Nuclear Codes: ईरान-अमेरिका युद्ध खत्म हो गया है, ऐसा कहना गलत होगा, बस सीजफायर चल रहा है, लेकिन तनाव भरपूर बना हुआ है। इस बीच एक वायरल दावे में कहा गया है कि ईरान के साथ बढ़ते तनाव के दौरान, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने न्यूक्लियर कोड्स का इस्तेमाल करने की कोशिश की थी। इस दावे ने ऑनलाइन दुनिया में एक बड़ी बहस छेड़ दी है। CIA के पूर्व विश्लेषक लैरी जॉनसन द्वारा लगाए गए इस आरोप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर काफी सुर्खियां बटोरी हैं। हालांकि, अधिकारियों और विश्वसनीय रिपोर्टों को अब तक इस दावे की पुष्टि करने वाला कोई भी सत्यापित सबूत नहीं मिला है।
क्या होते हैं न्यूक्लियर कोड, ईरान के खिलाफ इस्तेमाल करने का मन बना लिया था ट्रंप ने? जानें- कब तक हो जाता एक्सेस
ईरान के खिलाफ न्यूक्लियर कोड्स का इस्तेमाल करने की कोशिश हुई?
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बारे में एक विवादित दावा ऑनलाइन चर्चा का विषय बन गया है। इस दावे में कहा गया है कि मौजूदा संघर्ष के दौरान ट्रंप ने परमाणु हथियारों के इस्तेमाल को मंजूरी देने की कोशिश की थी। हालांकि, इस आरोप के समर्थन में अभी तक कोई भी सत्यापित सबूत सामने नहीं आया है, और अधिकारियों ने भी इस बात की पुष्टि नहीं की है कि ऐसी कोई घटना हुई थी।
यह दावा CIA के पूर्व विश्लेषक लैरी जॉनसन की तरफ से आया था, जिन्होंने 'जजिंग फ्रीडम' पॉडकास्ट में शामिल होने के दौरान ये बातें कही थीं। उनकी टिप्पणियां सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर तेजी से फैल गईं, जिससे बड़े पैमाने पर बहस और अटकलों का दौर शुरू हो गया।
परमाणु कोड को लेकर लैरी जॉनसन ने क्या दावा किया?
पॉडकास्ट चर्चा के दौरान, जॉनसन ने एक रिपोर्ट का जिक्र किया, जिसके बारे में उन्होंने कहा कि यह संघर्ष के दौरान हुई एक आपातकालीन बैठक से जुड़ी थी। जॉनसन ने कहा, 'एक रिपोर्ट आई थी कि शनिवार रात को एक आपातकालीन बैठक हुई थी, और एक जानकारी के मुताबिक, व्हाइट हाउस में ट्रंप परमाणु कोड का इस्तेमाल करना चाहते थे।'
ईरान पर परमाणु हमला करने का कोई सबूत नहीं
उन्होंने यह भी दावा किया कि सेना के वरिष्ठ नेतृत्व ने इस कदम का विरोध किया था। 'खबरों के मुताबिक, जनरल डैन केन ने इसका विरोध किया था।' जॉनसन की टिप्पणियों से राजनीतिक नेतृत्व और सैन्य अधिकारियों के बीच तनाव का संकेत मिला, लेकिन उन्होंने इस दावे के समर्थन में कोई सीधा सबूत नहीं दिया।
क्या ईरान पर परमाणु हमले के दावे का कोई पुख्ता सबूत है?
अब तक, 18 अप्रैल को पेंटागन की किसी आपातकालीन बैठक होने का कोई पुख्ता रिकॉर्ड नहीं है, जिसका जिक्र जॉनसन ने अपने बयान में किया था। सबसे हालिया पुख्ता सैन्य ब्रीफिंग 16 अप्रैल को हुई थी। उस ब्रीफिंग के दौरान, अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ, जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन डैन केन के साथ मौजूद थे।
पेंटागन या व्हाइट हाउस की ओर से कोई भी आधिकारिक बयान ऐसा नहीं आया है जो परमाणु हमले की मंजूरी से जुड़े किसी भी टकराव की पुष्टि करता हो। इसी वजह से, विशेषज्ञों ने इस आरोप को 'बिना पुष्टि वाला' बताया है।
सुरक्षा विश्लेषकों का कहना है कि परमाणु हथियारों से जुड़े फैसलों के लिए बेहद सख्त प्रक्रियाओं और कई स्तरों की मंजूरी की जरूरत होती है, जिससे किसी एकतरफा कार्रवाई की संभावना लगभग न के बराबर हो जाती है।
ट्रंप और 'सिचुएशन रूम' की रिपोर्टें
इसके अलावा, 'द वॉल स्ट्रीट जर्नल' की एक रिपोर्ट में एक सैन्य अभियान के दौरान ट्रंप से जुड़ी एक अलग घटना का जिक्र किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, ईरानी सीमा क्षेत्र में दो F-15 पायलटों को बचाने के लिए चलाए गए एक बचाव अभियान के दौरान, ट्रंप को 'सिचुएशन रूम' से दूर रखा गया था।
रिपोर्ट में जिन सूत्रों का हवाला दिया गया है, उन्होंने इस घटना के दौरान माहौल को काफी तनावपूर्ण बताया है। एक सूत्र ने कहा, 'ट्रंप के सहयोगियों ने उन्हें कमरे से बाहर ही रखा... क्योंकि उन्हें लगा कि ट्रंप का सब्र खोना इस स्थिति में मददगार साबित नहीं होगा।'
खबरों के मुताबिक, अधिकारियों ने इस अभियान के दौरान ट्रंप को सिर्फ बेहद अहम मौकों पर ही जानकारी (ब्रीफिंग) दी थी। हालांकि, यह रिपोर्ट सैन्य अभियानों के दौरान पैदा हुए तनाव का जिक्र तो करती है, लेकिन इसमें परमाणु हथियारों के इस्तेमाल की किसी भी कोशिश की पुष्टि नहीं की गई है।
ट्रंप कब कैसे हासिल कर सकते हैं कोड्स का एक्सेस?
उदाहरण के तौर पर 2017 में जब 20 जनवरी को अमेरिका में राष्पति पद की शपथ लेने के दिन, एक अनजान मिलिट्री असिस्टेंट को प्रेसिडेंट बराक ओबामा के साथ वाशिंगटन में US कैपिटल में हैंडओवर सेरेमनी में जाते देखा गया। उस मिलिट्री असिस्टेंट के कंधे पर एक थैला था जिसमें एक ब्रीफकेस था जिसे 'न्यूक्लियर फुटबॉल' कहते हैं। अंदर 3in (7.3cm) गुणा 5in का एक डिजिटल हार्डवेयर था, जिसे 'बिस्किट' कहते हैं।
इसमें एक स्ट्रेटेजिक न्यूक्लियर स्ट्राइक के लिए लॉन्च कोड थे। आने वाले प्रेसिडेंट को उन्हें कैसे एक्टिवेट करना है ये बताया था। इस बारे में किसी को कुछ नहीं थी, लेकिन जैसे ही प्रेसिडेंट-इलेक्ट डोनाल्ड ट्रंप ने पद की शपथ ली, वह असिस्टेंट और थैला धीरे से उनके पास चले गए।
तब से, डोनाल्ड ट्रंप के पास एक घंटे से भी कम समय में लाखों लोगों की मौत का कारण बनने वाले एक्शन का ऑर्डर देने का अकेला अधिकार रहा है। बीच में वे चुनाव हारे और जो बाइडन राष्टपति बने, लेकिन ट्रंप फिर अपने दूसरे कार्यकाल में अमेरिका के राष्ट्रपति बन कर सर्विस दे रहे हैं।
ट्रंप दे सकते हैं परमाणु हमले का आदेश
बात जब न्यूक्लियर जैसे गंभीर सवाल की हो तो बहुत से लोगों के मन में यह सवाल है कि ट्रंप के जल्दबाजी वाले स्वभाव को देखते हुए, क्या उनके पास ये अधिकार सही है? इसके भयानक नतीजे हो सकते हैं और क्या ट्रंप को रोकने के लिए कोई सुरक्षा उपाय हैं?
सबसे पहले तो यह कि डोनाल्ड ट्रंप पहले से अब न्यूक्लियर हथियारों के इस्तेमाल पर अपनी कुछ भड़काऊ बातों से पीछे हट चुके हैं। अब वह परमाणु हमलों की धमकी देते नहीं नजर आते हैं, लेकिन उन्होंने कहा था कि वह 'उनका इस्तेमाल करने वाले आखिरी व्यक्ति होंगे।'
क्या हमले का एकमात्र अधिकार राष्ट्रपति के पास?
कमांड चेन में दूसरे सीनियर अधिकारी भी शामिल होते हैं, जैसे कि US के रक्षा सचिव। लेकिन वॉशिंगटन में इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रेटेजिक स्टडीज के न्यूक्लियर नॉन-प्रोलिफरेशन एक्सपर्ट मार्क फिट्जपैट्रिक का कहना है कि आखिर में, हमला करने का एकमात्र अधिकार राष्ट्रपति के पास ही होता है।
वे कहते हैं, 'न्यूक्लियर हमला करने के राष्ट्रपति के अधिकार पर कोई रोक-टोक या संतुलन नहीं है।' 'लेकिन जिस समय वे हमले का आदेश देते हैं और जिस समय वह हमला किया जाता है, उसके बीच दूसरे लोग भी शामिल होते हैं।'
किसी मनमानी करने वाले राष्ट्रपति का अकेले ही इतना बड़ा फैसला लेने का विचार अवास्तविक है। वे आदेश देते हैं और रक्षा सचिव संवैधानिक रूप से उस आदेश का पालन करने के लिए बाध्य होते हैं।
सैद्धांतिक रूप से, रक्षा सचिव आदेश मानने से मना कर सकते हैं, अगर उन्हें राष्ट्रपति की मानसिक स्थिति पर शक करने का कोई कारण हो; लेकिन ऐसा करना बगावत माना जाएगा और राष्ट्रपति उन्हें पद से हटाकर यह काम रक्षा उप-सचिव को सौंप सकते हैं।
US संविधान के 25वें संशोधन के तहत, एक उपराष्ट्रपति, सैद्धांतिक रूप से राष्ट्रपति को सही फैसला लेने में मानसिक रूप से अक्षम घोषित कर सकता है, लेकिन इसके लिए उसे कैबिनेट के बहुमत का समर्थन चाहिए होगा।
न्यूक्लियर कोड्स कैसे खुलते हैं?
उस ब्रीफकेस के अंदर, जिसे 'न्यूक्लियर फुटबॉल' कहा जाता है और जो कभी भी राष्ट्रपति से दूर नहीं होता, वह एक ब्लैक बुक होती है, जिसमें हमले के कई विकल्प दिए होते हैं। राष्ट्रपति एक प्लास्टिक कार्ड का इस्तेमाल करके कमांडर-इन-चीफ के तौर पर अपनी पहचान की पुष्टि करने के बाद इनमें से कोई भी विकल्प चुन सकते हैं।
वॉशिंगटन में एक मशहूर किस्सा है कि एक बार एक पूर्व राष्ट्रपति ने अपना पहचान पत्र कुछ समय के लिए खो दिया था। दरअसल, उन्होंने वह कार्ड अपनी जैकेट में ही छोड़ दिया था और वह जैकेट ड्राई क्लीनिंग के लिए भेज दी गई थी।
तो जब राष्ट्रपति बुक में दिए गए मेनू में से हमले का कोई विकल्प चुन लेते हैं, तो यह आदेश जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन के जरिए पेंटागन के वॉर रूम तक पहुंचाया जाता है। इसके बाद, सीलबंद पुष्टि कोड (authentication codes) का इस्तेमाल करके, इस आदेश को नेब्रास्का के ऑफट एयरबेस में स्थित US स्ट्रेटेजिक कमांड के मुख्यालय तक भेजा जाता है। अटैक करने का आदेश एन्क्रिप्टेड कोड के जरिए असल लॉन्च क्रू तक पहुंचाया जाता है, लेकिन इन कोड का उनके सेफ (तिजोरी) में बंद कोड से मेल खाना जरूरी होता है, तब जाकर हमला होता है।
