Nepal Floods: नेपाल इन दिनों अचानक आई बाढ़ की मार झेल रहा है। बाढ़ और भूस्खलन जैसी आपदाओं से सड़कों, पुलों, स्कूलों और स्वास्थ्य केंद्रों को भारी नुकसान पहुंचा है। चारों तरफ महज मलबा ही दिखाई दे रहा है और दिखाई दे रहे हैं मदद करने वाले हाथ, जो लगातार मलबे में जिंदगियों की तलाश में जुटे हुए हैं। साथ ही, पड़ोसी देश भारत लगातार उपकरण और आवश्यक सामग्रियों की मदद भेज रहा है।
नेपाल में बाढ़ से त्राहिमाम
32 हजार से ज्यादा लोग प्रभावित
नेपाल में 26 अगस्त को अचानक आई विनाशकारी बाढ़ से अबतक 32,933 लोग प्रभावित हुए हैं। राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण ने शुक्रवार को बताया कि बाढ़ प्रभावित इलाकों से लगातार शव मिलने की वजह से मृतकों की संख्या बढ़कर 1,295 हो गई।
रिपोर्ट के मुताबिक, 26 अगस्त को नेपाल-तिब्बत सीमा के पास हिमस्खलन के बाद आई बाढ़ ने उत्तरी और मध्य नेपाल के कई कस्बों और गांवों में भारी तबाही मचाई। इस आपदा ने बड़े पैमाने पर जनजीवन को प्रभावित किया है। शुरुआती आकलन के अनुसार, बाढ़ से शैक्षणिक संस्थानों को भी काफी नुकसान पहुंचा है और इससे 6,500 से अधिक छात्र प्रभावित हुए हैं।
अस्पतालों और सड़कों को भारी नुकसान
बाढ़ से प्रभावित इलाकों में चार स्वास्थ्य केंद्र पूरी तरह तबाह हो गए, जबकि तीन अन्य स्वास्थ्य सुविधाओं को भी नुकसान पहुंचा है। बताया जा रहा है कि लगभग 55 किलोमीटर की सामान्य सड़कें बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुई हैं। इसके अलावा, सस्पेंशन ब्रिज और नॉर्मल ब्रिजों को भी नुकसान पहुंचा है। हालांकि, नेपाल सरकार ने स्पष्ट किया है कि नुकसान का विस्तृत आकलन अभी पूरा नहीं हुआ है।
रेस्क्यू ऑपरेशन को लेकर घिरी बालेन शाह सरकार
इस बीच, नेपाली कांग्रेस के नेताओं ने रेस्क्यू ऑपरेशन को लेकर सरकार की आलोचना की। प्रतिनिधि सभा के सदस्य केसी ने कहा कि बचाव और राहत कार्यों के समन्वय तथा आपदा के बाद की दीर्घकालिक योजना में गंभीर कमियां रही हैं। हालांकि, उन्होंने खोज एवं बचाव अभियान में नेपाल सेना, नेपाल पुलिस और सशस्त्र पुलिस बल की भूमिका की सराहना की। केसी ने दावा किया कि इस आपदा से 800 अरब रुपये से ज्यादा का नुकसान हुआ है।
