतंत्र टीवी पूल के अनुपस्थित रहने से वैश्विक मीडिया को ट्रम्प की कवरेज पाने में बाधा आ रही है।
प्रेस पूल की जगह दूसरे पत्रकारों को क्यों नहीं रखा जा सकता?
राष्ट्रपति के साथ यात्रा करना बहुत महंगा होता है। न्यूज ऑर्गनाइजेशन को पत्रकारों के सफर, होटल, खाने, इंटरनेट और जमीनी ट्रांसपोर्ट का खर्च उठाना पड़ता है। राष्ट्रपति की विदेश यात्रा पर टेलीविजन नेटवर्क का हजारों डॉलर खर्च हो सकता है। छोटे डिजिटल आउटलेट, अकेले काम करने वाले पत्रकार या कंटेंट क्रिएटर आम तौर पर इतना बड़ा खर्च नहीं उठा सकते।
इसलिए, अमेरिका के पांच बड़े टीवी नेटवर्क आपस में यह बांट लेते हैं: हर नेटवर्क बारी-बारी से क्रू का खर्च उठाता है और उसे ऑपरेट करता है, जबकि बाकी सभी को उससे मिलने वाला फुटेज मिल जाता है।
उदाहरण के लिए, मंगलवार को UN में हुए कार्यक्रम के मामले में, हो सकता है कि किसी अखबार, वेबसाइट या छोटे ब्रॉडकास्टर का पत्रकार UN में मौजूद हो, और UN के अपने कैमरे भी हों। लेकिन इसकी कोई गारंटी नहीं है कि ट्रंप जिस भी कमरे में जाएंगे या जहां भी बोलेंगे, वहां तक पहुंच मिल ही जाएगी। साथ ही, अगर पत्रकार प्रेस पूल का हिस्सा नहीं हैं, तो वे अपना फुटेज दूसरों के साथ शेयर करने के लिए बाध्य नहीं हैं। और छोटे नेटवर्क या स्वतंत्र पत्रकार मिलकर भी उन पांच बड़े टीवी नेटवर्क की पहुंच का मुकाबला शायद ही कर पाएं।
'फर्स्ट अमेंडमेंट' (संविधान के पहले संशोधन) को लेकर मुकदमा क्यों किया गया है?
CNN, MSNBC और Politico का तर्क है कि सरकार चुनिंदा पत्रकारों को कवरेज से इसलिए नहीं रोक सकती क्योंकि उसे यह पसंद नहीं है कि वे क्या छापते हैं या राष्ट्रपति की कवरेज कैसे करते हैं। उनके मुकदमे में 'फर्स्ट अमेंडमेंट' का हवाला दिया गया है, जो बोलने और प्रेस की आजादी की सुरक्षा करता है, और 'फिफ्थ अमेंडमेंट' (पांचवें संशोधन) का भी जिक्र है, जिसमें उचित कानूनी प्रक्रिया (ड्यू प्रोसेस) से जुड़ी सुरक्षा शामिल है। वे एक फेडरल जज से मांग कर रहे हैं कि जब तक केस चल रहा है, तब तक उन्हें कवरेज की इजाजत बहाल की जाए।
