ईरान के सर्वोच्च नेता की हत्या ने पूरी दुनिया हैरान कर दिया है। इसी बीच सुप्रीम लीडर की मौत पर रूसी राष्ट्रपति ने भी प्रतिक्रिया दी है। पुतिन ने खामेनेई की मौत पर दुख जाहिर करते हुए कहा कि यह एक 'क्रूर हत्या' है जो 'मानवीय नैतिकता और अंतरराष्ट्रीय कानून के सभी मानकों' का उल्लंघन करती है। ईरान के सरकारी मीडिया ने जानकारी दी है कि इजराइल-अमेरिकी हमलों में अली खामेनेई की बेटी, पोती, बहू और दामाद मारे गए।
खामेनेई की मौत पर पुतिन ने जताई चिंता।
अली रेजा अराफी संभालेंगे जिम्मेदारी
खामेनेई के निधन के बाद नए सुप्रीम लीडर के चयन तक शासन की जिम्मेदारी संभालने वाली तीन सदस्यीय नेतृत्व परिषद में एक और सदस्य को शामिल कर लिया गया है। 66 वर्षीय धर्मगुरु अयातुल्ला अली रेजा अराफी को इस परिषद में नियुक्त किया गया है।
अली रेजा अराफी का जन्म वर्ष 1959 में ईरान के यज़्द प्रांत के मयबोद शहर में हुआ था। उनके पिता मोहम्मद इब्राहिम अल-अराफी, इस्लामी क्रांति के नेता रुहोल्लाह खुमैनी के करीबी सहयोगियों में माने जाते थे। क्रांति से पहले उनके पिता एक जाने-माने धार्मिक उपदेशक और लेखक के रूप में सक्रिय थे।
कैसे काम करती है सेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स?
गौरतलब है कि असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स ही देश के नए सुप्रीम लीडर का चुनाव करती है। उन्हें 2019 में दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने गार्जियन काउंसिल का सदस्य नामित किया था,जिससे उनकी प्रणाली में मजबूत पकड़ मानी जाती है। अब अराफी इस अंतरिम नेतृत्व परिषद में राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन और न्यायपालिका प्रमुख गुलाम हुसैन मोहसनी एजहेई के साथ शामिल होंगे। यह परिषद तब तक देश के प्रमुख निर्णयों की निगरानी और संचालन करेगी, जब तक नया सर्वोच्च नेता चुना नहीं जाता।
खामेनेई की मौत पर क्या बोले ट्रंप?
खामेनेई के मारे जाने के बाद अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि "इतिहास के सबसे क्रूर लोगों में से एक, खामेनेई, मर चुका है। यह न केवल ईरान के लोगों के लिए न्याय है, बल्कि सभी महान अमेरिकियों और दुनियाभर के उन कई देशों के लोगों के लिए भी न्याय है, जिन्हें खामेनेई और उसके खूनी गुंडों के गिरोह ने मार डाला या क्षत-विक्षत कर दिया।"
