Explainer: अमेरिकी हितों को नुकसान पहुंचाएगी पुतिन-जिनपिंग की जुगलबंदी, सैन्य सहयोग बढ़ाएंगे रूस और चीन

  • Authored by: आलोक कुमार राव
  • Updated Mar 22, 2023, 12:17 PM IST

Putin-Jinping meeting : बीजिंग और मास्को जितने एक दूसरे के करीब आएंगे अमेरिका सहित पश्चिमी देशों के हितों को उतना ही नुकसान पहुंचेगा। रूस और चीन की युगलबंदी से अमेरिका कमजोर होगा। चीन के दखल से खाड़ी के दो विरोधी देश सऊदी अरब और ईरान में ऐतिहासिक समझौता हुआ है। सऊदी अरब और ईरान की दोस्ती को अमेरिका के लिए एक बड़े झटके के रूप में देखा जा रहा है।

Putin-Jinping meeting : रूस-यूक्रेन युद्ध ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देशों के समीकरण को बदल दिया है। इस युद्ध के बाद अमेरिका के नेतृत्व में नाटो देशों ने रूस को अलग-थलग करने की कोशिश की है लेकिन वे अपने इस अभियान में पूरी तरह सफल नहीं हुए हैं। यूक्रेन मसले पर रूस को चीन का समर्थन मिला है। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मास्को यात्रा दोनों देशों के बीच बढ़ती करीबी का साफ संकेत हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसके रणनीतिक एवं सामरिक मायने हैं। रणनीतिकार मानते हैं कि रूस और चीन के बीच निकटता दोनों को फायदा पहुंचाएगी। यहां हम समझेंगे चीन और रूस की बढ़ती नजदीकी के मायने क्या हैं और कैसे दोनों दिश मिलकर अमेरिकी प्रभाव को कम कर सकते हैं।

putin jinping meeting

चीन और रूस में बढ़ रही नजदीकी।

अमेरिकी हितों को नुकसान पहुंचाएगी रूस-चीन की करीबी

बीजिंग और मास्को जितने एक दूसरे के करीब आएंगे अमेरिका सहित पश्चिमी देशों के हितों को उतना ही नुकसान पहुंचेगा। रूस और चीन की जुगलबंदी से अमेरिका कमजोर होगा। चीन के दखल से खाड़ी के दो विरोधी देश सऊदी अरब और ईरान में ऐतिहासिक समझौता हुआ है। सऊदी अरब और ईरान की दोस्ती को अमेरिका के लिए एक बड़े झटके के रूप में देखा जा रहा है। इसी तरह पांचों महाद्वीप में जहां भी रूस और चीन का दबदबा बढ़ेगा उससे वाशिंगटन का कूटनीतिक असर कम होगा। देशों जिनपिंग की मास्को यात्रा से यह संकेत गया है कि अमेरिका की लाख कोशिशों के बावजूद रूस अलग-थलग नहीं पड़ा है बल्कि उसे दुनिया की एक महाशक्ति का साथ मिला है। चीन को अपने साथ लाकर पुतिन अमेरिका को एक बड़ा कूटनीतिक झटका दिया है। यह बात अलग है कि रूस का समर्थन करने के पीछे जिनपिंग की अपनी महात्वाकांक्षाएं एवं योजनाएं है।

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