Nirav Modi Case: भगोड़े हीरा व्यापारी नीरव मोदी की प्रत्यर्पण अपील को फिर से खोलने की अनुमति मांगने वाली याचिका पर लंदन हाई कोर्ट में सुनवाई समाप्त हो गई है। भारत भेजे जाने से बचने के लिए नीरव मोदी ने नया पैंतरा आजमाया है। उसने कहा है कि भारत में जांच एजेंसियों द्वारा पूछताछ के दौरान उसे टॉर्चर किए जाने का वास्तविक खतरा है। रॉयल कोर्ट्स ऑफ जस्टिस में अपील की अध्यक्षता कर रहे लॉर्ड जेरेमी स्टुअर्ट-स्मिथ और जस्टिस रॉबर्ट जे ने मंगलवार को दिन भर चली सुनवाई के अंत में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।
नीरव मोदी का नया पैंतरा
पीएनबी ऋण घोटाले और मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप
स्टुअर्ट-स्मिथ ने दो दिनों तक चलने वाली सुनवाई के समय से पहले समाप्त होने पर कहा, यह मामला नीरव मोदी और भारत से आए भारतीय अधिकारियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। हम जल्दी ही फैसला सुनाएंगे। 54 वर्षीय व्यवसायी नीरव मोदी पर भारत में लगभग 2 अरब अमेरिकी डॉलर के पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) ऋण घोटाले में धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में मुकदमा चलाया जाना है। नीरव उत्तरी लंदन की पेंटनविले जेल से वीडियो लिंक के माध्यम से पेश हुआ था।
नीरव के वकीलों की दलील
उसके वकीलों ने संजय भंडारी के प्रत्यर्पण मामले का सहारा लिया। भंडारी रक्षा क्षेत्र के सलाहकार है जिस पर टैक्स चोरी और मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप था और जिसे पिछले साल मानवाधिकारों के आधार पर प्रत्यर्पण जमानत से रिहा कर दिया गया था। अदालत में भारतीय सरकार का प्रतिनिधित्व कर रही क्राउन प्रॉसिक्यूशन सर्विस (सीपीएस) ने उस मामले को दोबारा खोलने के आधारों का विरोध किया जिसमें लगभग छह साल पहले नीरव के प्रत्यर्पण का आदेश दिया गया था।
नीरव के बैरिस्टर एडवर्ड फिट्जगेराल्ड केसी ने तर्क दिया कि प्रत्यर्पण से भारत में पूछताछ के दौरान अमानवीय या अपमानजनक व्यवहार या यातना का वास्तविक खतरा है। उन्होंने भारत सरकार द्वारा दिए गए आश्वासनों को भी कमतर आंकने की कोशिश की और कहा कि ये आश्वासन हीरा व्यापारी के खिलाफ अतिरिक्त गैर-जमानती वारंट जारी होने की संभावना से उत्पन्न जोखिम से निपटने के लिए न तो पर्याप्त हैं और न ही विश्वसनीय। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके मुवक्किल को मुंबई की आर्थर रोड जेल से गुजरात ले जाया जा सकता है ताकि केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के अलावा अन्य एजेंसियां उनसे पूछताछ कर सकें।
भारत सरकार के वकील की दलील
सीपीएस की बैरिस्टर हेलेन मैल्कम केसी ने भारत की ओर से यह तर्क दिया कि नीरव का आवेदन न सिर्फ समय सीमा के बाद दायर किया गया है, बल्कि एक झूठे आधार पर भी आधारित है। उन्होंने अदालत से सामान्य समझ अपनाने की अपील की क्योंकि यह मामला पूरी तरह से असाधारण है और इसमें महत्वपूर्ण सुरक्षात्मक कारक मौजूद हैं जो यह सुनिश्चित करेंगे कि भारत सरकार द्वारा दिए गए आश्वासनों का उल्लंघन न हो - विशेष रूप से भारत और ब्रिटेन के बीच भविष्य की प्रत्यर्पण कार्यवाही पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की संभावना को देखते हुए। अदालती दस्तावेजों में कहा गया है, इस सुझाव के संबंध में कि आश्वासनों का गुप्त रूप से उल्लंघन किया जा सकता है, एनडीएम (नीरव दीपक मोदी) और उनके मामले की उच्च-प्रोफाइल प्रकृति इसे एक अवास्तविक प्रस्ताव बनाती है।
अगर इस सप्ताह की सुनवाई के बाद अपील की अनुमति नहीं दी जाती है, तो नीरव मोदी के भारत में मुकदमे से पहले मुंबई के आर्थर रोड जेल में प्रत्यर्पण का रास्ता साफ होने की उम्मीद है। भारत में नीरव मोदी के खिलाफ तीन प्रकार की आपराधिक कार्यवाही चल रही है– पीएनबी धोखाधड़ी का सीबीआई मामला, उस धोखाधड़ी से प्राप्त धन के कथित मनी लॉन्ड्रिंग से संबंधित ईडी मामला और सीबीआई कार्यवाही में साक्ष्य और गवाहों के साथ कथित हस्तक्षेप से संबंधित तीसरा आपराधिक मामला।
