संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 81वें सत्र को संबोधित करते हुए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच का इस्तेमाल भारत के खिलाफ बयानबाजी के लिए किया। शुक्रवार (स्थानीय समयानुसार) अपने संबोधन में शहबाज शरीफ ने न केवल कश्मीर का मुद्दा उठाया, बल्कि भारत द्वारा सिंधु जल संधि को निलंबित किए जाने पर आपत्ति जताते हुए इसे "युद्ध की कार्रवाई" करार देने की धमकी दी।
संयुक्त राष्ट्र महासभा में बोलते पाकिस्तानी पीएम
कश्मीर मुद्दे पर जनमत संग्रह और मानवाधिकारों का रोना
संयुक्त राष्ट्र के मंच से बोलते हुए शहबाज शरीफ ने दावा किया कि कश्मीरी जनता दशकों से संयुक्त राष्ट्र के तत्वावधान में "स्वतंत्र और निष्पक्ष जनमत संग्रह" के अपने अधिकार का इंतजार कर रही है। शरीफ ने भारत पर आरोप लगाते हुए कहा, "आठ दशकों से कश्मीरी लोग संयुक्त राष्ट्र के वादों के पूरा होने की राह देख रहे हैं। पीढ़ियों ने अवैध कब्जे, मनमानी गिरफ्तारियों, बिना मुकदमे हत्याओं, यौन हिंसा और सामूहिक दंड की यातनाएं झेली हैं।" पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि जम्मू और कश्मीर में जनसांख्यिकीय बदलाव करके इसके कानूनी दर्जे को बदलने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान कश्मीरी जनता को उनके स्वयं के निर्णय के अधिकार मिलने तक कूटनीतिक, राजनीतिक और नैतिक समर्थन देना जारी रखेगा। शरीफ ने दोहराया कि कश्मीर हमेशा से पाकिस्तान की 'जगुलर वेन' रहा है और रहेगा।
सिंधु जल संधि पर भारत को 'युद्ध' की गीदड़भभकी
कश्मीर के साथ-साथ शहबाज शरीफ ने सिंधु जल संधि का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। भारत द्वारा इस संधि को स्थगित किए जाने का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि सिंधु नदी का पानी पाकिस्तान और पूरे क्षेत्र के लिए जीवन रेखा है। शरीफ ने कहा, "भारत का इस मौजूदा संधि को निलंबित करने का एकतरफा फैसला पूरी तरह से कानूनी आधार से परे है। अंतरराष्ट्रीय अदालत और यूएन विशेषज्ञों ने भी भारत के दावों और कार्रवाइयों को खारिज किया है।"भारत को चेतावनी देते हुए उन्होंने आगे कहा कि "पानी को कभी हथियार नहीं बनाया जाना चाहिए। नदियां देशों को पोषण देने के लिए होती हैं, उन्हें बांटने के लिए नहीं। इसलिए, पाकिस्तान के हिस्से के पानी को रोकने, बाधित करने या उसका रुख मोड़ने के किसी भी प्रयास को 'युद्ध की कार्रवाई' माना जाएगा।"
पहलगाम हमले के बाद भारत ने उठाया था सख्त कदम
गौरतलब है कि 1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुई सिंधु जल संधि के तहत दोनों देशों के बीच नदियों के पानी का बंटवारा तय हुआ था। हालांकि, जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के बाद भारत ने सीमा पार आतंकवाद पर कड़ा रुख अपनाते हुए इस ऐतिहासिक संधि को निलंबित करने का कड़ा फैसला लिया था। भारत का स्पष्ट रुख रहा है कि "रक्त और पानी एक साथ नहीं बह सकते।"
पाकिस्तान इस फैसले के बाद से ही अंतरराष्ट्रीय मंचों पर वैश्विक समर्थन हासिल करने की कोशिश में लगा हुआ है, लेकिन भारत ने हमेशा साफ किया है कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और आतंकवाद और समझौते एक साथ नहीं चल सकते।
