पश्चिम एशिया और गल्फ क्षेत्र में बढ़ते तनाव को कम करने के लिए पाकिस्तान के थल सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर 24 अगस्त को ईरान के दौरे पर पहुंच रहे हैं। अमेरिका और ईरान के बीच बीते 17 जून को वर्चुअली हस्ताक्षरित हुआ 60 दिनों का अस्थायी शांति समझौता (MoU) इस हफ्ते बिना किसी ठोस नतीजे के समाप्त हो गया। शांति समझौते के नाकाम होने के बाद क्षेत्र में एक बार फिर बड़े सैन्य टकराव की आशंका गहरा गई है, जिसे टालने के लिए इस्लामाबाद अपने मध्यस्थता प्रयासों को फिर से तेज कर रहा है।
ट्रंप के कड़े रुख के बीच तेहरान पहुंचेंगे आसिम मुनीर (फाइल फोटो)
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माईल बगाई के अनुसार, जनरल मुनीर एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल के साथ तेहरान पहुंचे हैं, जहां वे ईरानी शीर्ष नेतृत्व के साथ द्विपक्षीय और क्षेत्रीय सुरक्षा मुद्दों पर गहन चर्चा करेंगे। पाकिस्तान इस शांति समझौते में एक गारंटर (गारंटी देने वाला) देश था, लेकिन जुलाई के मध्य में 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' (होर्मुज जलडमरूमध्य) में जहाजों पर हुए हमलों और अमेरिकी नाकेबंदी के बाद यह शांति वार्ता पटरी से उतर गई।
टाइम्स नाउ नवभारत पर यह भी पढ़ें: आतंकवाद से साइबर क्राइम तक...देश की सुरक्षा पर कल से मंथन, अमित शाह की अध्यक्षता में होगी दो दिवसीय बड़ी बैठक
ट्रंप की 'क्रशिंग' पाबंदियों का खतरा और होर्मुज का विवाद
यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर अब तक के सबसे कड़े और "तबाह करने वाले" (Crushing) आर्थिक प्रतिबंध लगाने की खुली चेतावनी दी है। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेट भी ईरान के खिलाफ ऐतिहासिक रूप से सबसे सख्त कदम उठाने का ऐलान कर चुके हैं। इस तनाव के केंद्र में 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' का समुद्री व्यापार मार्ग है, जहां से दुनिया की कुल ऊर्जा आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा गुजरता है।
ईरान के विदेश मंत्री क्या बोले?
ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने हालांकि इस शांति समझौते का बचाव करते हुए इसे देश को 'न युद्ध, न शांति' की स्थिति से बाहर निकालने का सबसे अच्छा रास्ता बताया था। वहीं, ईरान के विदेश मंत्री ने अमेरिकी पाबंदियों की धमकी को उसकी हताशा करार दिया है। इस पूरे गतिरोध के बीच, असीम मुनीर का यह दौरा गल्फ में युद्ध की आहट को रोकने और बातचीत के रास्ते दोबारा खोलने की एक अंतिम कूटनीतिक कोशिश माना जा रहा है।
