Earthquake in Tibet: भारत के पड़ोसी देश तिब्बत में शुक्रवार रात भूकंप के झटके महसूस किए गए। राष्ट्रीय भूगर्भ विज्ञान केंद्र (एनसीएस) के मुताबिक भूकंप की गहराई जमीन के करीब 60 किलोमीटर भीतर थी। इससे पहले बीते 11 नवंबर को भी तिब्बत में भूकंप आया था। रिक्टर स्केल पर इस भूकंप की तीव्रता 3.8 थी। यह भूकंप जमीन से 10 किलोमीटर की गहराई पर स्थित था।
तिब्बत में 4.1 तीव्रता का भूकंप। तस्वीर-PTI
उथले भूकंप ज्यादा खतरनाक
समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक उथले भूकंप आमतौर पर गहरे भूकंपों की तुलना में अधिक खतरनाक होते हैं। इसका कारण यह है कि उथले भूकंपों से उत्पन्न भूकंपीय तरंगों को सतह तक पहुंचने के लिए कम दूरी तय करनी पड़ती है, जिससे जमीन अधिक जोर से हिलती है और संरचनाओं को अधिक नुकसान तथा जनहानि की संभावना बढ़ जाती है। तिब्बती पठार अपनी टेक्टोनिक प्लेटों की टक्कर के कारण भूकंपीय गतिविधि के लिए जाना जाता है।
भूवैज्ञानिक फॉल्ट लाइन पर स्थित है तिब्बत
तिब्बत और नेपाल एक प्रमुख भूवैज्ञानिक फॉल्ट लाइन पर स्थित हैं जहां भारतीय टेक्टोनिक प्लेट यूरेशियन प्लेट से टकरा रही है, और इसी कारण इस क्षेत्र में भूकंप नियमित रूप से आते रहते हैं। यह क्षेत्र टेक्टोनिक उत्थान के कारण भूकंपीय रूप से सक्रिय है, जो इतना शक्तिशाली हो सकता है कि हिमालय की चोटियों की ऊँचाई तक बदल जाए।
पृथ्वी की क्रस्ट मोटी होती जाती है
तिब्बती पठार अपनी अधिक ऊचाई इस कारण प्राप्त करता है कि भारतीय टेक्टोनिक प्लेट और यूरेशियन प्लेट के टकराव से पृथ्वी की क्रस्ट मोटी होती जाती है, जिससे हिमालय का निर्माण हुआ। पठार के भीतर होने वाली फॉल्टिंग स्ट्राइक-स्लिप और नॉर्मल फॉल्टिंग तंत्र से जुड़ी होती है। उत्तर–दक्षिण दिशा में फैले ग्रैबेन, स्ट्राइक-स्लिप फॉल्टिंग और GPS डेटा बताते हैं कि पठार पूर्व-पश्चिम दिशा में फैल रहा है। उत्तरी क्षेत्र में स्ट्राइक-स्लिप फॉल्टिंग टेक्टोनिक गतिविधि का प्रमुख स्वरूप है, जबकि दक्षिण में उत्तर–दक्षिण दिशा में फैली नॉर्मल फॉल्ट लाइनों पर पूर्व–पश्चिम दिशा का विस्तार प्रमुख है।
