What is TAPI Project: अफगानिस्तान की तालिबान सरकार में एक बार फिर से उथल-पुथल शुरू हो गई है। खबर है कि तालिबान सरकार में हक्कानी नेटवर्क और मुल्ला अली बरादर के बीच एक बार फिर से संघर्ष शुरू हो गया है। इस बार दोनों के बीच खींचतान दोनों के बीच कई मसलों को लेकरहै, जिसमें मुख्य तालिबान की आर्थिक परियोजनाएं हैं। संयुक्त राष्ट्र संघ की रिपोर्ट में कहा गया है कि तालिबान के आांतरिक मंत्री सिराजुद्दीन हक्कानी अफगानिस्तान की आर्थिक परियोजनाओं को अपने नियंत्रण में लेने की कोशिश कर रहे हैं।
तालिबान
मुख्य रूप से हक्कानी नेटवर्क तुर्कमेनिस्तान-अफगानिस्तान- पाकिस्तान- भारत(TAPI) गैस पाइपलाइन पर नियंत्रण की मांग कर रहा है। वह इस महत्वपूर्ण परियोजना के अफगान खंड के निर्माण पर नियंत्रण चाहता है।
कई पदों को लेकर हक्कानी और बरादर में कलह
संयुक्त राष्ट्र की 1988 की तालिबान प्रतिबंध समिति की विश्लेषणात्मक सहायता और प्रतिबंध निगरानी टीक की 14वीं रिपोर्ट में कहा गया है कि राज्य तंत्र और प्रांतीय प्रशासन के पदों को लेकर तालिबानी अधिकारियों के लिए संघर्ष चल रहा है। कई मसले ऐसे हैं, जिस पर आंतरिक मंत्री सिराजुद्दीन हक्कानी और कार्यवाहक प्रथम उप प्रधानमंत्री मुल्ला बरादर के लिए सहमति नहीं बन पा रही है। इसमें ज्यादातकर आर्थिक मसले शामिल हैं।
दक्षिणी प्रांतीय प्रशासन का समर्थन करता है बरादर
संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में कहा गया है कि कार्यवाहक प्रथम उप प्रधानमंत्री मुल्ला बरादर दक्षिणी प्रांतीय प्रशासन का समर्थन करता है। वह तालिबान के लिए अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त करके अन्य रास्ते खोलने के पक्ष में है। इसके अलावा बरादत विदेशों में अफगानिस्तान की संपत्ति को भी मुक्त करवाना चाहता है और वह विदेशी सहायता का विस्तार करने की प्रक्रिया को भी नियंत्रित करता चाहता हैं। वहीं हक्कानी ऐसा नहीं चाहता है, जिसको लेकर दोनों के बीच कलह का दौर जारी है।
क्या है TAPI?
TAPI तुर्कमेनिस्तान, अफगानिस्तान, पाकिस्तान और भारत के बीच पाइपलाइन योजना है। यह तुर्केमेनिस्तान से शुरू होकर पाकिस्तान के रास्ते भारत पहुंचती है। 1814 किलोमीटर लंबी प्राकृतिक गैस पाइपलाइन योजना के अंतर्गत दिसंबर 2010 में एक अंतर सरकारी समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे। इस पाइपलाइन योजना का निर्माण 2015 में शुरू हुआ था। हालांकि, अफगानिस्तान सरकार की अस्थिरता के कारण इस परियोजना के अफगान खंड का विकास काफी कम हुआ है।
