Govt. formation in Israel: इजराइल में संसदीय चुनाव के लिए वोटों की गिनती पूरी हो गई है। हालांकि, 120 सदस्यों वाली नेसेट में किसी भी दल या गठबंधन को बहुमत नहीं मिला है। सरकार का गठन करने के लिए 61 सीटों की जरूरत है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतान्याहू की पार्टी लिकुड पार्टी 27 सीटों पर विजयी हुई है। लिकुड पार्टी की अगुवाई वाले गठबंधन के पास बहुमत से आठ सीटें कम यानी 53 सीटें हैं। दूसरे स्थान IDF के पूर्व चीफ गादी आइजेनकोट की पार्टी यशार है। इस चुनाव में यशार पार्टी 21 सीटों पर विजयी हुई है। इस बीच, रिपोर्ट यह भी आई है कि नेतन्याहू अपने प्रतिद्वंद्वी आइजेनकोट के साथ मिलकर सरकार बनाने की सोच रहे हैं।
इजराइल में बनी है त्रिशंकु संसद। तस्वीर-AI
कई विकल्पों पर विचार कर रही लिकुड पार्टी
इजराइल नेशनल न्यूज की रिपोर्ट में लिकुड पार्टी के अधिकारियों के हवाले से कहा गया है कि सरकार गठन में आने वाले अवरोधों को दूर करने के लिए पार्टी कई विकल्पों पर विचार कर रही है। इसमें आइजेनकोट के साथ मिलकर सरकार बनाने का विकल्प भी शामिल है। इस प्रस्ताव में नेतन्याहू और आइजनकोट के पीएम पद पर रहने का दो-दो साल का विकल्प शामिल है। इस विकल्प पर यदि सहमति बनी तो पहले दो साल तक नेतन्याहू पीएम रहेंगे।
एक-दूसरे पर तीखे हमले कर चुके हैं नेतन्याहू-आइजेनकोट
लिकुड पार्टी की कोशिश अल्ट्रा आर्थोडॉक्ट पार्टियों के बगैर राष्ट्रीय एकता वाली एक व्यापक सरकार के गठन की संभावना भी तलाशना है। लिकुड पार्टी चाहती है कि विपक्ष के सांसद अपनी पार्टी छोड़कर उनका समर्थन करें। हालांकि, इन प्रस्तावों पर अभी चर्चा चल रही है। आइजनकोट अथवा विपक्ष के अन्य नेता लिकुड पार्टी के इन प्रस्तावों पर क्या रुख अपनाएंगे, यह अभी अस्पष्ट है। आइजनकोट यदि लिकुड पार्टी के प्रस्ताव को यदि स्वीकार करते हैं तो इजराइल में यह एक बड़ी राजनीतिक घटना होगी। आइजेनकोट को नेतन्याहू का धुर विरोधी माना जाता है। चुनाव के दौरान दोनों नेताओं ने एक-दूसरे पर काफी तीखे हमले किए।
रोटेशन फॉर्मूले पर हो रहा विचार
नेतन्याहू के खेमे में जिन विकल्पों पर कथित तौर पर विचार किया जा रहा है, उनमें आइजेनकोट के साथ प्रधानमंत्री पद को दो-दो साल के लिए साझा करने का प्रस्ताव भी शामिल है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत बेंजामिन नेतन्याहू पहले दो साल तक प्रधानमंत्री पद पर बने रहेंगे। इसके बाद वह प्रधानमंत्री की कुर्सी पूर्व सैन्य प्रमुख आइजेनकोट को सौंप देंगे। इस तरह के समझौते से राजनीतिक गतिरोध खत्म करने और विरोधी गुटों को एक साझा सरकार में शामिल करने का रास्ता निकल सकता है।
सरकार नहीं बनी तो फिर होगा चुनाव?
आइजेनकोट चुनाव प्रचार के दौरान कई बार यह स्पष्ट कर चुके हैं कि नेतन्याहू को प्रधानमंत्री पद पर बने नहीं रहना चाहिए। संसद में बहुमत हासिल करने के लिए अरब नेतृत्व वाली पार्टियों पर निर्भर न रहने की उनकी जिद सरकार बनाने के उनके विकल्पों को और सीमित कर सकती है। ऐसे में पूर्व सैन्य प्रमुख आइजेनकोट के सामने मुश्किल विकल्प हैं। उन्हें या तो अपने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों के साथ सत्ता साझा करने के समझौते पर बातचीत करनी होगी, कोई वैकल्पिक गठबंधन तैयार करना होगा या फिर एक और चुनाव की तैयारी करनी होगी।
