लाल सागर के सबसे रणनीतिक बंदरगाह मोखा पोर्ट पर यमन के हूती विद्रोहियों (Houthi Attacks) ने कब्जा कर लिया है। इस गुट को अंसार अल्लाह भी कहा जाता है। हैरानी की बात ये है कि मक्का डिफेंस पैक्ट के बावजूद पाकिस्तान ने सऊदी अरब की मदद करने से इनकार कर दिया है।
यमन के हूती विद्रोहियों ने सऊदी समर्थित सरकार की सेनाओं को पीछे हटाते हुए लाल सागर के रणनीतिक बंदरगाह शहर मोखा पर कब्जा कर लिया है। मोखा पर नियंत्रण के साथ ही ईरान समर्थित हूती गुट अब बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य से महज 75 किलोमीटर दूर रह गया है। यह जलडमरूमध्य एशिया और यूरोप को जोड़ने वाले प्रमुख वैश्विक समुद्री व्यापार मार्ग का दक्षिणी प्रवेश द्वार माना जाता है।
वहीं, ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर ग़ालिबाफ ने हूतियों के कब्जे के बाद यमनी लोगों के समर्थन में बयान दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि “बहादुर यमनी लोग निश्चित रूप से जीत हासिल करेंगे।” गालिबाफ ने अपने पोस्ट में ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के पुराने बयान का भी जिक्र किया। खामेनेई ने यमन के लोगों के संघर्ष और प्रतिरोध के जीत तक जारी रहने की उम्मीद जताई थी।
मोखा पर हूतियों का कब्जा। AP
मोचा पर हूतियों का कब्जा
रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान समर्थित हूती आंदोलन ने गुरुवार को लाल सागर के तट पर स्थित रणनीतिक शहर मोचा और उसके बंदरगाह पर कब्जा कर लिया। यह कार्रवाई ऐसे समय हुई जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त यमनी सरकार के समर्थन वाली सेनाएं इलाके से पीछे हट गईं।
मोचा पर कब्जे के बाद हूतियों का रणनीतिक बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य पर नियंत्रण और मजबूत हो गया है। यह जलमार्ग वैश्विक व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण है और लाल सागर से होकर गुजरने वाले अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग का अहम हिस्सा है।
यमनी सरकार ने जताई चिंता
मोचा बंदरगाह और बाब-अल-मंदेब में हुए घटनाक्रम पर यमन के नेतृत्व ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से तत्काल कार्रवाई की अपील की है। राष्ट्रपति नेतृत्व परिषद के प्रमुख राशद अल-अलीमी ने कहा कि मोचा बंदरगाह और बाब-अल-मंदेब से जुड़ा घटनाक्रम सिर्फ यमन का आंतरिक मामला नहीं है, बल्कि इसका असर क्षेत्रीय और वैश्विक व्यापार पर पड़ सकता है।
अल-अलीमी ने चेतावनी दी कि बाब-अल-मंदेब को एक और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज नहीं बनने दिया जा सकता और अंतरराष्ट्रीय शक्तियों से हूतियों के कब्जे को खत्म करने के लिए निर्णायक कदम उठाने की अपील की।
ईरान ने हूतियों को बताया स्वतंत्र
इस बीच, ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने अमेरिका के उस आरोप को खारिज किया कि हूती संगठन तेहरान के प्रॉक्सी के तौर पर काम करता है। उन्होंने कहा कि यमन के हूती स्वतंत्र रूप से काम करते हैं और किसी के आदेश पर नहीं चलते। बघाई ने अमेरिका की सैन्य मौजूदगी और नीतियों पर भी निशाना साधते हुए कहा कि यमन में स्थायी शांति के लिए बाहरी हस्तक्षेप को खत्म करना जरूरी है।
कब से शुरू हुई है लड़ाई?
3 सितंबर से हूती विद्रोहियों और सऊदी समर्थित यमनी सरकार की सेनाओं के बीच कई मोर्चों पर भीषण संघर्ष जारी है। ताइज, होदेइदा, मारीब, अल-जॉफ, अल-बैदा और ढाले समेत कई प्रांतों में दोनों पक्षों के बीच लड़ाई तेज हुई है। 10 सितंबर को हूतियों ने लाल सागर के रणनीतिक बंदरगाह शहर मोखा पर कब्जा कर लिया। यह शहर लंबे समय से यमनी सरकार के नियंत्रण वाला प्रमुख रेड सी पोर्ट था। मोखा पर कब्जे के बाद हूती लड़ाके दक्षिण की ओर धुबाब और बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य की तरफ बढ़े।
रिपोर्टों के मुताबिक, हूतियों ने हानिश द्वीपसमूह और जुकार द्वीप तक भी अपनी पहुंच बना ली है। इससे बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य पर उनका रणनीतिक दबाव और बढ़ गया है, जो लाल सागर से होकर गुजरने वाला दुनिया के प्रमुख समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है।
