पीएम मोदी नीदरलैंड का दौरा पूर्ण कर स्वीडन के लिए रवाना हो गए हैं। इस मौके पर नीदरलैंड्स के प्रधानमंत्री रॉब जेटेन ने शिफोल हवाई अड्डे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विदाई दी। यहां से विदा होने से पहले पीएम मोदी ने अपने डच समकक्ष रॉब जेटेन के साथ विश्व प्रसिद्ध अफ्सलाउटडाइक डैम का दौरा किया। इस दौरान भारत और नीदरलैंड के बीच जल प्रबंधन, बाढ़ नियंत्रण और जलवायु अनुकूल बुनियादी ढांचे को लेकर सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई।
पीएम मोदी ने किया अफ्सलाउटडाइक बांध का किया दौरा। (फोटो- PTI)
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जताया आभार
नीदरलैंड से विदाई को लेकर प्रधानमंत्री मोदी ने ट्वीट कर शानदार मेजबानी के लिए प्रधानमंत्री रॉब जेटेन का आभार जताया। उन्होंने एक वीडियो में यात्रा की झलकियां साझा करते हुए लिखा, 'मेरी नीदरलैंड्स यात्रा ने भारत-नीदरलैंड्स संबंधों को नई गति प्रदान की है। हमारे संबंधों को रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक ले जाने से लेकर जल संसाधन, सेमीकंडक्टर, नवाचार, रक्षा, स्थिरता और गतिशीलता के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने तक, हमने भविष्य के लिए एक महत्वाकांक्षी रोडमैप तैयार किया है। मैं प्रधानमंत्री रॉब जेटेन का हार्दिक आतिथ्य सत्कार और हवाई अड्डे पर आकर विदाई देने के लिए उनका आभार व्यक्त करता हूं। मुझे विश्वास है कि आने वाले वर्षों में भारत और नीदरलैंड्स के बीच मित्रता और भी मजबूत होगी।'
पीएम मोदी ने किया अफ्सलाउटडाइक डैम का दौरा
प्रधानमंत्री मोदी ने भी अपने आधिकारिक एक्स अकाउंट पर कुछ तस्वीरें शेयर करते हुए लिखा कि जल प्रबंधन के क्षेत्र में नीदरलैंड ने अभूतपूर्व काम किया है और पूरी दुनिया इससे बहुत कुछ सीख सकती है। उन्होंने कहा कि भारत सिंचाई, बाढ़ सुरक्षा और अंतर्देशीय जलमार्ग नेटवर्क के विस्तार के लिए आधुनिक तकनीकों को अपनाने के लिए प्रतिबद्ध है।
पीएम मोदी। (फोटो-PTI)
वहीं, विदेश मंत्रालय ने पीएम मोदी के इस दौरे का वीडियो भी शेयर किया है। विदेश मंत्रालय ने अफ्सलाउटडाइक डैम को उत्कृष्टता और नवाचार का प्रतीक करार दिया। मंत्रालय ने कहा कि यह बांध जल प्रबंधन, बाढ़ से सुरक्षा और मीठे पानी के भंडारण के क्षेत्र में नीदरलैंड की इंजीनियरिंग क्षमता का शानदार उदाहरण है।
कल्पसर परियोजना पर भी चर्चा हुई
विदेश मंत्रालय ने कहा कि इस दौरे के दौरान गुजरात के महत्वाकांक्षी कल्पसर परियोजना पर भी चर्चा हुई। यह परियोजना खंभात की खाड़ी के पास एक विशाल मीठे पानी के जलाशय और बांध के निर्माण से जुड़ी है। माना जा रहा है कि इस परियोजना में डच विशेषज्ञता भारत के लिए बेहद उपयोगी साबित हो सकती है।
दोनों देशों के बीच बातचीत में जलवायु परिवर्तन से निपटने, जल तकनीक, टिकाऊ बुनियादी ढांचे और समुद्री सुरक्षा जैसे मुद्दों पर सहयोग बढ़ाने पर भी जोर दिया गया। विशेषज्ञों का मानना है कि नीदरलैंड की अत्याधुनिक जल प्रबंधन तकनीक भारत के कई तटीय और बाढ़ प्रभावित राज्यों के लिए मददगार हो सकती है।
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री मोदी शुक्रवार को नीदरलैंड पहुंचे थे। यह यात्रा उनके पांच देशों के दौरे का हिस्सा है,जिसमें स्वीडन, नॉर्वे और इटली और यूएई शामिल हैं। अब वे यहां से स्वीडन के प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टर्सन के निमंत्रण पर प्रधानमंत्री मोदी 17-18 मई को स्वीडन के गोथेनबर्ग की यात्रा के लिए रवाना हो गए हैं। इस दौरे का उद्देश्य व्यापार, प्रौद्योगिकी, हरित ऊर्जा और रणनीतिक साझेदारी जैसे क्षेत्रों में भारत के संबंधों को और मजबूत करना है।
