Hormuz Crisis Deepen: अमेरिका और ईरान के बीच जंग का आखाड़ा बने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर दुनियाभर की निगाहें टिकी हुई हैं। ईरान ने होर्मुज के रास्तों पर बारूदी सुरंगे बिछाई हुई हैं, जिसने अमेरिकी की नीदें हराम की हुई हैं। अमेरिका ने तेल आपूर्ति के अहम समुद्री मार्ग में सुरक्षित नौवहर सुनिश्चित करने के लिए कई देशों से मदद की गुहार लगाई है। इसको लेकर, जापान और जर्मनी गंभीरता से विचार कर रहे हैं।
होर्मुज से बारूदी सुरंगे हटाने की तैयारियां तेज (फोटो साभार: AI)
जापान कर रहा विचार
जापान सरकार और सत्तारूढ़ दलों ने होर्मुज में समुद्री आत्मरक्षा बल (MSDF) के माइंसवीपर जहाज भेजने की संभावना पर गंभीरता से विचार शुरू कर दिया है। सत्तारूढ़ लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी की नीति अनुसंधान परिषद के अध्यक्ष ताकायुकी कोबायाशी ने प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची को सिफारिशें सौंपी हैं। इसमें कहा गया कि अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष समाप्त होने के बाद सरकार को माइंसवीपर भेजने पर विचार करना चाहिए।
इस पर, ताकाइची ने जवाब देते हुए कहा कि उनकी सरकार इस मुद्दे पर पार्टी जैसी ही सोच रखती है। उन्होंने कहा, ''हम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी की रक्षा करेंगे।'' जापान के सेल्फ-डिफेंस फोर्स कानून के तहत युद्ध खत्म होने के बाद समुद्र में बिछाई गई बारूदी सुरंगों को हटाने के लिए माइंसवीपर भेजे जा सकते हैं।
हालांकि, जापान के रक्षा मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा, ''हमें इस बात की जानकारी नहीं है कि होर्मुज में किस तरह की सुरंगें बिछाई गई हैं। ऐसे में माइंसवीपर आसानी से नहीं भेजे जा सकते हैं।''
होर्मुज मिशन में उतरने को जर्मनी तैयार
जर्मनी होर्मुज में माइंसवीपर जहाजों की तैनाती की योजना बना रहा है। जर्मनी के रक्षा मंत्री बोरिस पिस्टोरियस ने कहा कि उनका देश माइंसवीपर जहाजों को भूमध्यसागर में तैनात करने की योजना बना रहा है, जिन्हें बाद में होर्मुज भेजा जा सकता है।
बोरिस पिस्टोरियस ने शनिवार को जर्मन अखबार राइनिशे पोस्ट से कहा, ''हम एक माइंसवीपर जहाज को भूमध्यसागर में तैनात करेंगे और उसके साथ एक कमांड एवं सप्लाई जहाज भी भेजेंगे।'' हालांकि, उन्होंने यह नहीं बताया कि ये जहाज कब रवाना होंगे।
बोरिस पिस्टोरियस ने कहा कि अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच संघर्ष समाप्त होने के बाद जर्मन माइंसवीपर जहाजों को होर्मुज में तैनात किया जा सकता है, लेकिन इसके लिए जर्मनी की संसद की मंजूरी जरूरी होगी। उन्होंने कहा, ''समय बचाने के लिए हमने जर्मन इकाइयों के एक हिस्से को पहले ही भूमध्यसागर भेजने का फैसला किया है, ताकि मंजूरी मिलते ही आगे कोई और देरी न हो।''
