Nepal Flood Donations: नेपाल में हाल ही में आई अचानक बाढ़ और भीषण हिमस्खलन ने जो घाव दिए हैं, उन्हें भरने के लिए पूरा देश एक साथ खड़ा नजर आ रहा है। बुधवार को आई इस भयानक कुदरती आफत में 626 लोगों की जान चली गई और करीब 2,400 लोग अब भी लापता हैं। गांव के गांव, सड़कें, पुल और पनबिजली परियोजनाएं मलबे में तब्दील हो चुकी हैं। इस महाविनाश के बीच अब राहत और पुनर्निर्माण के लिए देश-विदेश से लोग दिल खोलकर आर्थिक मदद भेज रहे हैं।
नेपाल बाढ़ पीड़ितों के लिए खुला खजाना
प्रधानमंत्री आपदा राहत कोष में बीते महज तीन दिनों के भीतर 2.295 अरब रुपये (नेपाली रुपये) से अधिक का दान जमा हो चुका है। प्रधानमंत्री कार्यालय से मिली जानकारी के मुताबिक, मदद की यह रफ्तार बेहद भावुक करने वाली है। बुधवार दोपहर से लेकर बृहस्पतिवार आधी रात तक, यानी शुरुआती 36 घंटों के भीतर ही लोगों ने 1.91 अरब रुपये का योगदान दे दिया था। इसके बाद शुक्रवार को भी महज एक दिन में 38.55 करोड़ रुपये की अतिरिक्त सहायता राशि कोष में जमा हुई। दान की इस भारी आवक के साथ ही नेपाल के आपदा राहत कोष की कुल जमा राशि 2.17 अरब रुपये से सीधे छलांग लगाकर 4.09 अरब रुपये के आंकड़े को पार कर गई है।
सरकार ने इस पूरे फंड के प्रबंधन और पारदर्शी वितरण के लिए वित्त मंत्रालय को नोडल एजेंसी बनाया है। वित्त मंत्रालय के अनुसार, आम जनता और संगठन देश के 10 प्रमुख वाणिज्यिक बैंकों के विशेष खातों के माध्यम से अपना योगदान जमा कर सकते हैं। वहीं, एक करोड़ रुपये या उससे अधिक का बड़ा संस्थागत दान वित्त मंत्री स्वर्णिम वागले खुद व्यक्तिगत रूप से स्वीकार कर रहे हैं। इसके अलावा, छोटे दानदाता सीधे मंत्रालय जाकर भी नकद सहायता दे सकते हैं।
संकट के इस दौर में नेपाल का नेतृत्व भी पीछे नहीं है। शुक्रवार को हुई कैबिनेट बैठक में प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह और उनके पूरे मंत्रिमंडल ने अपना एक महीने का वेतन इस आपदा कोष में देने का बड़ा फैसला किया है। प्रशासन का कहना है कि जमा हुई इस रकम का इस्तेमाल बेघर हुए परिवारों को तुरंत राहत पहुंचाने और तबाह हुए बुनियादी ढांचे को फिर से खड़ा करने में किया जाएगा।
