US Iran Peace Talk: इस्लामाबाद में चल रही ईरान-यूएस वार्ता का पहला दौर नाकाम रहा है। शनिवार देर रात लगभग 15 घंटे तक चली वार्ता का कोई नतीजा सामने नहीं आया है। इस बीच ईरान ने कहा है कि वह बिना समझौते के वार्ता से हटने को तैयार है। वार्ता का उद्देश्य ईरान की तनाव कम करने की इच्छा दिखाना था। ईरान-अमेरिका वार्ता के बाद ईरान के विदेश मंत्रालय ने कहा कि अमेरिका को अत्यधिक मांगें और अनुचित अनुरोध नहीं करने चाहिए। अधिकारों या सहयोगियों पर कोई समझौता नहीं करेगा। वहीं, अमेरिका और ट्रंप को चेतावनी है कि अधिकारों की अनदेखी करोगे तो युद्ध की तैयारी का सामना करना पड़ेगा।
Iran-US शांति वार्ता
लेबनान मामले पर ईरान ने जताई नाखुशी
ईरान ने फिलिस्तीन और लेबनान को अपनी प्रमुख मांगों से जोड़ा है। प्रतिरोध की धुरी ईरान की स्थिति का केंद्रबिंदु है। ईरान ने सामान्यीकरण के प्रयासों पर लेबनान के प्रधानमंत्री की आलोचना की है। तेहरान ने इजराइल वार्ता पर प्रतिक्रिया देते हुए इसे गैरजिम्मेदाराना बताया। हमलों के बीच ईरान ने लेबनान की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाए। कूटनीति अधर में लटकी होने से तनाव बढ़ा है।
इस्लामाबाद में शांति वार्ता का पहला दौर समाप्त
अमेरिका और ईरान के बीच पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में शांति वार्ता का पहला दौर समाप्त हो गया। हालांकि 15 घंटे तक चली लंबी बातचीत का कोई ठोस नतीजा सामने नहीं आया। वहीं, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी इस बातचीत के बाद कोई नतीजा न निकलने पर चिंता जाहिर की।
उन्होंने कहा, बुरी खबर यह है कि हम किसी समझौते पर नहीं पहुंच सके हैं। मेरा मानना है कि यह खबर अमेरिका की तुलना में ईरान के लिए कहीं अधिक खराब है। इसलिए हम बिना किसी समझौते के अमेरिका वापस जा रहे हैं। उन्होंने हमारी शर्तों को स्वीकार नहीं करने का फैसला किया है।
हम किसी समझौते पर नहीं पहुंच सके: जेडी वेंस
जेडी वेंस ने आगे कहा कि बातचीत में जो भी कमियां रह गईं, वह पाकिस्तान की वजह से नहीं थीं। पाकिस्तान ने शानदार काम किया और वास्तव में हमारी तथा ईरानियों के बीच की दूरी कम करने और समझौते तक पहुंचने में मदद करने की पूरी कोशिश की। हम पिछले 21 घंटों से इस प्रक्रिया में लगे हुए हैं और ईरानियों के साथ कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर गहन चर्चा हुई है। यही अच्छी खबर है। लेकिन बुरी खबर यह है कि हम किसी समझौते पर नहीं पहुंच सके हैं।
उन्होंने आगे कहा कि मेरा मानना है कि यह खबर अमेरिका की तुलना में ईरान के लिए कहीं अधिक खराब है। इसलिए हम बिना किसी समझौते के अमेरिका लौट रहे हैं। उन्होंने हमारी शर्तों को स्वीकार नहीं करने का निर्णय लिया है।
