India reply to Pak at UN: संयुक्त राष्ट्र महासभा में आतंकवाद पर पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के दिए गए बयान पर भारत ने तगड़ा पलटवार और करारा जवाब दिया है। संयुक्त राष्ट्र में भारत की स्थायी मिशन की प्रथम सचिव गहलोत पटेल ने शुक्रवार (स्थायी समयानुसार) को शरीफ को जवाब देते हुए कहा कि 'बर्बाद रनवे, जले हुए हैंगर्स को PAK यदि जीत मानकर इतराता है तो उसका स्वागत है।' पटेल ने कहा कि पाकिस्तान ऐसा देश है जो आतंकवाद का महिमामंडन और बेतुके पाखंड करता है। भारतीय राजनयिक ने 'ऑपरेशन सिंदूर' में पाक की जीत के दावा का उपहास भी उड़ाया।
यूएन में भारत ने पाक को करारा जवाब दिया है। तस्वीर-ANI
पाक के पीएम ने दिया बेतुका बयान-पटेल
यूएनजीएके 80वें सत्र की आम चर्चा में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के भाषण के बाद, संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन की प्रथम सचिव पेटल गहलोत ने शुक्रवार को यह टिप्पणी की। दरअसल शरीफ ने अपने भाषण में कहा था कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दोनों परमाणु-संपन्न देशों के बीच संघर्ष टालने में अहम भूमिका निभाई थी। पेटल गहलोत ने भारत के जवाब देने के अधिकार का इस्तेमाल करते हुए यूएनजीए में कहा, ‘इस सभा में सुबह पाकिस्तान के प्रधानमंत्री का बेतुका बयान सुनने को मिला। शरीफ ने एक बार फिर आतंकवाद का गुणगान किया, जो उनकी विदेश नीति के केन्द्र में है।’
सभी लंबित मुद्दों पर बातचीत को तैयार-शरीफ
शरीफ ने अपने संबोधन में कहा कि उनका देश भारत के साथ सभी लंबित मुद्दों पर ‘समग्र, व्यापक और परिणामोन्मुखी’ वार्ता के लिए तैयार है। उन्होंने कश्मीर की स्थिति को लेकर भारत की आलोचना भी की। डोनाल्ड ट्रंप की प्रशंसा करते हुए शरीफ ने कहा कि उनके ‘शांति प्रयासों ने दक्षिण एशिया में एक युद्ध को टालने में मदद की।’उन्होंने कहा, ‘हमारे क्षेत्र में शांति को बढ़ावा देने में राष्ट्रपति ट्रंप के अद्भुत और उत्कृष्ट योगदान के लिए पाकिस्तान ने उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार के वास्ते नामित किया है। हम इतना तो कर ही सकते हैं... मुझे लगता है कि वह सचमुच शांति के प्रतीक हैं।’
पहलगाम में 22 अप्रैल को हुआ आतंकी हमला
जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए एक आतंकवादी हमले के बाद, भारत ने छह मई की देर रात ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में आतंकवादी ठिकानों को निशाना बनाया था। भारत लगातार कहता आ रहा है कि संघर्ष रोकने पर सहमति, दोनों देशों की सेनाओं के सैन्य संचालन महानिदेशकों (डीजीएमओ) के बीच सीधी बातचीत के बाद ही बनी थी।
