बांग्लादेश में भगवान राम की कथित तस्वीर के अपमान को लेकर विवाद बढ गया है। यहां हिंदू समुदाय और विभिन्न सनातनी संगठनों ने शुक्रवार को राजधानी ढाका में बड़े पैमाने पर विरोध जताते हुए प्रदर्शन किया। इस दौरान हिंदू समुदाय के लोगों ने मानव श्रृंखला बनाकर मशाल जुलूस निकालते हुए दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी के साथ ही मामले री निष्पक्ष जांच की मांग की।
बांग्लादेश में हिंदुओं का प्रदर्शन। (फोटो- सोशल मीडिया)
संयुक्त सनातनी समाज (United Sanatani Society) के नेतृत्व में आयोजित इस प्रदर्शन में कई हिंदू धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ विभिन्न मठों और मंदिरों के सदस्य शामिल हुए। प्रदर्शन के दौरान मशाल जुलूस राष्ट्रीय संग्रहालय (नेशनल म्यूजियम) क्षेत्र से शुरू होकर शाहबाग चौराहे से होते हुए राष्ट्रीय प्रेस क्लब तक पहुंचा। इस दौरान ढाका जय श्रीराम के नारों से गूंज उठा।
आठ सूत्रीय मांगें भी पेश की
प्रदर्शनकारियों ने सरकार के सामने आठ सूत्रीय मांगपत्र भी रखा। इसमें कथित अपमान के आरोपियों की गिरफ्तारी और सजा, सोशल मीडिया पर नफरत फैलाने वाले अभियानों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई, मंदिरों और धार्मिक संस्थानों की सुरक्षा बढ़ाने, अल्पसंख्यक संरक्षण आयोग के गठन तथा सांप्रदायिक हिंसा और धार्मिक भेदभाव रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग शामिल है।
क्यों शुरू हुआ विवाद?
यह विरोध हाल के दिनों में गाइबांधा जिले में सामने आए विवाद से जुड़ा है, जहां भगवान राम की कथित तस्वीर के अपमान की घटना के बाद हिंदू समुदाय में नाराजगी फैल गई थी। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन ने समय रहते कार्रवाई नहीं की तो आंदोलन पूरे देश में फैलाया जाएगा।
ढाका विश्वविद्यालय के छात्रों ने भी निकाला मशाल जुलूस
इस बीच, ढाका विश्वविद्यालय के छात्रों ने भी कथित घटना के विरोध में मशाल जुलूस और रैली निकाली। छात्र नेताओं ने कहा कि इस घटना से हिंदू समुदाय की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं और सरकार को दोषियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई करते हुए सांप्रदायिक सद्भाव बनाए रखने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए।
प्रदर्शन के दौरान गाइबांधा के पलाशबाड़ी स्थित सनातन कॉम्प्लेक्स में प्रस्तावित 81 फीट ऊंची भगवान राम की प्रतिमा के निर्माण कार्य के रुकने का मुद्दा भी उठाया गया। परियोजना से जुड़े लोगों का आरोप है कि सुरक्षा संबंधी चिंताओं और कथित दबाव के कारण, निर्माण कार्य में काफी प्रगति होने के बावजूद उसे फिलहाल रोकना पड़ा है।
