पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर (PoK) में पाकिस्तानी सेना और पुलिस के बढ़ते अत्याचारों व मानवाधिकार उल्लंघनों पर भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने कड़ा ऐतराज जताया है। विदेश मंत्रालय ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि वह PoK में जारी राज्य-प्रायोजित हिंसा और वहां से फैलाए जा रहे सीमा पार आतंकवाद पर तुरंत और सख्त संज्ञान ले। भारत ने एक बार फिर दोहराया कि संपूर्ण जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत का अभिन्न और अटूट हिस्सा थे, हैं और हमेशा रहेंगे।
PoJK में जारी जुल्म पर आंखें खोले दुनिया-भारत
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जायसवाल ने यह कड़ा रुख नई दिल्ली में आयोजित एक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान अपनाया। दरअसल, हाल ही में इस्लामाबाद में नॉर्वे के विदेश मंत्री एस्पेन बार्थ ईडे और पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशहाक डार के बीच हुई मुलाकात के बाद एक संयुक्त बयान जारी किया गया था, जिसमें कश्मीर का जिक्र हुआ था। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए जायसवाल ने साफ कहा कि दुनिया को अगर वास्तव में किसी मुद्दे पर चिंता जतानी चाहिए, तो वह अवैध रूप से कब्जाए गए PoK में आम नागरिकों पर हो रहे अत्याचार हैं।
PoJK में दशकों का सबसे बड़ा जन-आक्रोश
गौरतलब है कि मौजूदा समय में पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाला यह इलाका पिछले कई दशकों के सबसे भीषण नागरिक विरोध-प्रदर्शनों से गुजर रहा है। शुरुआत में बिजली की बढ़ती दरों और राशन जैसी बुनियादी चीजों की महंगाई के खिलाफ भड़का यह गुस्सा अब बड़े राजनीतिक सुधारों, पारदर्शिता और पाकिस्तानी सेना के कब्जे के खिलाफ एक जनांदोलन का रूप ले चुका है।
पाक प्रशासन के जुल्मों के खिलाफ लोगों ने दर्ज कराया अपना विरोध
सोशल मीडिया और 'संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी' (JAAC) द्वारा साझा किए जा रहे वीडियो में देखा जा सकता है कि किस तरह पाकिस्तानी सुरक्षा बल निहत्थे नागरिकों पर सीधी गोलियां, लाठियां और आंसू गैस के गोले बरसा रहे हैं। PoK के कोटली जिले से आए वीडियो में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रही महिलाओं को पाकिस्तानी पुलिस की गोलीबारी से जान बचाकर भागते देखा गया। कल भी PoK के अलग-अलग हिस्सों में हजारों लोग सड़कों पर उतरे और पाक प्रशासन के जुल्मों के खिलाफ अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया।
