FlyDubai Flight Crew: फ्लाईदुबई विमान में हमलावर को-पायलट को छोड़ने को लेकर क्रू और यात्रियों में कथित टकराव हुआ था। यात्रियों का दावा है कि क्रू के कुछ सदस्यों ने बांधे गए आरोपी को खोलने की मांग की थी। फ्लाईदुबई विमान में पायलट पर हमले के बाद यात्रियों और क्रू के बीच टकराव का दावा सामने आया है। New York Post की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पायलट पर हमला करने वाले को-पायलट को कुछ इजरायली यात्रियों ने काबू में कर बांध दिया था। इसके बाद कथित तौर पर विमान के क्रू के कुछ सदस्यों ने उसे छोड़ने की मांग की थी।
फ्लाईदुबई फ्लाइट में ओमानी को-पायलट को छुड़ाने की हुई थी कोशिश
रिपोर्ट में उन यात्रियों के हवाले से यह दावा किया गया है, जिन्होंने को-पायलट को काबू करने में मदद की थी। बैंकिंग एग्जीक्यूटिव त्जविका मानेस ने दावा किया कि क्रू के सदस्य उनसे आरोपी को खोलने के लिए कह रहे थे। उन्होंने कहा कि उन्हें समझ नहीं आया कि क्रू ऐसा क्यों कह रहा था। वहीं, रियल एस्टेट प्रोफेशनल डेनियल श्लिक्टर, जो कॉकपिट के पास दूसरी पंक्ति में बैठे थे, उन्होंने भी दावा किया कि क्रू की ओर से को-पायलट को छोड़ने की मांग की गई थी। उनके मुताबिक, इससे यात्रियों को क्रू के कुछ सदस्यों के व्यवहार पर संदेह हुआ।
ऑस्ट्रेलिया ने हम्मामी के खिलाफ शुरू की जांच
वहीं, ऑस्ट्रेलिया ने फ्लाईदुबई के को-पायलट के खिलाफ आतंकी गतिविधियों की जांच शुरू की, क्योंकि यह खुलासा हुआ है कि उसने ऑस्ट्रेलिया में पढ़ाई की थी। खबरों के मुताबिक, ऑस्ट्रेलियाई सुरक्षा एजेंसियों ने इस संबंध में जांच शुरू कर दी है, क्योंकि यह पता चला है कि जिस आतंकवादी ने इजराइल जा रही फ्लाईदुबई की फ्लाइट को गिराने की कोशिश की थी, उसने ऑस्ट्रेलिया में पढ़ाई की थी।
ऑस्ट्रेलियाई संघीय पुलिस के एक प्रवक्ता ने द गार्जियन को बताया, एएफपी, विक्टोरिया पुलिस और एएसआईओ से बनी विक्टोरियन जॉइंट काउंटर टेररिज्म टीम (वीआईसी जेसीटीटी) इस बात की पुष्टि करती है कि वह इस व्यक्ति के ऑस्ट्रेलिया से संबंधों की जांच कर रही है। उचित समय पर अपडेट दिया जाएगा।
एबीसी न्यूज के सूत्रों के अनुसार, को-पायलट हमाम अल-हम्ममी को 2014 में छात्र वीजा जारी किया गया था और उसने 2015 से 2017 के बीच ऑस्ट्रेलिया में पढ़ाई की, जिसके बाद वह देश छोड़कर चला गया। एबीसी का कहना है कि अल-हम्मामी का छात्र वीजा 2019 में रद्द कर दिया गया था क्योंकि उसने किसी भी कोर्स में दाखिला नहीं लिया था, और जॉइंट काउंटर टेररिज्म टीम की जांच इस बात की पड़ताल करेगी कि क्या पायलट ऑस्ट्रेलिया में कट्टरपंथी बना था।
दुनिया की नजरों में हीरो बने कैप्टन स्मित
दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाइदुबाई की उड़ान में 174 यात्रियों की जान बचाने वाले भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छार के अदम्य साहस और बहादुरी की गूंज वैश्विक स्तर पर सुनाई दे रही है। इस साहसिक घटनाक्रम के बाद वैश्विक नेताओं की ओर से उन्हें हीरो बताया गया। इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कैप्टन स्मित को हीरो बताते हुए कहा कि खुद गंभीर रूप से घायल होने और चाकू लगने के बावजूद कैप्टन ने हिम्मत नहीं हारी और कॉकपिट का दरवाजा खोलकर यात्रियों को हमलावर को दबोचने का मौका दिया। नेतन्याहू ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि कैप्टन स्मित ने इजराइली नागरिकों समेत 174 लोगों की जान बचाकर मिड-एयर में 9/11 जैसी एक भीषण त्रासदी और तबाही को टाल दिया। वहीं, पीएम मोदी ने कैप्टन स्मित की सूझबूझ और कर्तव्यनिष्ठा को सलाम किया। पीएम ने कैप्टन स्मित के परिजनों से भी बात की। उन्होंने कहा कि कैप्टन स्मित की सूझबूझ से 9-11 जैसा हमला टल गया। अमेरिकी राष्ट्रपित डोनाल्ड ट्रंप ने भी कैप्टन स्मित की तारीफ करते हुए उन्हें अभूतपूर्व हिम्मत का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि कॉकपिट में इस तरह के हमले के बावजूद विमान को नियंत्रण में रखना और सुरक्षित लैंडिंग सुनिश्चित करना एक असाधारण उपलब्धि है।
