US Iran War: अमेरिका का ईरान के खिलाफ 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' सैन्य ऑपरेशन जारी है। ईरान के दक्षिणी हिस्से के मिनाब स्कूल पर एक मिसाइल गिरी थी, जिसमें 168 से 180 लोगों की मौत हुई थी और मरने वालों में ज्यादातर बच्चियां और टीचर्स थीं।
ईरान में मिसाइली हमले में मारे गए छात्रों के परिजनों की मदद के लिए आगे आया चीन।
मिसाइल हमले में छात्रों की मौत के बाद चीन ने पीड़ित परिवारों की मदद का ऐलान किया है। चीन की सरकारी संस्था रेड क्रॉस सोसाइटी ऑफ चीन (Red Cross Society of China) ने कहा है कि वह 2 लाख अमेरिकी डॉलर (लगभग 1.6 करोड़ रुपये) की सहायता राशि उपलब्ध कराएगी।
यह राशि ईरान की राहत संस्था ईरान रेड क्रॉस सोसाइटी (Iranian Red Crescent Society) के माध्यम से उन माता-पिता तक पहुंचाई जाएगी, जिनके बच्चे इस हमले में मारे गए हैं। चीन सरकार के प्रवक्ता ने बताया कि युद्ध के दौरान स्कूलों पर हमला करना और बच्चों को नुकसान पहुंचाना अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का गंभीर उल्लंघन है।
यह अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का उल्लंघन: चीन
उन्होंने कहा कि इस तरह के हमले मानवता और नैतिकता की सीमाओं को पार करते हैं और इन्हें किसी भी हाल में स्वीकार नहीं किया जा सकता। चीन ने हमले में मारे गए छात्रों के प्रति शोक व्यक्त किया और पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना जताई है।
चीन के विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया पर भी कहा कि स्कूलों और बच्चों पर हमला करना अस्वीकार्य है और यह अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून तथा मानवता की भावना के खिलाफ है।
ईरान ने अमेरिका पर क्या लगाया आरोप?
ईरान का आरोप है कि अमेरिका और इजरायल की मिसाइलों ने जानबूझकर नागरिक ठिकानों और स्कूलों को निशाना बनाया है। जब अमेरिकी शजरह तैय्यबेह गर्ल्स स्कूल पर जब हमला हुआ, तब वहां क्लास चल रही थीं। पलक झपकते ही स्कूल की इमारत खंडहर बन गई और मासूम बच्चियों की चीखें धुएं में गुम हो गईं।
