मोखा पर हूतियों का कब्जा, बाब अल-मंदेब के करीब पहुंचा ईरान समर्थित गुट; सऊदी-US समर्थित सेना के छूटे पसीने!

यमन के हूती विद्रोहियों ने लाल सागर के रणनीतिक बंदरगाह शहर मोखा पर कब्जा कर लिया है, जिसके बाद बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य के आसपास उनका दबाव बढ़ गया है। मोखा इस महत्वपूर्ण वैश्विक समुद्री व्यापार मार्ग से करीब 75 किलोमीटर दूर है। इस बीच ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर ग़ालिबाफ ने हूतियों के समर्थन में बयान दिया है। वहीं, यमनी सरकार ने मोखा और बाब अल-मंदेब की स्थिति को क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय चिंता का विषय बताते हुए वैश्विक शक्तियों से कार्रवाई की अपील की है।

लाल सागर के सबसे रणनीतिक बंदरगाह मोखा पोर्ट पर यमन के हूती विद्रोहियों (Houthi Attacks) ने कब्जा कर लिया है। इस गुट को अंसार अल्लाह भी कहा जाता है। हैरानी की बात ये है कि मक्का डिफेंस पैक्ट के बावजूद पाकिस्तान ने सऊदी अरब की मदद करने से इनकार कर दिया है।

मोखा पर हूतियों का कब्जा, बाब अल-मंदेब के करीब पहुंचा ईरान समर्थित गुट; सऊदी-US समर्थित सेना के छूटे पसीने!

यमन के हूती विद्रोहियों ने सऊदी समर्थित सरकार की सेनाओं को पीछे हटाते हुए लाल सागर के रणनीतिक बंदरगाह शहर मोखा पर कब्जा कर लिया है। मोखा पर नियंत्रण के साथ ही ईरान समर्थित हूती गुट अब बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य से महज 75 किलोमीटर दूर रह गया है। यह जलडमरूमध्य एशिया और यूरोप को जोड़ने वाले प्रमुख वैश्विक समुद्री व्यापार मार्ग का दक्षिणी प्रवेश द्वार माना जाता है।

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