अमेरिकी सीनेट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सैन्य अधिकारों को सीमित करने की दिशा में एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया गया है। मंगलवार को अमेरिकी सीनेट ने एक ऐसा प्रस्ताव पास किया है जो राष्ट्रपति को संसद (कांग्रेस) की मंजूरी के बिना ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई करने से रोकता है। यह प्रस्ताव 50-48 मतों से पारित हुआ। इसके पक्ष में कुछ रिपब्लिकन सांसदों ने भी डेमोक्रेट्स का साथ दिया। इस फैसले को ट्रंप प्रशासन की सैन्य शक्तियों पर एक बड़ा झटका माना जा रहा है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (फाइल फोटो)
CNN के अनुसार, सीनेट में इस प्रस्ताव के पक्ष में 50 और विरोध में 48 वोट डाले गए। दलबदल का खेल: ट्रंप की ही रिपब्लिकन पार्टी के चार सांसदों (रैंड पॉल, सुसान कोलिन्स, लिसा मुर्कोव्स्की और बिल कैसीडी) ने विपक्ष (डेमोक्रेट्स) के साथ मिलकर इस प्रस्ताव का समर्थन किया। वहीं डेमोक्रेटिक पार्टी के सीनेटर जॉन फेटरमैन ने इसके खिलाफ वोट डाला।
क्या है इस प्रस्ताव (Resolution) का मतलब?
यह प्रस्ताव राष्ट्रपति को निर्देश देता है कि वे अमेरिकी सेना को ईरान के साथ किसी भी तरह के सैन्य टकराव या युद्ध जैसी स्थिति से दूर रखें। हाल के हफ्तों में रिपब्लिकन और डेमोक्रेट के सांसदों में इस बात को लेकर चिंता बढ़ रही थी कि मिडिल ईस्ट में तनाव और अधिक न भड़क जाए, इसलिए वे राष्ट्रपति की युद्ध घोषित करने की शक्तियों पर अंकुश लगाना चाहते हैं।
हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में पहले ही पास हो चुका प्रस्ताव
सीनेट से पहले यह प्रस्ताव अमेरिकी संसद के निचले सदन (House of Representatives) में भी 215-208 वोट से पास हो चुका है। उस मतदान के बाद राष्ट्रपति ट्रंप की कड़ी प्रतिक्रिया सामने आई। उन्होंने'ट्रुथ सोशल' पर इस प्रस्ताव का समर्थन करने वाले सांसदों की तीखी आलोचना की। उन्होंने इन सांसदों को "दिखावा करने वाला" (Grandstanders) और उनके इस कदम को "अदेशभक्तिपूर्ण" (Unpatriotic) करार दिया।
सीएनएन के अनुसार, व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने इस प्रस्ताव के महत्व को खारिज करते हुए कहा कि यह सिर्फ एक समवर्ती प्रस्ताव (Concurrent Resolution) है, इसलिए इस पर राष्ट्रपति के हस्ताक्षर की जरूरत नहीं होती और न ही इसका कोई कानूनी महत्व (Force of Law) है। व्हाइट हाउस का कहना है कि अमेरिकी सेना को हटाने का यह निर्देश वैसे भी बेतुका है क्योंकि 7 अप्रैल को हुए युद्धविराम (Ceasefire) के बाद से ईरान के साथ कोई सैन्य टकराव चल ही नहीं रहा है।
भले ही व्हाइट हाउस इसे प्रतीकात्मक बता रहा हो, लेकिन विपक्ष (डेमोक्रेट्स) के सलाहकारों का मानना है कि यह प्रस्ताव बाध्यकारी है। अगर भविष्य में राष्ट्रपति ट्रंप ने कांग्रेस की मर्जी के खिलाफ ईरान पर कोई सैन्य फैसला लिया, तो यह कानूनी मामला बन सकता है। (Legal Battle) में बदल सकता है। सीनेट में यह मतदान ऐसे समय में हुआ, जब ट्रंप प्रशासन ईरान के साथ बड़े शांति समझौते की दिशा में राजनयिक पहल को आगे बढ़ा रहा है और क्षेत्रीय तनाव को कम करने के लिए बातचीत पर जोर दे रहा है।
