मक्कार पाकिस्तान का एक बार फिर दोहरा चेहरा सामने आया है। अगले महीने होने वाली वित्तीय कार्रवाई कार्यबल (FATF) की बैठक से पहले पाकिस्तान की संघीय जांच एजेंसी (FIA) ने मसूद अजहर को अपनी मोस्ट वांटेड आतंकियों की सूची यानी ‘रेड बुक’ में शामिल किया है। इतना ही नहीं, उसके बारे में सूचना देने पर 70 लाख रुपये तक के इनाम की घोषणा भी की गई है। पाकिस्तान ने ये कदम तब उठाया है जब आतंकवाद को लेकर उसपर चौतरफा दबाव है।
जैश का चीफ मसूद अजहर
गौरतलब है कि मसूद अजहर भारत में मोस्ट वांटेड आतंकी है। पाकिस्तान की संघीय जांच एजेंसी (एफआईए) ने उसे सबसे वांछित आतंकवादियों की "रेड बुक" में शामिल किया है। 1,804 मोस्ट वांटेड आतंकियों वाली इस सूची में अजहर का नाम 1480वें नंबर पर दर्ज है। भले ही कागजों पर पाकिस्तान भले ही उसे अपना मोस्ट वांटेड बता रहा है,लेकिन सवाल यही है कि अगर अजहर वाकई पाकिस्तान के लिए इतना बड़ा वांटेड आतंकी है, तो वह अब तक उसकी गिरफ्त से बाहर कैसे है?
पाकिस्तान में तीन आतंकी मामलों में वांछित
FIA की सूची के अनुसार मसूद अजहर पाकिस्तान में भी तीन मामलों में वांछित है। इनमें 3 दिसंबर 2020 को गुजरांवाला के काउंटर टेररिज्म डिपार्टमेंट थाने में दर्ज FIR-17/20, 9 मार्च 2020 को मुल्तान CTD थाने में दर्ज FIR-8/20 और 29 मार्च 2021 को लाहौर CTD थाने में दर्ज FIR-4/21 शामिल हैं। इन मामलों में पाकिस्तान के एंटी-टेररिज्म एक्ट की विभिन्न धाराएं लगाई गई हैं।
रेड बुक में साफ तौर पर लिखा है कि मसूद अजहर को पकड़वाने या उसकी सजा सुनिश्चित कराने वाली सूचना देने वाले को पाकिस्तान की संघीय या प्रांतीय सरकार की ओर से 70 लाख रुपये तक का इनाम दिया जाएगा।
भारत में कई बड़े आतंकी हमलों का आरोपी
मसूद अजहर जैश-ए-मोहम्मद का संस्थापक और प्रमुख है। भारत उसे संसद पर 2001 में हुए आतंकी हमले समेत कई आतंकवादी घटनाओं के मामलों में वांछित मानता है। भारत ने 2008 के मुंबई आतंकी हमलों के बाद पाकिस्तान से जिन 20 वांछित आतंकियों को सौंपने की मांग की थी, उनमें भी अजहर शामिल था। मुंबई हमले में लश्कर-ए-तैयबा के 10 आतंकियों ने 166 लोगों की हत्या की थी। भारत लंबे समय से पाकिस्तान पर मसूद अजहर को संरक्षण देने का आरोप लगाता रहा है। हालांकि, पाकिस्तान का दावा रहा है कि अजहर अफगानिस्तान भाग गया था। अफगानिस्तान की तालिबान सरकार इस दावे को खारिज कर चुकी है।
2026 की रेड बुक में 1480वें नंबर पर नाम
FIA की जानकारी के मुताबिक, मसूद अजहर का नाम पहली बार 2021 में रेड बुक में शामिल किया गया था। अब 2026 की अपडेटेड सूची में भी उसका नाम बरकरार है। इस सूची में उसे जैश-ए-मोहम्मद के प्रमुख के तौर पर दर्ज किया गया है। उसकी एंट्री की तारीख 31 दिसंबर 2021 बताई गई है और यह कार्रवाई पंजाब के गृह विभाग के अनुरोध पर की गई थी।
FATF बैठक से पहले सामने आई जानकारी
मसूद अजहर का नाम पाकिस्तान की मोस्ट वांटेड सूची में होने की जानकारी ऐसे समय सामने आई है जब फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) की अगली पूर्ण बैठक 26 से 30 अक्टूबर के बीच पेरिस में होनी है। FATF की बैठकों में देशों की मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकी वित्तपोषण रोकने की कोशिशों की समीक्षा की जाती है।
पाकिस्तान 2018 में FATF की बढ़ी हुई निगरानी वाली ‘ग्रे लिस्ट’ में शामिल हुआ था और 2022 तक इस सूची में रहा। इसके बाद पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट से बाहर कर दिया गया था। उसने 2018 और 2021 में तय किए गए दो FATF एक्शन प्लान के तहत मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकी वित्तपोषण से जुड़े नियमों को मजबूत करने और लक्षित वित्तीय प्रतिबंधों को लागू करने समेत कई कदम उठाए थे।
