महंगाई की करारी मार के बीच आर्थिक संकट से जूझते पाकिस्तान को तगड़ा झटका लगा है। इंटरनेशनल मॉनेट्री फंड (आईएमएफ) ने पड़ोसी मुल्क के सर्कुलर डेब्ट मैनेजमेंट प्लान (सीडीएमपी) को खारिज कर दिया है। आईएमएफ ने संशोधित सीडीएमपी को अव्यावहारिक बताया है और कहा है कि यह गलत आकलन पर आधारित है। दि न्यूज इंटरनेशनल रिपोर्ट के हवाले से समाचार एजेंसी एएनआई की खबर में बताया गया कि पाकिस्तान सरकार को अब अपनी पॉलिसी में फेरबदल करना पड़ेगा, ताकि उर्जा क्षेत्र में वह होने वाले नुकसान को रोक सके।
दरअसल, पाकिस्तान को आईएमएफ कार्यक्रम की बहाली की सख्त जरूरत है। ऐसा इसलिए, क्योंकि प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के नेतृत्व वाली सरकार अपने विदेशी मुद्रा भंडार को संभालने के लिए बाकी सभी विकल्प खो चुकी है। यही नहीं, बाकी देशों से फंडिंग प्रतिबद्धताएं भी आईएमएफ के पुनरुद्धार से जुड़ी हैं।रोचक बात है पस्त आर्थिक माली हालत के चलते पाकिस्तान आईएमएफ की चौखट पर 23 बार जाकर हाथ फैला चुका है।
इस बीच, डिफेंस एक्सपर्ट और कर्नल वीके थापर (रिटायर्ड) ने हमारे सहयोगी चैनल (अंग्रेजी) टाइम्स नाउ से गुरुवार (दो फरवरी, 2023) को कहा- पाकिस्तान को जितनी भी आर्थिक सहायता मिल रही है, वहां के सैन्य जर्नल्स की जेब में जा रही है। आप वहां के किसी भी शहर को देख लीजिए। वहां कोई दिक्कत नहीं है। वे मजे की जिंदगी जी रहे हैं। सड़कें भी अच्छी हैं। उनके पास शानदार बंगले हैं। पर उन लोगों के पास जो पैसे आ रहे हैं, वह उसे कमाते नहीं हैं। यह हर बार उन्हें अमेरिका से मिल जाता है और वे इसे निजी इस्तेमाल में ले आते हैं। ऐसा खासकर सेना के लोग करते हैं।
