US Iran War: पश्चिम एशिया में बढ़ते भीषण सैन्य तनाव के बीच व्हाइट हाउस ने एक बेहद चौंकाने वाला दावा किया है। वाशिंगटन में आयोजित एक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलीन लेविट ने कहा कि अमेरिकी सेना द्वारा पिछले कई दिनों से ईरान के ठिकानों पर की जा रही लगातार बमबारी के बावजूद, तेहरान अभी भी संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ बातचीत में लगा हुआ है। ईरान ने वाशिंगटन के साथ एक नया समझौता करने की इच्छा व्यक्त की है।
प्रेस ब्रीफिंग के दौरान व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव ने दी जानकारी (फाइल फोटो | AP)
कैरोलीन लेविट ने पत्रकारों से कहा, "ईरान बहुत हद तक संयुक्त राज्य अमेरिका से बात करना जारी रखे हुए है और यह जता रहा है कि वह हमारे साथ एक डील करना चाहता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि वे अमेरिकी सेना की तरफ से किए जा रहे विनाशकारी हमलों की मार झेल रहे हैं।"
क्यों हो रहे हैं ईरान पर ताबड़तोड़ हमले?
व्हाइट हाउस के अनुसार, दोनों देशों के बीच पश्चिम एशिया में दुश्मनी को समाप्त करने के लिए एक 14-सूत्रीय समझौता ज्ञापन (MoU) हुआ था। ईरान ने इस समझौते का उल्लंघन किया है, जिसके कारण अमेरिका को यह सैन्य कदम उठाना पड़ा। लेविट ने स्पष्ट किया कि हालिया अमेरिकी हवाई हमले स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले कमर्शियल जहाजों पर ईरानी हमलों के जवाब में किए गए हैं। समझौते के तहत ईरान को इस रणनीतिक जलमार्ग से गुजरने वाले व्यापारिक जहाजों पर गोलीबारी नहीं करनी थी, लेकिन उसने ऐसा करने का आत्मघाती फैसला लिया। प्रेस सचिव ने चेतावनी देते हुए कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस महत्वपूर्ण जलमार्ग में वाणिज्यिक नौवहन पर होने वाले आतंकवादी हमलों को कतई बर्दाश्त नहीं करेंगे और ईरान को इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ रही है।
टाइम्स नाउ नवभारत पर यह भी पढ़ें- ईरान पर अमेरिका ने लगातार छठी रात बरसाए बम, बंदर अब्बास और बुशहर में भीषण धमाकों से मची तबाही
ऑपरेशन एपिक फ्यूरी और अमेरिका की महा-नाकाबंदी
यह विवाद तब और गहरा गया जब गुरुवार रात को लगातार छठी रात भी ईरान पर अमेरिकी हमले जारी रहे। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, इन हमलों में ईरान की उन सैन्य क्षमताओं को निशाना बनाया जा रहा है जिनका इस्तेमाल स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों को धमकाने के लिए किया जाता था। व्हाइट हाउस ने यह भी साफ किया कि ईरान पर अमेरिकी प्रतिबंधों के तहत स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में एक सख्त नाकाबंदी लागू कर दी गई है। यह नाकाबंदी केवल उन जहाजों पर लागू होती है जो ईरानी बंदरगाहों पर आ रहे हैं या वहां से जा रहे हैं। अन्य कमर्शियल जहाजों के लिए यह समुद्री रास्ता खुला हुआ है।
