Xi Jinping- PM Modi Meeting: चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बातचीत के दौरान कहा कि भारत और चीन को अपने संबंधों को रणनीतिक और दीर्घकालिक दृष्टिकोण से देखना चाहिए। दोनों नेताओं के बीच यह बातचीत रविवार से सोमवार तक तियानजिन में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के वार्षिक शिखर सम्मेलन से इतर हुई। उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों को अपने संबंधों को रणनीतिक ऊंचाइयों और दीर्घकालिक दृष्टिकोण से देखना और संभालना होगा ताकि हमारे द्विपक्षीय संबंधों का निरंतर, सुदृढ़ और स्थिर विकास हो सके।
पीएम मोदी से मुलाकात के बाद जिनपिंग का बयान (AP)
शी जिनपिंग बोले, बहुपक्षवाद को बनाए रखना होगा
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की एकतरफा नीतियों पर कटाक्ष करते हुए, शी जिनपिंग ने कहा कि दोनों देशों को बहुपक्षवाद को बनाए रखना चाहिए। शी जिनपिंग ने कहा कि भारत और चीन को एक बहुध्रुवीय विश्व और अंतर्राष्ट्रीय संबंधों में अधिक लोकतंत्र के लिए भी काम करना चाहिए। उन्होंने कहा, हमें बहुपक्षवाद को बनाए रखने, एक बहुध्रुवीय विश्व और अंतर्राष्ट्रीय संबंधों में अधिक लोकतंत्र लाने के लिए मिलकर काम करने और एशिया तथा दुनिया भर में शांति और समृद्धि में अपना उचित योगदान देने की अपनी ऐतिहासिक ज़िम्मेदारी को भी आगे बढ़ाना होगा। यह लगभग 10 महीनों में दोनों नेताओं की पहली मुलाकात थी और व्यापार एवं शुल्क संबंधी वाशिंगटन की नीतियों के कारण भारत-अमेरिका संबंधों में आई अचानक गिरावट के मद्देनजर अहम हो गई है।
पीएम मोदी ने जिनपिंग से क्या-क्या कहा
वहीं, प्रधानमंत्री मोदी ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से कहा कि भारत आपसी विश्वास, सम्मान और संवेदनशीलता के आधार पर चीन के साथ अपने संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों को पुन: संयोजित करने के लिए व्यापक वार्ता की। पीएम मोदी ने टेलीविजन पर प्रसारित अपने वक्तव्य की शुरुआत में कहा कि 2.8 अरब लोगों का कल्याण भारत और चीन के बीच द्विपक्षीय सहयोग से जुड़ा है। उत्तरी चीन के इस शहर में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के वार्षिक शिखर सम्मेलन के इतर दोनों नेताओं के बीच यह बातचीत अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व वाले प्रशासन की शुल्क संबंधी नीति से पैदा हुई उथल पुथल की पृष्ठभूमि में हुई।
पीएम मोदी दो देशों की अपनी यात्रा के दूसरे चरण में शनिवार शाम जापान से यहां पहुंचे। यह मई 2020 में शुरू हुए पूर्वी लद्दाख सीमा विवाद के बाद मोदी की चीन की पहली यात्रा है। प्रधानमंत्री ने पिछले साल अक्टूबर में रूस के कजान में चीन के राष्ट्रपति के साथ वार्ता की थी जो भारत एवं चीन के बीच पूर्वी लद्दाख में गतिरोध समाप्त करने के लिए एक समझौते पर पहुंचने के कुछ दिनों बाद हुई थी। प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले वर्ष की (सीमा से सैनिकों की) वापसी प्रक्रिया के बाद सीमा पर शांति और स्थिरता है तथा दोनों देशों के बीच सीधी उड़ानें दोबारा शुरू की जा रही हैं। प्रधानमंत्री ने कैलाश मानसरोवर यात्रा के फिर से शुरू होने का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि सीमा प्रबंधन पर हमारे विशेष प्रतिनिधियों के बीच सहमति थी।
मोदी ने कहा, भारत और चीन के बीच सीमा से संबंधित मुद्दों को सुलझाने के लिए 'सीमा मुद्दे पर विशेष प्रतिनिधियों' का तंत्र है। हम आपसी विश्वास, सम्मान और संवेदनशीलता के आधार पर अपने सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। प्रधानमंत्री ने शंघाई सहयोग संगठन की चीन द्वारा सफलतापूर्वक अध्यक्षता किए जाने पर शी को बधाई भी दी। तियानजिन की अपनी यात्रा से पहले मोदी ने कहा था कि विश्व आर्थिक व्यवस्था में स्थिरता लाने के लिए भारत और चीन का मिलकर काम करना महत्वपूर्ण है। जापान के समाचार पत्र ‘द योमिउरी शिंबुन’ के साथ एक साक्षात्कार में पीएम मोदी ने कहा था कि भारत और चीन के बीच स्थिर और सौहार्दपूर्ण द्विपक्षीय संबंधों का क्षेत्रीय एवं वैश्विक शांति और समृद्धि पर सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
