थाईलैंड की संवैधानिक अदालत ने शुक्रवार को देश की प्रधानमंत्री पैतोंगतार्न शिनावात्रा को उनके पद से बर्खास्त कर दिया। अदालत ने पाया कि उन्होंने कंबोडिया के सीनेट अध्यक्ष हुन सेन के साथ फोन पर हुई बातचीत में संवैधानिक नैतिकता के नियमों का उल्लंघन किया है। इस फैसले के बाद पैतोंगतार्न तुरंत ही अपनी लगभग एक साल तक संभाली गई प्रधानमंत्री पद की नौकरी से हट गईं।
कोर्ट ने थाईलैंड की प्रधानमंत्री पैटोंगटार्न शिनावात्रा को बर्खास्त किया (फोटो- ap)
पैतोंगतार्न पहले ही हो चुकी थीं निलंबित
पैतोंगतार्न को 1 जुलाई को उनके पद से निलंबित कर दिया गया था, जब अदालत ने उनके खिलाफ मामले की सुनवाई की अनुमति दी थी। इस दौरान उप-प्रधानमंत्री फुमथम वेचायाचाई ने उनकी जिम्मेदारियां संभाल ली थीं।
फोन कॉल लीक
यह विवाद 15 जून को तब शुरू हुआ, जब पैतोंगतार्न की कंबोडिया के सीनेट अध्यक्ष हुन सेन के साथ हुई बातचीत का रिकॉर्ड लीक हो गया। इस बातचीत का मकसद दोनों देशों के बीच सीमा विवाद को लेकर तनाव कम करना था। हालांकि, थाईलैंड में इस बातचीत को लेकर गहरा रोष फैल गया, क्योंकि पैतोंगतार्न ने राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मसले पर ज़रूरत से ज़्यादा दोस्ताना रवैया दिखाया और एक थाई सेना जनरल की आलोचना की। इस कॉल का ऑडियो हुन सेन द्वारा ऑनलाइन लीक किया गया था, जो 38 वर्षों तक कंबोडिया के प्रधानमंत्री रहे, जब तक कि उनके बेटे हुन मानेट ने 2023 में यह पद नहीं संभाल लिया। यह फोन कॉल ऐसे समय में हुई जब मई में विवादित क्षेत्र में हिंसा की एक संक्षिप्त घटना में एक कंबोडियाई सैनिक के मारे जाने के बाद सीमा पर लंबे समय से चल रहा तनाव बढ़ गया। जून के अंत में, दोनों देशों के बीच पांच दिनों तक युद्ध चला, जिसमें दर्जनों लोग मारे गए और 2,60,000 से अधिक लोग विस्थापित हुए।
थाईलैंड में राजनीतिक स्थिरता
इस फैसले ने थाईलैंड की राजनीतिक स्थिति को और जटिल बना दिया है और देश में नए राजनीतिक परिवर्तनों की संभावना बढ़ा दी है। प्रधानमंत्री पद से हटने के बाद अब देश में राजनीतिक नेतृत्व के लिए नए विकल्प तलाशने होंगे, जबकि सीमापार रिश्तों को लेकर भी नई रणनीतियों की आवश्यकता होगी।
