जापान की लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (एलडीपी) की नेता साने ताकाइची के प्रधानमंत्री बनने की संभावनाओं पर अब सवाल उठने लगे हैं। यह स्थिति इसलिए उत्पन्न हुई है क्योंकि एलडीपी का लगभग 26 साल पुराना सत्तारूढ़ गठबंधन सहयोगी कोमेइटो के अलग होने से टूट गया। कोमेइटो का यह फैसला ताकाइची के प्रधानमंत्री बनने की राह में बाधा बन सकता है और देश की पहली महिला प्रधानमंत्री बनने के उनके सपने पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं।
साने ताकाइची से छिटकती दिख रही जापान पीएम की कुर्सी (फोटो- AP)
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क्या टूटा सत्तारूढ़ गठबंधन
जापानी मीडिया के अनुसार, यह घोषणा ताकाइची के एलडीपी के पांचवें नेता बनने के एक हफ्ते के भीतर की गई। उन्हें असंतुष्ट मतदाताओं को वापस पार्टी में लाने का कार्य सौंपा गया था। कोमेइटो पार्टी प्रमुख तेत्सुओ सैतो ने इसका मुख्य कारण एलडीपी द्वारा राजनीतिक दलों की फंडिंग नियमों को कड़ा न करना बताया। यह मुद्दा पिछले साल एलडीपी में सामने आए घोटाले से जुड़ा है, जिसमें धन उगाहने वाले कार्यक्रमों के टिकटों की बिक्री से संबंधित लाखों डॉलर के संदिग्ध भुगतान शामिल थे। इस घोटाले के कारण तत्कालीन प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा को पद छोड़ना पड़ा, एलडीपी के कई गुट भंग हो गए और चुनावों में मतदाताओं ने पार्टी का साथ छोड़ दिया। रिपोर्ट्स के अनुसार, ताकाइची ने इस घोटाले में फंसे कोइची हागिउदा को पार्टी में एक वरिष्ठ पद पर नियुक्त किया, जो कोमेइटो को मंजूर नहीं था।
1999 से बना हुआ था गठबंधन
कोमेइटो की स्थापना 1950 के दशक में सोका गक्काई की राजनीतिक शाखा के रूप में हुई थी। संगठन बौद्ध संप्रदाय से जुड़ा हुआ है और इसका एलडीपी के साथ गठबंधन लगभग लगातार 1999 से बना हुआ था। हालांकि, अब यह गठबंधन टूटने के बाद संसद के दोनों सदनों में एलडीपी अल्पमत में रह गई है, जिससे कानून पारित करना मुश्किल हो गया है और हर मुद्दे पर विपक्ष का समर्थन जरूरी हो गया है।
साने ताकाइची की नीतियों पर सवाल
साने ताकाइची की नीतियों को लेकर भी कई सवाल उठ रहे हैं। वे कट्टर रूढ़िवादी विचारों के लिए जानी जाती हैं और युद्ध से जुड़े टोक्यो स्थित यासुकुनी तीर्थस्थल की नियमित आगंतुक रही हैं। इस तीर्थस्थल पर मारे गए सभी जापानी नागरिकों को श्रद्धांजलि दी जाती है, जिनमें दोषी ठहराए गए युद्ध अपराधी भी शामिल हैं। उनके गुरु, दिवंगत शिंजो आबे ने 2013 में इस तीर्थस्थल का दौरा किया था।
ताकाइची को बहुमत मिलना आसान नहीं
अभी ताकाइची को संसद में बहुमत जुटाने के लिए अन्य दलों का समर्थन चाहिए। हालांकि, मुख्य विपक्षी दल कॉन्स्टीट्यूशनल डेमोक्रेटिक पार्टी (सीडीपी) उनके खिलाफ संभावित एकीकृत उम्मीदवार के पक्ष में कोमेइटो का समर्थन लेने के लिए तैयार है। वहीं, डेमोक्रेटिक पार्टी फॉर द पीपल (डीपीपी) एलडीपी के साथ गठबंधन वार्ता के लिए तैयार नहीं दिख रही। इस स्थिति को देखते हुए, जापान में साने ताकाइची का प्रधानमंत्री पद संभालना अब पहले से कहीं अधिक चुनौतीपूर्ण हो गया है। गठबंधन टूटने और संसद में बहुमत न होने की स्थिति में उनका नेतृत्व संकट में है, और देश की राजनीतिक दिशा आने वाले दिनों में तय होगी।
