Pakistan Afghan Refugees: मानवाधिकार संगठन ह्यूमन राइट्स वॉच (Human Rights Watch Report) ने हाल ही में एक रिपोर्ट जारी कर पाकिस्तान में रह रहे अफगान शरणार्थियों की स्थिति पर चिंता जताई है। रिपोर्ट के अनुसार, हाल के महीनों में पाकिस्तान सरकार ने अफगान प्रवासियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई तेज कर दी है। इसमें मनमानी गिरफ्तारियां और जबरन देश से बाहर भेजने जैसी घटनाएं शामिल हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि पुलिस की इन कार्रवाइयों का असर हजारों कमजोर शरणार्थियों पर पड़ रहा है। इनमें बच्चे भी शामिल हैं, जिन्हें अब स्वास्थ्य सेवाएं, शिक्षा और जरूरी सुविधाएं पाने में मुश्किल हो रही है। संगठन की शोधकर्ता फेरेश्ता अब्बासी ने कहा कि पाकिस्तान को इन लोगों को सुरक्षा देने की जरूरत है, लेकिन इसके बजाय उनके बीच डर का माहौल बनाया जा रहा है।
पुलिस कार्रवाई से शरणार्थियों में डर का माहौल (Photo: AI Generated)
पुलिस घर-घर जाकर ले रही तलाशी
बताया गया है कि फरवरी 2026 से पाकिस्तान और तालिबान (Afghan deportation 2026) के बीच तनाव बढ़ने के बाद पुलिस ने कई शहरों में अफगान समुदाय के खिलाफ अभियान तेज कर दिया है। पुलिस घर-घर जाकर तलाशी ले रही है, रात में छापे मार रही है और बिना किसी कानूनी आदेश के लोगों को हिरासत में ले रही है। हैरानी की बात यह है कि जिन लोगों के पास वैध दस्तावेज हैं, उन्हें भी नहीं छोड़ा जा रहा। कई अफगान शरणार्थियों के पास कागजात नहीं हैं, क्योंकि 2023 से उनके रजिस्ट्रेशन कार्ड और अन्य दस्तावेजों का नवीनीकरण बंद कर दिया गया है। ऐसे में वे और ज्यादा असुरक्षित हो गए हैं। पुलिस अक्सर पकड़े गए लोगों को हिरासत केंद्रों में भेजती है और फिर उन्हें अफगानिस्तान वापस भेज दिया जाता है।
2026 में अब तक 1.46 लाख से ज्यादा अफगान नागरिकों को भेजा जा चुका बाहर
एक शरणार्थी महिला ने बताया कि पुलिस ने उसके परिवार को घर से ही पकड़ लिया और उनकी विनती के बावजूद उन्हें वापस भेज दिया गया। उसने यह भी कहा कि कुछ लोगों को पैसे देने पर छोड़ा गया, लेकिन जो पैसे नहीं दे सके, उन्हें जबरन भेज दिया गया। रिपोर्ट के मुताबिक, 2026 में अब तक 1.46 लाख से ज्यादा अफगान नागरिकों को पाकिस्तान से बाहर भेजा जा चुका है। यह संख्या अप्रैल से और तेजी से बढ़ रही है। कई लोगों को बाजार, स्कूल या काम के दौरान भी पकड़ लिया जाता है और उनसे पैसे मांगे जाते हैं।
ह्यूमन राइट्स वॉच ने चेतावनी दी है कि अफगानिस्तान लौटने वाले कई लोगों को वहां खतरा हो सकता है, खासकर पत्रकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और पूर्व सरकारी कर्मचारियों को। संगठन का कहना है कि इस तरह की जबरन वापसी अंतरराष्ट्रीय कानूनों के खिलाफ हो सकती है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस मुद्दे को लेकर चिंता बढ़ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इसी तरह कार्रवाई जारी रही, तो अफगान शरणार्थियों की स्थिति और खराब हो सकती है और क्षेत्र में मानवीय संकट गहरा सकता है।
