US Iran War Pickaxe Mountain Nuclear Strike: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के बीच, पूर्व फॉक्स न्यूज होस्ट टकर कार्लसन और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के करीबी के बयानों ने वैश्विक स्तर पर परमाणु टकराव (Nuclear Confrontation) की आशंकाओं को गहरा कर दिया है। चर्चा का मुख्य केंद्र ईरान के इस्फहान (Isfahan) प्रांत में स्थित 'पिकेक्स माउंटेन' (Pickaxe Mountain) है, जो जमीन से सैकड़ों फीट गहराई में बना एक गुप्त भूमिगत परमाणु केंद्र माना जाता है।
अमेरिका के परमाणु हमलों की हो रही चर्चा, क्या ईरान पर हुआ हमला तो भारत तक भी आएगी आंच?
India Today की रिपोर्ट के मुताबिक, दावा किया जा रहा है कि इस सुदृढ़ और मजबूत बंकर को केवल सामरिक परमाणु हथियारों (Tactical Nuclear Weapons / B61-11) के जरिए ही नष्ट किया जा सकता है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि यदि अमेरिका ऐसा कोई कदम उठाता है, तो क्या इसका रेडियोधर्मी असर भारत और पड़ोसी देशों तक पहुंच सकता है?
क्या है ईरान का 'पिकेक्स माउंटेन'?
अत्यधिक गहराई में स्थित बंकर: पिकेक्स माउंटेन ईरान के नतांज (Natanz) परमाणु परिसर के पास स्थित है। यह केंद्र ठोस ग्रेनाइट चट्टानों के नीचे लगभग 328 फीट (100 मीटर से अधिक) गहराई में निर्मित है।
पारंपरिक हथियारों की सीमा: अमेरिका के सबसे शक्तिशाली पारंपरिक बंकर-बस्टर बम GBU-57 (Massive Ordnance Penetrator) भी अधिकतम 60 फीट तक ही गहराई में जा सकते हैं। यही वजह है कि विशेषज्ञों का मानना है कि इस ठिकाने को पूरी तरह नष्ट करने के लिए केवल परमाणु हथियारों का ही विकल्प बचता है।
सामरिक महत्व: खुफिया एजेंसियों का अनुमान है कि ईरान ने अपने संवर्धित यूरेनियम (Enriched Uranium) का एक बड़ा हिस्सा इसी जगह सुरक्षित रखा है।
क्या भारत तक पहुंच सकता है रेडियोधर्मी रेडिएशन?
पिकेक्स माउंटेन भारत की सीमा से लगभग 2,500 किलोमीटर दूर है। भू-राजनीतिक विशेषज्ञ मारियो नावफाल (Mario Nawfal) और रक्षा विशेषज्ञ संदीप उन्नीथन (Sandeep Unnithan) के विश्लेषण के अनुसार:
पाकिस्तान और अफगानिस्तान सबसे अधिक प्रभावित: यदि अमेरिका पिकेक्स माउंटेन पर परमाणु धमाका करता है और हवाएं पूर्व दिशा की ओर चलती हैं, तो सबसे ज्यादा असर अफगानिस्तान और पाकिस्तान (विशेषकर उत्तरी व पश्चिमी क्षेत्रों) पर पड़ेगा।
भारत पर प्रभाव: हवा की दिशा और गति के आधार पर रेडियोधर्मी कण उत्तर-पश्चिम भारत (पंजाब, राजस्थान, जम्मू-कश्मीर और गुजरात) तक पहुंच सकते हैं। हालांकि, दूरी के कारण रेडिएशन की सांद्रता बेहद कम यानी 'ट्रेस लेवल्स' (Minutest Quantities) तक सीमित और अत्यधिक पतली (Diluted) हो जाएगी।
वर्षा का प्रभाव: यदि रेडिएशन के बादल गुजरने के समय बारिश होती है, तो कुछ सीमित इलाकों में स्थानीय स्तर पर रेडियोधर्मी कणों का जमाव (Hotspots) देखा जा सकता है।
तीसरा विश्व युद्ध (World War III) शुरू हो सकता है
टकर कार्लसन के दावों पर उठे सवाल
टकर कार्लसन ने दावा किया था कि इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के दबाव में ट्रंप प्रशासन कुछ ही दिनों में पिकेक्स माउंटेन पर परमाणु हमला कर सकता है, जिससे तीसरा विश्व युद्ध (World War III) शुरू हो सकता है।
हालांकि, इन दावों को सोशल मीडिया और रक्षा विशेषज्ञों द्वारा अतिरंजित और निराधार बताया गया है। राष्ट्रपति ट्रंप ने खुद 'न्यूजमैक्स' को दिए एक साक्षात्कार में कहा था: 'मुझे परमाणु हथियारों का इस्तेमाल करने की जरूरत नहीं पड़ेगी।'
भू-राजनीतिक और सामरिक परिणाम
मेजर जनरल एसबी अस्थाना (रिटायर) के अनुसार, ईरान पर किसी भी तरह का परमाणु हमला न केवल क्षेत्र के लिए बल्कि पूरे विश्व के लिए विनाशकारी सिद्ध होगा:
वैश्विक संघर्ष का खतरा: यह कदम रूस को यूक्रेन युद्ध में बड़े कदम उठाने का मौका दे सकता है।
ऊर्जा और प्रवासियों पर असर: मध्य पूर्व में तनाव बढ़ने से भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर असर पड़ेगा और कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं।
