France Protests: फ्रांस में खर्च में कटौती के विरोध में देशव्यापी प्रदर्शन फिर से शुरू हो गए। खर्च में कटौती की निंदा और अमीरों पर ज्यादा टैक्स लगाने की मांग को लेकर हजारों लोग 200 से ज्यादा शहरों और कस्बों में सड़कों पर उतरे। गुरुवार दोपहर को पेरिस के प्लेस डी इटली से हजारों कर्मचारी, सेवानिवृत्त लोग और छात्र मार्च में निकले।
फ्रांस में विरोध प्रदर्शन का नया दौर शुरू। Photo-AP
एफिल टॉवर हुआ बंद
एसोसिएटेड प्रेस के अनुसार, पिछले महीने राजनीतिक उथल-पुथल और बजट वार्ता के कारण शुरू हुए विरोध प्रदर्शनों की इस नई कड़ी में एफिल टॉवर को भी बंद करना पड़ा। एफिल टॉवर से संबंधित अधिकारियों ने एक बयान में विजिटर्स को बताया कि हड़तालों के कारण टावर भी बंद है।
क्या है पूरा मामला?
फ्रांस के गृह मंत्रालय ने कहा कि देश भर में 195,000 लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया, जिनमें से 24,000 लोग पेरिस में थे। कुछ शिक्षक और स्वास्थ्यकर्मी भी हड़ताल में शामिल हुए, हालांकि कुल मिलाकर पिछले महीने के विरोध प्रदर्शन की तुलना में कम लोग शामिल हुए। फ्रांस के प्रमुख यूनियनों ने देशव्यापी हड़ताल की मांग की है और नव नियुक्त प्रधानमंत्री सेबेस्टियन लेकोर्नू से अपने पूर्ववर्ती (Francois Bayrou) द्वारा प्रस्तावित बजट के मसौदे को वापस लेने का आग्रह किया है। इस मसौदे में सामाजिक कल्याण योजनाओं में कटौती और कड़े आर्थिक उपाय शामिल हैं, जिनसे कम वेतन पाने वाले और मध्यम वर्ग के लोगों की खरीद शक्ति और कम हो जाएगी।
लेकोर्नू को पिछले महीने फ्रांस का प्रधानमंत्री बनाया गया था। बेरो ने महीनों से चल रहे बजट विवाद को खत्म करने के लिए अचानक विश्वास मत प्रस्ताव लाकर अपने सहयोगियों को चौंका दिया था। यह बजट देश के बढ़ते कर्ज को कम करने के लिए लगभग 44 बिलियन यूरो (52 बिलियन डॉलर) की लागत में कटौती की बात करता है, जिसके खिलाफ कई पार्टियों ने वोट किया था। हालांकि, लेकोर्नू ने अपने बजट योजनाओं की जानकारी नहीं दी है और उन्होंने अभी तक अपने मंत्रिमंडल के मंत्रियों की नियुक्ति नहीं की है, जो जल्द ही होने की उम्मीद है। इस साल के आखिर में विभाजित संसद इस बजट बिल पर चर्चा करेगी।
फ्रांसीसी पार्टियां धैर्य खो रहीं
लेकोर्नू द्वारा नई कैबिनेट की घोषणा में देरी से विपक्षी पार्टियां और ट्रेड यूनियन नाराज हैं, जो बजट में कटौती को लेकर अपनी चिंताए व्यक्त कर रहे हैं। पॉलिटिको के अनुसार, बजट योजनाओं पर लेकोर्नू की लगातार चुप्पी के कारण कई विपक्षी सांसदों ने उन्हें पद से हटाने की मांग उठाई है।
बता दें कि 18 सितंबर को टैक्स और सामाजिक न्याय की मांगों को लेकर ट्रेड यूनियन के नेतृत्व वाले विरोध प्रदर्शनों में देश भर में 500,000 से 1 मिलियन प्रदर्शनकारियों ने भाग लिया। इससे एक हफ्ते पहले, फ्रांस में सरकार विरोधी प्रदर्शनों के दौरान 'सब कुछ बंद करो' अभियान के तहत सड़कों पर धुआं छा गया था, जगह-जगह आग लगी थी। पुलिस ने आंसू गैस के गोले दागे थे।
