ईरान के साथ युद्ध अमेरिका को पड़ा भारी, मिसाइल भंडार में भारी कमी, THAAD से लेकर पैट्रियट तक...संकट ही संकट

Iran War: इस वर्ष की शुरुआत में पेंटागन ने मिसाइल उत्पादन बढ़ाने में मदद करने वाले कई अनुबंधों पर हस्ताक्षर किए, लेकिन CSIS विशेषज्ञों के अनुसार, इन प्रणालियों को बदलने की डिलीवरी की समय सीमा तीन से पांच साल है।

US Missiles: ईरान के साथ युद्ध अमेरिका को कितना भारी पड़ा है ये धीरे-धीरे सामने आ रहा है। अमेरिकी मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के साथ युद्ध के दौरान देश के मिसाइल भंडार पर भारी दबाव पड़ा है। विशेषज्ञों और रक्षा विभाग के हालिया आंतरिक भंडार आकलन से परिचित तीन लोगों के अनुसार, ईरान के साथ युद्ध के दौरान अमेरिकी मिसाइल भंडार में काफी कमी आई है। आने वाले कुछ वर्षों में किसी भी संघर्ष की स्थिति में गोला-बारूद की कमी का निकट भविष्य का जोखिम पैदा कर दिया है।

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