US Iran Conflict: पश्चिम एशिया में तनाव अब पूरी तरह से नियंत्रण से बाहर हो चुका है। अमेरिका द्वारा ईरान के रिहायशी और नागरिक बुनियादी ढांचों को निशाना बनाए जाने के बाद, इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान ने शुक्रवार (स्थानीय समयानुसार) को खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी नौसेना और सैन्य ठिकानों पर एक साथ भीषण जवाबी सैन्य कार्रवाई शुरू कर दी है। ईरान की सेना और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने कतर, कुवैत, जॉर्डन, ओमान और सीरिया में अमेरिकी ठिकानों पर ताबड़तोड़ मिसाइल और ड्रोन हमले करने का दावा किया है।
सांकेतिक चित्र (X/@CENTCOM)
कतर से सीरिया तक अमेरिकी ठिकानों पर भारी नुकसान का दावा
ईरानी सरकारी मीडिया (IRIB) के अनुसार, IRGC ने 'ऑपरेशन नस्र 2' के तहत कतर में स्थित अमेरिका के रणनीतिक अल उदीद एयर बेस को निशाना बनाया। ईरान का दावा है कि इस हमले में अमेरिका का एक लॉन्ग-रेंज रडार सिस्टम और कई हवाई ईंधन भरने वाले विमान नष्ट हो गए।
इसके अलावा, ईरान ने कुवैत में अमेरिकी ठिकानों पर 'हाइमार्स' (HIMARS) लॉन्चर को नष्ट करने, जॉर्डन में अमेरिकी लड़ाकू विमानों पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागने और ओमान में अमेरिकी एयर कंट्रोल रडार को उड़ाने का दावा किया है। सीरिया के अल-तंफ क्षेत्र में तो ईरान ने अमेरिकी विशेष अभियान कमांड सेंटर को मटियामेट करने और अमेरिकी सैनिकों को बंदी बनाने तक का दावा कर दिया।
अमेरिकी सेना ने दावों को किया खारिज, तनाव चरम पर
ईरान द्वारा अमेरिकी सैनिकों को बंदी बनाने या मारने के दावों को अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने सिरे से खारिज कर दिया है। CENTCOM ने सोशल मीडिया पर स्पष्ट किया कि सीरिया के अल-तंफ में किसी भी अमेरिकी सैनिक को बंधक नहीं बनाया गया है और न ही कोई हताहत हुआ है, ईरान का यह दावा पूरी तरह झूठा है।
नागरिक ठिकानों पर हमले का बदला: ईरान
दरअसल, यह महा-संकट तब शुरू हुआ जब अमेरिका ने लगातार छठी रात ईरान के होर्मोजगान प्रांत में बमबारी की, जिसमें कोहौरेस्तान और गिरिवह के दो रणनीतिक पुल, बंदर अब्बास रेलवे जंक्शन और तपे अल्लाह अकबर जैसे रिहायशी इलाकों को तबाह कर दिया गया था। इसके जवाब में ईरान ने अब सीधे अमेरिकी सेना पर फ्रंट खोल दिया है, जिससे क्षेत्र में युद्ध का खतरा मंडरा रहा है।
