Pakistan News: पाकिस्तान जहां जाता है वहां पानी का रोना रोता है, हालांकि उसके इस रोने पर शायद ही किसी देश ने ध्यान दिया हो, अब पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने एक बार फिर से इसका रोना रोया है, इस बार शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की बैठक में उन्होंने यह मुद्दा उठाया। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने पानी को राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल करने के लिए नहीं कहा। उन्होंने कहा कि पानी इस पूरे क्षेत्र की जीवन रेखा है और इसका इस्तेमाल किसी भी सूरत में राजनीतिक दबाव बनाने के लिए नहीं किया जाना चाहिए।
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ (फोटो- PTI)
"पानी पर अंतरराष्ट्रीय समझौतों का हो पूरी तरह पालन"
शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के राष्ट्राध्यक्षों की बैठक को संबोधित करते हुए पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने कहा कि वैश्विक और द्विपक्षीय समझौतों को उनकी मूल भावना और शर्तों के अनुसार पूरी तरह लागू किया जाना चाहिए।
शहबाज शरीफ का बयान ने कहा, “राजनीतिक उद्देश्यों या दबाव के लिए पानी को हथियार बनाना पूरी तरह से अस्वीकार्य है। पानी इस क्षेत्र की भावी पीढ़ियों के अस्तित्व और भविष्य के लिए बेहद जरूरी है।”
भारत बंद कर चुका है पानी
शरीफ का यह बयान भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty) को लेकर जारी तनातनी के बीच आया है। पाकिस्तान लगातार यह रुख अपनाता रहा है कि साझा जल संसाधनों का राजनीतिकरण नहीं किया जा सकता। भारत ने पहलगाम आतंकी हमले के बाद सिंधु जल संधि को सस्पेंड कर दिया है। भारत ने साफ-साफ कहा है कि जबतक पाकिस्तान आतंकवाद को खत्म नहीं करता है, तबतक सिंधू समझौता निलंबित रहेगा। जिसके बाद से पाकिस्तान में पानी की किल्लत हो रखी है।
दक्षिण एशिया के भविष्य के लिए जल सुरक्षा जरूरी
अपने संबोधन के दौरान शहबाज शरीफ ने क्षेत्रीय शांति और सहयोग पर जोर देते हुए कहा कि जब तक क्षेत्र में स्थायी शांति और परस्पर सहयोग नहीं होगा, तब तक दक्षिण एशिया अपनी पूरी क्षमता का इस्तेमाल नहीं कर पाएगा। पाकिस्तान का मानना है कि साझा जल संसाधनों से जुड़े सभी विवादों का समाधान अंतरराष्ट्रीय कानूनों और तय तंत्रों के तहत ही होना चाहिए। उन्होंने अंत में दोहराया कि अंतरराष्ट्रीय संधियों का सम्मान किया जाना चाहिए ताकि क्षेत्र की आने वाली पीढ़ियों के लिए जीवन और स्थिरता की गारंटी दी जा सके।
पीएम मोदी ने आतंकवाद पर लताड़ा
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को पाकिस्तान को लताड़ते हुए कहा कि शंघाई सहयोग संगठन को आतंकवाद के पूरे तंत्र को खत्म करने और उसे मिलने वाली वित्तीय मदद रोकने के लिए एकजुट होकर काम करना होगा तथा आतंकवाद से निपटने में दोहरे मानदंडों के लिए कोई जगह नहीं हो सकती। मोदी ने इस बात पर भी जोर दिया कि संपर्क बढ़ाने वाली परियोजनाओं में सभी देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान किया जाना चाहिए। उनकी इस टिप्पणी को चीन के ’बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव’ की ओर परोक्ष संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
